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प्रार्थना के अभ्यास के बारे में

तुम लोग अपने दैनिक जीवन में प्रार्थना को कोई महत्व नहीं देते। मनुष्य प्रार्थना की उपेक्षा करता है। मनुष्य बेमन से परमेश्वर के सामने लापरवाही से प्रार्थना किया करता था।

तुम लोग अपने दैनिक जीवन में प्रार्थना को कोई महत्व नहीं देते। मनुष्य प्रार्थना की उपेक्षा करता है। मनुष्य बेमन से परमेश्वर के सामने लापरवाही से प्रार्थना किया करता था। किसी भी व्यक्ति ने कभी भी पूरे हृदय से व समर्पण भाव से परमेश्वर के सामने स्वयं को प्रस्तुत नहीं किया और परमेश्वर की सच्चे मन से प्रार्थना नहीं की। मुसीबत आने पर ही मनुष्य ने परमेश्वर से प्रार्थना की। इस पूरे समय में, क्या तुमने कभी परमेश्वर से सच में प्रार्थना की है? क्या कभी ऐसा समय आया है, जब तुम परमेश्वर के सामने इसलिए रोए, क्योंकि तुम दुखी थे? क्या कोई ऐसा समय आया है, जब तुमने उसके सामने खुद को जाना हो? क्या तुमने कभी परमेश्वर से दिल से प्रार्थना की है? प्रार्थना अभ्यास के माध्यम से आती है : यदि तुम आमतौर पर घर पर प्रार्थना नहीं करते, तो तुम कलीसिया में तुम प्रार्थना कर पाओ, यह संभव ही नहीं है, और यदि तुम छोटी सभाओं में भी जाकर सामान्यतः प्रार्थना नहीं करते, तो तुम बड़ी सभाओं में प्रार्थना करने में असमर्थ होगे। यदि तुम नियमित रूप से परमेश्वर के निकट नहीं आते या परमेश्वर के वचनों पर चिंतन नहीं करते, तो प्रार्थना के समय तुम्हारे पास कहने के लिए कुछ नहीं होगा, और अगर तुम प्रार्थना करते भी हो, तो तुम्हारे केवल होंठ बुदबुदाएंगे; वह सच्ची प्रार्थना नहीं होगी।
ईसाई प्रार्थना|मसीही जीवन

सच्ची प्रार्थना क्या है? प्रार्थना परमेश्वर को यह बताना है कि तुम्हारे हृदय में क्या है, परमेश्वर की इच्छा को समझकर उससे बात करना है, परमेश्वर के वचनों के माध्यम से उसके साथ संवाद करना है, स्वयं को विशेष रूप से परमेश्वर के निकट महसूस करना है, यह महसूस करना है कि वह तुम्हारे सामने है, और यह विश्वास करना है कि तुम्हें उससे कुछ कहना है। तुम्हें लगेगा कि तुम्हारा हृदय प्रकाश से भर गया है और तुम्हें महसूस होगा कि परमेश्वर कितना प्यारा है। तुम विशेष रूप से प्रेरित महसूस करते हो, और तुम्हारी बातें सुनकर तुम्हारे भाइयों और बहनों को संतुष्टि मिलती है। उन्हें लगेगा कि जो शब्द तुम बोल रहे हो, वे उनके मन की बात है, उन्हें लगेगा कि जो वे कहना चाहते हैं, उसी बात को तुम अपने शब्दों के माध्यम से कह रहे हो। यही सच्ची प्रार्थना है। एक बार जब तुम सच्चे मन से प्रार्थना करने लगोगे, तुम्हारा दिल शांत हो जाएगा और संतुष्टि का एहसास होगा। परमेश्वर से प्रेम करने की शक्ति बढ़ सकती है, और तुम महसूस करोगे कि जीवन में परमेश्वर से प्रेम करने से अधिक मूल्यवान या अर्थपूर्ण और कुछ नहीं है। इससे साबित होता है कि तुम्हारी प्रार्थना प्रभावी रही है। क्या तुमने कभी इस तरह से प्रार्थना की है?

