सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन “केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है” (अंश)

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन “केवल परमेश्वर के प्रबंधन के मध्य ही मनुष्य बचाया जा सकता है” (अंश)

सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं, “इस विशाल ब्रह्मांड में ऐसे कितने प्राणी हैं जो सृष्टि के नियम का बार-बार पालन करते हुए, एक ही निरंतर नियम पर चल रहे हैं और प्रजनन कार्य में लगे हैं। जो लोग मर जाते हैं वे जीवितों की कहानियों को अपने साथ ले जाते हैं और जो जीवित हैं वे मरे हुओं के वही त्रासदीपूर्ण इतिहास को दोहराते रहते हैं। मानवजाति बेबसी में स्वयं से पूछती हैः हम क्यों जीवित हैं? और हमें करना क्यों पडता है? यह संसार किसके आदेश पर चलता है? मानवजाति को किसने रचा है? क्या वास्तव में मानवजाति प्रकृति के द्वारा ही रची गई है? क्या मानवजाति वास्तव में स्वयं के भाग्य के नियंत्रण में है?… हज़ारों सालों से मानवजाति ने बार-बार ये प्रश्न किए हैं। दुर्भाग्य से, मानवजाति जितना अधिक इन प्रश्नों के जूनून से घिरती गई, विज्ञान के लिए उसके भीतर उतनी ही अधिक प्यास उत्पन्न होती गई है। देह के लिए विज्ञान संक्षिप्त संतुष्टि और क्षणिक आनन्द प्रदान करता है, परन्तु मानवजाति को तनहाई, अकेलेपन और उसकी आत्मा में छुपे आतंक और गहरी लाचारी को दूर करने के लिए काफी नहीं। मानवजाति ऐसे विज्ञान के ज्ञान का उपयोग महज इसलिए करती है कि नग्न आंखों से देख सके और दिमाग उसके हृदय को चेतनाशून्य कर सके। फिर भी ऐसा वैज्ञानिक ज्ञान मानवजाति को रहस्यों का पता लगाने से रोक नहीं सकता है। मनुष्य नहीं जानता कि ब्रह्मांड की सत्ता किसके पास है, मानवजाति की उत्पत्ति और भविष्य तो वह बिल्कुल नहीं जानता। मानवजाति सिर्फ मजबूरन इन नियमों के अधीन रहती है। न तो इससे कोई बच सकता है और न ही कोई इसे बदल सकता है, क्योंकि इन सबके मध्य और स्वर्ग में केवल एक ही शाश्वत सत्ता है जो सभी पर अपनी सम्प्रभुता रखती है। और ये वह है जिसे कभी भी मनुष्य ने देखा नहीं है, जिसे मानवजाति ने कभी जाना नहीं है, जिसके अस्तित्व में मनुष्य ने कभी भी विश्वास नहीं किया, फिर भी वही एक है जिसने मानवजाति के पूर्वजों को श्वास दी और मानवजाति को जीवन प्रदान किया। वही मानवजाति के अस्तित्व के लिए आपूर्ति और पोषण प्रदान करता है, और आज तक मानवजाति को मार्गदर्शन प्रदान करता आया है। इसके अलावा, उसी और सिर्फ़ उसी पर मानवजाति अपने अस्तित्व के लिए निर्भर करती है। इस ब्रह्माण्ड में उसी की सत्ता है और हर प्राणी पर उसी का शासन