और प्रार्थना की विषयवस्तु के बारे में क्या खयाल है? तुम्हारी प्रार्थना तुम्हारे हृदय की सच्ची अवस्था और पवित्र आत्मा के कार्य के अनुरूप धीरे-धीरे बढ़नी चाहिए; तुम परमेश्वर से उसकी इच्छा और मनुष्य से क्या अपेक्षा रखता है, इसके अनुसार उसके साथ संवाद करते हो। जब तुम प्रार्थना का अभ्यास शुरू करो, तो सबसे पहले अपना हृदय परमेश्वर को दे दो। परमेश्वर की इच्छा को समझने का प्रयास न करो—केवल अपने हृदय में ही परमेश्वर से बात करने की कोशिश करो। जब तुम परमेश्वर के समक्ष आते हो, तो इस तरह बोलो : “हे परमेश्वर, आज ही मुझे एहसास हुआ कि मैं तुम्हारी अवज्ञा करता था। मैं वास्तव में भ्रष्ट और नीच हूँ। मैं केवल अपना जीवन बर्बाद करता रहा हूँ। आज से मैं तुम्हारे लिए जीऊँगा। मैं एक अर्थपूर्ण जीवन जीऊँगा और तुम्हारी इच्छा पूरी करूँगा। तुम्हारा आत्मा मुझे लगातार रोशन और प्रबुद्ध करता हुआ हमेशा मेरे अंदर काम करे। मुझे अपने सामने मज़बूत और ज़बर्दस्त गवाही देने दो। शैतान को हमारे भीतर प्रकाशित तुम्हारी महिमा, तुम्हारी गवाही और तुम्हारी विजय का प्रमाण देखने दो।” जब तुम इस तरह से प्रार्थना करते हो, तो तुम्हारा हृदय पूरी तरह से मुक्त हो जाएगा। इस तरह से प्रार्थना करने के बाद तुम्हारा हृदय परमेश्वर के ज्यादा करीब हो जाएगा, और यदि तुम अकसर इस तरह से प्रार्थना कर सको, तो पवित्र आत्मा तुममें अनिवार्य रूप से काम करेगा। यदि तुम हमेशा इस तरह से परमेश्वर को पुकारोगे, और उसके सामने अपना संकल्प करोगे, तो एक दिन आएगा परमेश्वर के सामने जब तुम्हारा संकल्प स्वीकृत हो जाएगा, जब तुम्हारा हृदय और तुम्हारा पूरा अस्तित्व परमेश्वर द्वारा प्राप्त कर लिया जायेगा, और तुम अंततः उसके द्वारा पूर्ण कर दिए जाओगे। तुम लोगों के लिए प्रार्थना का अत्यधिक महत्व है। जब तुम प्रार्थना करते हो और पवित्र आत्मा के कार्य को प्राप्त करते हो, तो तुम्हारा हृदय परमेश्वर द्वारा प्रेरित होगा, और तुम्हें तब परमेश्वर से प्रेम करने की ताकत मिलेगी। यदि तुम हृदय से प्रार्थना नहीं करते, यदि तुम पूरे खुले हृदय से परमेश्वर से संवाद नहीं करते, तो परमेश्वर के पास तुममें कार्य करने का कोई तरीका नहीं होगा। यदि प्रार्थना करने और अपने हृदय की बात कहने के बाद, परमेश्वर के आत्मा ने अपना काम शुरू नहीं किया है, और तुम्हें कोई प्रेरणा नहीं मिली है, तो यह दर्शाता है कि तुम्हारे हृदय में ईमानदारी की कमी है, तुम्हारे शब्द असत्य और अभी भी अशुद्ध हैं। यदि प्रार्थना करने के बाद तुम्हें संतुष्टि का एहसास हो, तो तुम्हारी प्रार्थनाएँ परमेश्वर को स्वीकार्य हैं और परमेश्वर का आत्मा तुममें काम कर रहा है। परमेश्वर के सामने सेवा करने वाले के तौर पर तुम प्रार्थना से रहित नहीं हो सकते। यदि तुम वास्तव में परमेश्वर के साथ संवाद को ऐसी चीज़ के रूप में देखते हो, जो सार्थक और मूल्यवान है, तो क्या तुम प्रार्थना को त्याग सकते हो? कोई भी परमेश्वर के साथ संवाद किए बिना नहीं रह सकता। प्रार्थना के बिना तुम देह में जीते हो, शैतान के बंधन में रहते हो; सच्ची प्रार्थना के बिना तुम अँधेरे के प्रभाव में रहते हो। मुझे आशा है कि तुम सब भाई-बहन हर दिन सच्ची प्रार्थना करने में सक्षम हो। यह नियमों का पालन करने के बारे में नहीं है, बल्कि एक निश्चित परिणाम प्राप्त करने के बारे में है। क्या तुम सुबह की प्रार्थनाएँ करने और परमेश्वर के वचनों का आनंद लेने के लिए, अपनी थोड़ी-सी नींद का त्याग करने को तैयार हो? यदि तुम शुद्ध हृदय से प्रार्थना करते हो और इस तरह परमेश्वर के वचनों को खाते और पीते हो, तो तुम उसे अधिक स्वीकार्य होगे। यदि हर सुबह तुम ऐसा करते हो, यदि हर दिन तुम परमेश्वर को अपना हृदय देने का अभ्यास करते हो, उससे संवाद और उससे जुडने की कोशिश करते हो, तो निश्चित रूप से परमेश्वर के बारे में तुम्हारा ज्ञान बढ़ेगा, और तुम परमेश्वर की इच्छा को समझने में अधिक सक्षम हो पाओगे। तुम कहते हो : “हे परमेश्वर! मैं अपना कर्तव्य पूरा करने को तैयार हूँ। केवल तुम्हें ही मैं अपने पूरा अस्तित्व समर्पित करता हूँ, ताकि तुम हममें महिमामंडित हो सको, ताकि तुम हमारे इस समूह द्वारादी गई गवाही का आनंद ले सको। मैं तुमसे हममें कार्य करने की विनती करता हूँ, ताकि मैं तुमसे सच्चा प्यार करने और तुम्हें संतुष्ट करने और तुम्हारा अपने लक्ष्य के रूप में अनुसरण करने में सक्षम हो सकूँ।” जैसे ही तुम यह दायित्व उठाते हो, परमेश्वर निश्चित रूप से तुम्हें पूर्ण बनाएगा। तुम्हें केवल अपने फायदे के लिए ही प्रार्थना नहीं करनी चाहिए, बल्कि परमेश्वर की इच्छा का पालन करने और उससे प्यार करने के लिए भी तुम्हें प्रार्थना करनी चाहिए। यह सबसे सच्ची तरह की प्रार्थना है। क्या तुम कोई ऐसे व्यक्ति हो, जो परमेश्वर की इच्छा का पालन करने के लिए प्रार्थना करता है?