है। वह चारों मौसमों पर उसी का अधिकार है और वही वायु, शीत, बर्फ और बरसात संचालित करता है। वही मानवजाति को धूप प्रदान करता है और रात्रि लेकर आता है। उसी ने स्वर्ग और पृथ्वी की नींव डाली, मनुष्य को पहाड़, झील और नदियां तथा उसमें जीवित प्राणी उपलब्ध कराए। उसके कार्य सभी जगह हैं, उसकी सामर्थ्य सभी जगह है, उसका ज्ञान चारों ओर है, और उसका अधिकार भी सभी जगह है। प्रत्येक नियम और व्यवस्था उसी के कार्य का मूर्त रूप है, और उनमें से प्रत्येक उसकी बुद्धि और अधिकार प्रगट करता है। कौन है जो उसके प्रभुत्व से बच सकता है? कौन है जो उसकी रूपरेखा से मुक्त रह सकता है? प्रत्येक चीज़ उसकी निगाह में है और सभी कुछ उसकी अधीनता में है उसके कार्य और शक्ति मनुष्य के पास सिवाय यह मानने के और कोई विकल्प नहीं छोड़ते कि वास्तव में उसका अस्तित्व है और हर चीज़ पर उसी का अधिकार है। उसके अलावा कोई और ब्रह्मांड को नियंत्रित नहीं कर सकता, उसके अलावा कोई और तो मानवजाति को अथक पोषण तो प्रदान कर ही नहीं कर सकता। इस बात से परे कि चाहे तुम परमेश्वर के कार्यों को पहचानन के योग्य हो या नहीं और परमेश्वर के अस्तित्व पर भरोसा करते हो या नहीं, इसमें कोई संदेह नहीं है कि तुम्हारा भाग्य परमेश्वर के विधान के अंतर्गत ही रहता है, और इसमें भी कोई संदेह नहीं है कि परमेश्वर प्रत्येक चीज़ पर अपनी सम्प्रभुता बनाए रखेगा। उसका अस्तित्व और अधिकार कभी भी किसी चीज़ पर आधारित नहीं होते हैं चाहे वे मनुष्य के द्वारा पहचाने और समझे जाएं या नहीं। केवल वही मनुष्यों के अतीत, वर्तमान और भविष्य को जानता है और वही केवल मानवजाति के भाग्य को निर्धारित कर सकता है। इस बात से परे कि तुम इस सत्य को स्वीकारने के योग्य हो अथवा नहीं, अब ज्यादा समय नहीं रह गया है कि मानवजाति स्वयं अपनी आंखों से इन बातों की गवाही देगी और यह सत्य है कि परमेश्वर इसे जल्द ही पूरा करेगा। मानवजाति परमेश्वर की निगाह तले जीवित रहती और समाप्त हो जाती है। मानवजाति परमेश्वर के प्रबंधन में रहती है और जब उसकी आंखें अंतिम समय में बंद हो जाती हैं, तो वह भी उसी के प्रबंधन में होता है। बार-बार, मनुष्य आता-जाता रहता है। बिना अपवाद के, यह सब कुछ परमेश्वर के प्रारूप और सम्प्रभुता का भाग है। परमेश्वर का प्रबंधन निरंतर आगे बढ़ता रहता है और कभी रुकता नहीं है। वह मानवजाति को अपने अस्तित्व से अवगत कराएगा, अपनी सम्प्रभुता पर विश्वास कराएगा, अपने कार्यों को दिखाएगा, और अपने राज्य में वापस लाएगा। यही उसकी योजना है, और यही वह कार्य है जो वह हज़ार सालों से करता आ रहा है।” — “वचन देह में प्रकट होता है” से उद्धृत

स्रोत: यीशु मसीह का अनुसरण करते हुए

बाइबल की भविष्यवाणियाँ—धार्मिक विश्व की तबाही

बाइबिल की भविष्यवाणी

हिंदी बाइबल स्टडी (बाइबल की भविष्यवाणियाँ—धार्मिक विश्व की तबाही)

जब कटनी के तीन महीने रह गए, तब मैं ने तुम्हारे लिये वर्षा न की; मैं ने एक नगर में जल बरसाकर दूसरे में न बरसाया; एक खेत में जल बरसा, और दूसरा खेत जिस में न बरसा, वह सूख गया। इसलिये दो तीन नगरों के लोग पानी पीने को मारे मारे फिरते हुए एक ही नगर में आए, परन्तु तृप्त न हुए; तौभी तुम मेरी ओर न फिरे” (आमोस 4:7-8)।”

दो हजार साल पहले, जब प्रभु यीशु अपना काम करने के लिए आया था, एक पवित्र मंदिर जहाँ यहोवा की महिमा प्रज्ज्वलित हुई, अकाल से पीड़ित हो गया और चोरों की गुफा बन गयाI आज, धार्मिक दुनिया ने पवित्र आत्मा का कार्य खो दिया है, उजाड़ हो गया है और उतरोत्तर अधर्म का दृश्य बन गया हैI धार्मिक नेता परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन करने में विफल हो गए हैं और प्रभु के रास्ते से पूरी तरह से भटककर गुमराह हो गए हैंI क्या यह नहीं दर्शाता कि प्रभु वापस आ गया है और नया कार्य किया गया है?

बाइबल के प्रश्नों के उत्तर और पाएं आध्यात्मिक विकास

स्रोत:यीशु मसीह का अनुसरण करते हुए

तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देख रहे होगे, ऐसा तब होगा जब परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नये सिरे से बना चुका होगा

तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देख रहे होगे, ऐसा तब होगा जब परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नये सिरे से बना चुका होगा

परमेश्वर कहते हैं: “यीशु का लौटना उन लोगों के लिए एक महान उद्धार है जो सत्य को स्वीकार करने में सक्षम हैं, परन्तु उनके लिए जो सत्य को स्वीकार करने में असमर्थ हैं यह निंदा का एक संकेत है। तुम लोगों को अपना स्वयं का रास्ता चुनना चाहिए, और पवित्र आत्मा के विरोध में ईशनिंदा नहीं करनी चाहिए और सत्य को अस्वीकार नहीं करना चाहिए। तुम लोगों को अज्ञानी और अभिमानी व्यक्ति नहीं बनना चाहिए, बल्कि ऐसा बनना चाहिए जो पवित्र आत्मा के मार्गदर्शन का पालन करता हो और सत्य की खोज करने के लिए लालायित हो; सिर्फ़ इसी तरीके से तुम लोग लाभान्वित होगे। मैं तुम लोगों को परमेश्वर में विश्वास के रास्ते पर सावधानी से चलने की सलाह देता हूँ। निष्कर्ष तक न पहुँचें; इससे ज्यादा और क्या, परमेश्वर में अपने विश्वास में लापरवाह और निश्चिन्त न बनें। तुम लोगों को जानना चाहिए, कि कम से कम, जो परमेश्वर में विश्वास करते हैं उन्हें विनम्र और श्रद्धावान होना चाहिए। जिन्होंने सत्य को सुन लिया है और फिर भी इस पर अपनी नाक भौं सिकोड़ते हैं वे मूर्ख और अज्ञानी हैं। जिन्होंने सत्य को सुन लिया है और फिर भी लापरवाही के साथ निष्कर्षों तक पहुँचते हैं या सकी निंदा करते हैं ऐसे लोग अभिमान से घिरे हुए हैं। जो कोई भी यीशु पर विश्वास करता है वह दूसरों को श्राप देने या दूसरों की निंदा करने के योग्य नहीं है। तुम सब लोगों को एक ऐसा होना चाहिए जो तर्कसंगत हो और सत्य को स्वीकार करता हो।

बाइबल की भविष्यवाणी खण्ड, प्रभु की वापसी की भविष्यवाणियों—छुपी हुई भविष्यवाणियों, अंत के दिनों के न्याय की भविष्यवाणियों के साथ और भी बहुत कुछ उपलब्ध कराता है, और उन भविष्यवाणियों के पीछे के वास्तविक अर्थ की व्याख्या करता हैI

स्रोत:यीशु मसीह का अनुसरण करते हुए

 

अंत के दिनों में प्रभु किस प्रकार वापस लौटेंगे?

बाइबल अध्ययन (अंत के दिनों में प्रभु किस प्रकार वापस लौटेंगे?)