अतीत में, तुम्हें नहीं पता था कि प्रार्थना कैसे करनी चाहिए, और तुमने प्रार्थना के मामले की उपेक्षा की। अब तुम्हें प्रार्थना करने के लिए खुद को प्रशिक्षित करने की भरसक कोशिश करनी चाहिए। यदि तुम परमेश्वर से प्रेम करने के लिए अपने भीतर की ताकत का आह्वान करने में असमर्थ हो, तो तुम प्रार्थना कैसे करते हो? तुम कहते हो: “हे परमेश्वर, मेरा हृदय तुमसे सच्चा प्रेम करने में असमर्थ है। मैं तुमसे प्रेम करना चाहता हूँ, लेकिन मेरे पास ताकत की कमी है। मैं क्या करूँ? तुम मेरी आध्यात्मिक आँखें खोल दो, तुम्हारा आत्मा मेरे हृदय को प्रेरित करे। इसे ऐसा बना दो कि जब मैं तुम्हारे सामने आऊँ, तो वह सबकुछ फेंक दूँ, जो नकारात्मक है, किसी भी व्यक्ति, विषय या चीज़ से विवश होना छोड़ दूँ, और अपना हृदय तुम्हारे सामने पूरी तरह से खोलकर रख दूँ, और ऐसा कर दो कि मैं अपना संपूर्ण अस्तित्व तुम्हारे सामने अर्पण कर सकूँ। तुम जैसे भी मेरी परीक्षा लो, मैं तैयार हूँ। अब मैं अपनी भविष्य की संभावनाओं पर कोई ध्यान नहीं देता, और न ही मैं मृत्यु के जुए से बँधा हूँ। ऐसे हृदय के साथ जो तुमसे प्रेम करता है, मैं जीवन के मार्ग की तलाश करना चाहता हूँ। हर बात, हर चीज़—सब तुम्हारे हाथों में है; मेरा भाग्य तुम्हारे हाथों में है और तुमने मेरा पूरा जीवन अपने हाथों में थामा हुआ है। अब मैं तुमसे प्रेम करना चाहता हूँ, और चाहे तुम मुझे अपने से प्रेम करने दो या न करने दो, चाहे शैतान कितना भी हस्तक्षेप करे, मैं तुमसे प्रेम करने के लिए कृतसंकल्प हूँ।” जब तुम्हारे सामने इस तरह की समस्या आए, तो इस तरह से प्रार्थना करना। यदि तुम हर दिन इस तरह प्रार्थना करोगे, तो धीरे-धीरे परमेश्वर से प्रेम करने की तुम्हारी ताकत बढ़ती जाएगी।

सच्ची प्रार्थना में कोई कैसे प्रवेश करता है?