संपादक की टिप्पणी: जब अंत के दिनों में प्रभु यीशु के लौटने के तरीके की बात आती है, तो अधिकांश प्रभु के विश्वासी भाई-बहनों का मानना है कि प्रभु यीशु खुले तौर पर एक सफेद बादल पर सवार होकर हमारे सामने आएंगे। लेकिन कुछ भाई-बहन इसे लेकर उलझन में हैं क्योंकि बाइबल में यह भविष्यवाणी भी की गई है कि प्रभु एक चोर की तरह गुप्त रूप से आएंगे। तो फिर, अंत के दिनों में प्रभु किस प्रकार लौटेंगे? यह मुद्दा इस बात से संबंधित है कि हम प्रभु की वापसी का स्वागत कर सकते हैं या नहीं, इसलिए हमें इसकी खोज करनी चाहिए।

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सह-कार्यकर्ता बैठक में, सुक्सिंग ने एक निराश भाव के साथ कहा, “भाइयो और बहनो, हाल में मैं एक समस्या पर विचार करती रही हूँ: जबसे हमने प्रभु पर विश्वास किया है, हम प्रभु के अंत के दिनों में एक बादल पर सवार होकर आने और उनके द्वारा अपने स्वर्गारोहण के लिए तरस रहे हैं। वर्ष 2000 में पादरियों और एल्डरों ने कहा था कि प्रभु की वापसी निश्चित है। हालाँकि, अब यह वर्ष 2019 है और प्रभु के आगमन की विभिन्न भविष्यवाणियाँ मूल रूप से पूरी हो चुकी हैं, लेकिन हमने अभी भी प्रभु को बादल पर उतरते नहीं देखा है। आखिर मामला क्या है?” “अंत के दिनों में प्रभु किस प्रकार वापस लौटेंगे?”पढ़ना जारी रखें

Hindi New Gospel Movie | Is Life From the Bible or From God | “बाइबल और परमेश्वर”

बाइबल अध्ययन (Hindi New Gospel Movie | Is Life From the Bible or From God | “बाइबल और परमेश्वर”)

लियू झिझोंग चीन में एक स्थानीय कलीसिया के एल्डर हैं। वह 30 वर्षों से भी अधिक समय से एक विश्वासी रहे हैं, और उन्होंने निरंतर विश्वास किया है कि “बाइबल परमेश्वर से प्रेरित है,” “बाइबल परमेश्वर का प्रतिनिधित्व करती है, परमेश्वर में विश्वास करना बाइबल में विश्वास करना है, बाइबल में विश्वास करना परमेश्वर में विश्वास करना है।” उनके हृदय में बाइबल सर्वोपरि है। बाइबिल में अपनी गहरी श्रद्धा और अटूट विश्वास के कारण, उन्होंने सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अंतिम दिनों के कार्य को देखने या समझने की मांग नहीं की है। एक दिन, जब उन्होंने विश्वासियों को सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों को ऑनलाइन पढ़ने से रोक दिया, तो उनका सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कलीसिया के उपदेशकों के साथ आमना-सामना हो गया। सत्य के बारे में गंभीर बहस के बाद, क्या वह अंततः बाइबल और परमेश्वर के बीच के रिश्ते को स्पष्ट रूप से देखने में सक्षम थे? क्या वह बाइबल से हटकर यह समझने में सक्षम थे कि यीशु ही सत्य, मार्ग और जीवन है? क्या वह परमेश्वर के सामने स्वर्गारोहण किए जाएंगे?

स्रोत:यीशु मसीह का अनुसरण करते हुए

अपनी वापसी पर प्रभु किस प्रकार द्वार पर दस्तक देंगे

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हिंदी बाइबल स्टडी (अपनी वापसी पर प्रभु किस प्रकार द्वार पर दस्तक देंगे)

जियांगयांग ने कई वर्षों से प्रभु पर विश्वास किया है। सभी सच्चे विश्वासी भाई-बहनों की तरह, वह सतर्कता से उनकी वापसी की प्रतीक्षा कर रहा है ताकि उसे स्वर्ग के राज्य में आरोहित किया जा सके।

एक दिन नाश्ते के बाद, वह अपनी मेज पर बैठा था। बाहर धूप खिली थी, सूरज की चमकदार किरणें खिड़की से होती हुई उस पर चमक रहीं थीं—उसका मूड बहुत अच्छा था। उसने एक बार फिर से भजनों की किताब खोली और चिर-परिचित राग के साथ भावपूर्ण रूप से गाने लगा: “भला आदमी द्वार पर दस्तक दे रहा है, उसके बाल ओस से भीगे हुए हैं; हम जल्दी से उठें, द्वार खोलें, भले आदमी को मुड़कर जाने न दें…” (“कनान भजन”)। उसने एक बार फिर भजन गाया, और खुद की एक बुद्धिमान कुंवारी के रूप में कल्पना करने लगा, जो अपने प्यारे की आवाज सुनने में सक्षम था, जब प्रभु दरवाजे पर दस्तक देने के लिए आयें, तो उनका स्वागत करने में सक्षम था—इतने सालों से उसकी यही एकमात्र इच्छा थी। हर बार जब वह कमजोर महसूस करता था, तो प्रेरणा के लिए धर्मग्रन्थ पढ़ता और यह भजन गाता था। उसका दृढ़ विश्वास था कि प्रभु निष्ठावान हैं और उनके वादे व्यर्थ में नहीं किये गये हैं… कमरे में शानदार गायन गूंज रहा था, वह विचारों में खो गया था, और प्रकाशितवाक्य के अध्याय 1, पद संख्या 7 में की गयी भविष्यवाणी उसके मन में आई: “देखो, वह बादलों के साथ आनेवाला है, और हर एक आँख उसे देखेगी, वरन् जिन्होंने उसे बेधा था वे भी उसे देखेंगे, और पृथ्वी के सारे कुल उसके कारण छाती पीटेंगे। हाँ। आमीन।” क्या प्रभु यीशु बादलों के साथ वापस नहीं आयेंगे? सभी लोग उन्हें देखेंगे, लेकिन अगर हर कोई उन्हें देखता है, तो क्या उनके लिए द्वार खटखटाना जरूरी होगा? आखिरकार वे किस प्रकार दस्तक देंगे? “अपनी वापसी पर प्रभु किस प्रकार द्वार पर दस्तक देंगे”पढ़ना जारी रखें

अपने पुनरूत्थान के बाद यीशु रोटी खाता है और पवित्र शास्त्र को समझाता है

बाइबल अध्ययन (अपने पुनरूत्थान के बाद यीशु रोटी खाता है और पवित्र शास्त्र को समझाता है)

(लूका 24:30-32) जब वह उनके साथ भोजन करने बैठा, तो उसने रोटी लेकर धन्यवाद किया और उसे तोड़कर उनको देने लगा। तब उनकी आँखें खुल गईं; और उन्होंने उसे पहचान लिया, और वह उनकी आँखों से छिप गया। उन्होंने आपस में कहा, “जब वह मार्ग में हमसे बातें करता था और पवित्रशास्त्र का अर्थ हमें समझाता था, तो क्या हमारे मन में उत्तेजना न उत्पन्न हई?”

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(लूका 24:36-43) वे ये बातें कह ही रहे थे कि वह आप ही उनके बीच में आ खड़ा हुआ, और उनसे कहा, “तुम्हें शांति मिले।” परन्तु वे घबरा गए, और डर गए, और समझे कि हम किसी भूत को देख रहे हैं। उसने उनसे कहा, “क्यों घबराते हो? और तुम्हारे मन में क्यों सन्देह उठते हैं? मेरे हाथ और मेरे पाँव को देखो कि मैं वही हूँ। मुझे छूकर देखो, क्योंकि आत्मा के हड्डी माँस नहीं होता जैसा मुझ में देखते हो।” यह कहकर उसने उन्हें अपने हाथ पाँव दिखाए। जब आनन्द के मारे उनको प्रतीति न हुई, और वे आश्चर्य करते थे, तो उसने उनसे पूछा, “क्या यहाँ तुम्हारे पास कुछ भोजन है?” उन्होंने उसे भुनी हुई मछली का टुकड़ा दिया। उसने लेकर उनके सामने खाया। “अपने पुनरूत्थान के बाद यीशु रोटी खाता है और पवित्र शास्त्र को समझाता है”पढ़ना जारी रखें

केवल वह जो परमेश्वर के कार्य को अनुभव करता है वही परमेवर में सच में विश्वास करता है

यद्यपि बहुत से लोग परमेश्वर पर विश्वास करते हैं, किंतु बहुत कम लोग समझते हैं कि परमेश्वर पर विश्वास करने का अर्थ क्या है, और परमेश्वर के मन के अनुरूप बनने के लिये उन्हें क्या करना चाहिए। ऐसा इसलिए है क्योंकि यद्यपि लोग “परमेश्वर” शब्द और “परमेश्वर का कार्य” जैसे वाक्यांश से परिचित हैं, किंतु वे परमेश्वर को नहीं जानते हैं, और उससे भी कम वे उसके कार्य को जानते हैं। इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि तब वे सभी जो परमेश्वर को नहीं जानते हैं, वे दुविधायुक्त विश्वास रखते हैं। लोग परमेश्वर पर विश्वास करने को गंभीरता से नहीं लेते हैं, क्योंकि परमेश्वर पर विश्वास करना उनके लिये अत्यधिक अनजाना और अजीब है। इस प्रकार, वे परमेश्वर की माँग से कम पड़ते हैं। दूसरे शब्दों में, यदि लोग परमेश्वर को नहीं जानते हैं, तो वे उसके कार्य को भी नहीं जानते हैं, तब वे परमेश्वर के इस्तेमाल के योग्य नहीं हैं, और उससे भी कम यह कि वे परमेश्वर की इच्छा को पूरा नहीं कर सकते हैं। “परमेश्वर पर विश्वास” का अर्थ, यह विश्वास करना है कि परमेश्वर है; यह परमेश्वर पर विश्वास की सरलतम अवधारणा है। इससे बढ़कर यह बात है कि परमेश्वर है, यह मानना परमेश्वर पर सचमुच विश्वास करना नहीं है; बल्कि यह मजबूत धार्मिक प्रभाव के साथ एक प्रकार का सरल विश्वास है। परमेश्वर पर सच्चे विश्वास का अर्थ इस विश्वास के आधार पर परमेश्वर के वचनों और कामों का अनुभव करना है कि परमेश्वर सब वस्तुओं पर संप्रभुता रखता है। इस तरह से तुम अपने भ्रष्ट स्वभाव से मुक्त हो जाओगे, परमेश्वर की इच्छा को पूरा करोगे और परमेश्वर को जान जाओगे। केवल इस प्रकार की यात्रा के माध्यम से ही तुम्हें परमेश्वर पर विश्वास करने वाला कहा जा सकता है। मगर लोग परमेश्वर पर विश्वास को अक्सर बहुत सरल और तुच्छ मानते हैं। ऐसे लोगों का विश्वास अर्थहीन है और कभी भी परमेश्वर का अनुमोदन नहीं पा सकता है, क्योंकि वे गलत पथ पर चलते हैं। आज, अभी भी कुछ ऐसे लोग हैं जो अक्षरों में, खोखले सिद्धान्तों में परमेश्वर पर विश्वास करते हैं। वे इस बात से अनजान हैं कि परमेश्वर पर उनके विश्वास में कोई सार नहीं है, और कि वे परमेश्वर का अनुमोदन पाने में असमर्थ हैं, और तब भी वे परमेश्वर से शांति और पर्याप्त अनुग्रह के लिये प्रार्थना करते हैं। हमें रुक कर स्वयं से प्रश्न करना चाहिए: क्या परमेश्वर पर विश्वास करना पृथ्वी पर वास्तव में सबसे अधिक आसान बात है? क्या परमेश्वर पर विश्वास करने का अर्थ, परमेश्वर से अधिक अनुग्रह पाने की अपेक्षा कुछ नहीं है? क्या जो लोग परमेश्वर पर विश्वास करते हैं पर उसे नहीं जानते हैं; और जो उस पर विश्वास तो करते हैं पर उसका विरोध करते हैं, सचमुच उसकी इच्छा को पूरा करते हैं? “केवल वह जो परमेश्वर के कार्य को अनुभव करता है वही परमेवर में सच में विश्वास करता है”पढ़ना जारी रखें

बाइबल की भविष्यवाणियों के प्रति परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप व्यवहार कैसे करें?

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बाइबल अध्ययन (बाइबल की भविष्यवाणियों के प्रति परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप व्यवहार कैसे करें?)

बाइबल में लिखा है: “पर पहले यह जान लो कि पवित्रशास्त्र की कोई भी भविष्यद्वाणी किसी के अपने ही विचारधारा के आधार पर पूर्ण नहीं होती, क्योंकि कोई भी भविष्यद्वाणी मनुष्य की इच्छा से कभी नहीं हुई, पर भक्‍त जन पवित्र आत्मा के द्वारा उभारे जाकर परमेश्‍वर की ओर से बोलते थे” (2 पतरस 1:20-21)। “वैसे ही उसने अपनी सब पत्रियों में भी इन बातों की चर्चा की है, जिनमें कुछ बातें ऐसी हैं जिनका समझना कठिन है, और अनपढ़ और चंचल लोग उन के अर्थों को भी पवित्रशास्त्र की अन्य बातों की तरह खींच तानकर अपने ही नाश का कारण बनाते हैं” (2 पतरस 3:16)। “क्योंकि शब्द मारता है, पर आत्मा जिलाता है” (2 कुरिन्थियों 3:6)। ये पद बताते हैं कि हम भविष्यवाणियों की व्याख्या सचमुच अपनी धारणाओं और कल्पनाओं के भरोसे नहीं कर सकते हैं, क्योंकि भविष्यवाणियाँ परमेश्वर से आयीं हैं, और केवल पवित्र आत्मा की प्रबुद्धता के माध्यम से हम उन्हें समझ सकते हैं। हालाँकि, भविष्यवाणियाँ पूरी होने से पहले, हमारे लिए खुद की धारणाओं पर भरोसा करते हुए उनकी शाब्दिक व्याख्या करना आसान है। इससे भविष्यवाणियों की गलत व्याख्या करना आसान हो जाता है। हमारी बेतुकी व्याख्या दूसरों को गुमराह करेगी। उदाहरण के लिए, जब मसीहा के आगमन के बारे में भविष्यवाणियों की बात आई, तो फरीसियों ने अपने विचारों पर भरोसा किया। प्रभु यीशु के जन्म से पहले, यशायाह 7:14, 9:6-7 और मीका 5:2 में की गयी भविष्यवाणियों के शाब्दिक अर्थ के आधार पर, उन्होंने मसीहा के आगमन की कल्पना की: मसीहा बेथलेहेम में एक कुंवारी से पैदा होगा, और उसका नाम इम्मानुएल रखा जाएगा; वह एक महल में बड़ा होगा और एक सिंहासन पर बैठकर इस्राएल पर शासन करेगा। लेकिन, जब भविष्यवाणियाँ पूरी हुईं, तो उनकी कल्पनाएं, तथ्यों के विपरीत ठहरीं। जो उन्होंने वास्तव में देखा था वह यह था: प्रभु विवाहित मरियम से और एक बढ़ई के परिवार में पैदा हुए, और उन्हें यीशु के नाम से पुकारा गया; वे नाज़रेथ से थे, और अंत में उन्हें क्रूस पर चढ़ाया गया था। यह भविष्यवाणियों के शाब्दिक अर्थ से बहुत अलग है। इसलिए, उन्होंने देखा कि प्रभु यीशु के कार्यों और उपदेश में अधिकार और सामर्थ्य था, फिर भी फरीसियों ने प्रभु यीशु को उस मसीहा के रूप में स्वीकार नहीं किया जिसका वादा किया गया था। इसके बजाय, यह कहते हुए कि वे दुष्टात्माओं को बाहर निकालने के लिए शैतानों के राजकुमार पर निर्भर रहते हैं, उन्होंने प्रभु यीशु की निंदा की। इस प्रकार, उन्होंने पवित्र आत्मा के विरुद्ध ईशनिंदा का पाप किया, परमेश्वर के स्वभाव कोका अपमान किया और उन्हें प्रभु की क्षमा कभी हासिल नहीं होगी। और वे आम लोग, जिनके पास कोई विवेक नहीं था, जो फरीसियों के कहे पर विश्वास करते थे, वे भी परमेश्वर का उद्धार खो बैठे। इस उदाहरण से, हम यह देख सकते हैं कि फरीसियों ने अपनी कल्पनाओं और भविष्यवाणियों के शाब्दिक अर्थ पर ही विश्वास रखने के कारण, खुद को और दूसरों को भी बर्बाद कर दिया।  “बाइबल की भविष्यवाणियों के प्रति परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप व्यवहार कैसे करें?”पढ़ना जारी रखें

Hindi Christian Crosstalk | अंत के दिनों के फ़रीसी | Who Stops Us From Welcoming Lord Jesus’ Return?

बाइबल अध्ययन (Hindi Christian Crosstalk | अंत के दिनों के फ़रीसी | Who Stops Us From Welcoming Lord Jesus’ Return?)

ईसाई झांग यी ने गवाही सुनी कि प्रभु लौट आये हैं, लेकिन जब उसने सत्य मार्ग की जाँच-पड़ताल की, तो उसके पादरी और एल्डर ने उसे कई बार यह कहकर रोकने और रुकावट डालने की कोशिश की कि, “यह दावा करने वाले कि प्रभु देहधारण करके आ गये हैं, पाखंड और झूठी बातें फैला रहे हैं। उनकी बात मत सुनो, उनके वचनों को मत पढ़ो, और उनसे कोई सम्पर्क न रखो!” इससे झांग उलझन में पड़ गया, क्योंकि प्रभु यीशु ने साफ़ तौर पर कहा है, “आधी रात को धूम मची : ‘देखो, दूल्हा आ रहा है! उससे भेंट करने के लिये चलो‘” (मत्ती 25:6)।(© BSI) “मेरी भेड़ें मेरा शब्द सुनती हैं” (यूहन्ना 10:27)।(© BSI) प्रभु यीशु के वचनों में कहा गया है कि लोगों को बुद्धिमान कुँवारियाँ बनकर, सक्रिय रूप से प्रभु की वाणी की खोज करना और उसे सुनना चाहिये ताकि प्रभु का स्वागत किया जा सके, लेकिन उसके पादरी और एल्डर विश्वासियों को परमेश्वर की वाणी सुनने से रोकने और पाबंदी लगाने के लिये भरसक कोशिश करते हैं। वे लोग विश्वासियों के सत्य मार्ग की जाँच-पड़ताल करने से डरे हुए क्यों हैं? … अपने पादरी और एल्डर से बहस करके, झांग आख़िरकार समझ जाता है कि अंत के दिनों में फ़रीसी कौन हैं और विश्वासियों को प्रभु का स्वागत करने में असली बाधक कौन बन रहा है।

प्रभु की प्रार्थना, परमेश्वर के राज्य का रहस्य, ईसाई अनिवार्य तत्व
यह लेख अभी पढ़ें, इससे आप परमेश्वर के राज्य के रहस्यों को समझ जायेंगे।
पता चला है कि परमेश्वर का राज्य स्वर्ग में न होकर पृथ्वी पर होगा।

स्रोत:यीशु मसीह का अनुसरण करते हुए

 

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