प्रार्थना करते समय तुम्हारे पास ऐसा हृदय होना चाहिए, जो परमेश्वर के सामने शांत रहे, और तुम्हारे पास एक ईमानदार हृदय होना चाहिए। तुम सही अर्थों में परमेश्वर के साथ संवाद और प्रार्थना कर रहे हो—तुम्हें प्रीतिकर वचनों से परमेश्वर को फुसलाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। प्रार्थना उस पर केंद्रित होनी चाहिए, जिसे परमेश्वर अभी संपन्न करना चाहता हो। प्रार्थना करते समय परमेश्वर से तुम्हें अधिक प्रबुद्ध बनाने और रोशन करने के लिए कहो और अपनी वास्तविक अवस्थाओं और अपनी परेशानियाँ उसके सामने रखो, और साथ ही वह संकल्प भी, जो तुमने परमेश्वर के सामने लिया था। प्रार्थना का अर्थ प्रक्रिया का पालन करना नहीं है; उसका अर्थ है सच्चे हृदय से परमेश्वर को खोजना। मांगो कि परमेश्वर तुम्हारे हृदय की रक्षा करे, ताकि तुम्हारा हृदय अकसर उसके सामने शांत हो सके; कि जिस परिवेश में उसने तुम्हें रखा है, उसमें तुम खुद को जान पाओ, खुद से घृणा करो, और खुद को त्याग सको, और इस प्रकार तुम परमेश्वर के साथ एक सामान्य रिश्ता बना पाओ और वास्तव में ऐसे व्यक्ति बन पाओ, जो परमेश्वर से प्रेम करता है।

प्रार्थना का क्या महत्व है?

प्रार्थना उन तरीकों में से एक है, जिनमें मनुष्य परमेश्वर से सहयोग करता है, यह एक ऐसा साधन है जिसके द्वारा मनुष्य परमेश्वर को पुकारता है, और यह वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा मनुष्य को परमेश्वर के आत्मा द्वारा प्रेरित किया जाता है। यह कहा जा सकता है कि जो लोग प्रार्थना नहीं करते, वे मृत लोग हैं जो आत्मा से रहित हैं, जिससे साबित होता है कि उनके पास परमेश्वर द्वारा प्रेरित किए जाने की योग्यता की कमी है। प्रार्थना के बिना सामान्य आध्यात्मिक जीवन जीना असंभव होगा, पवित्र आत्मा के कार्य के साथ बने रहने की बात तो छोड़ ही दो। प्रार्थना से रहित होना परमेश्वर के साथ अपना संबंध तोड़ना है, और उसके बिना परमेश्वर की प्रशंसा पाना असंभव होगा। परमेश्वर के विश्वासी के तौर पर, व्यक्ति जितना अधिक प्रार्थना करता है, अर्थात् व्यक्ति परमेश्वर द्वारा जितना अधिक प्रेरित किया जाता है, उतना ही अधिक वह संकल्प से भर जाएगा और परमेश्वर से नई प्रबुद्धता प्राप्त करने में अधिक सक्षम होगा। नतीजतन, इस तरह के व्यक्ति को पवित्र आत्मा द्वारा बहुत जल्दी पूर्ण बनाया जा सकता है।

प्रार्थना का उद्देश्य क्या प्रभाव हासिल करना है?

लोग प्रार्थना का अभ्यास करने और प्रार्थना के महत्व को समझने में सक्षम हो सकते हैं, लेकिन प्रार्थना का प्रभावी होना कोई सरल बात नहीं है। प्रार्थना केवल यन्त्रवत् ढंग से करना, प्रक्रिया का पालन करना, या परमेश्वर के वचनों का पाठ करना नहीं है। दूसरे शब्दों में, प्रार्थना कुछ वचनों को रटना नहीं है और यह दूसरों की नकल करना नहीं है। प्रार्थना में व्यक्ति को उस स्थिति तक पहुँचना चाहिए, जहाँ अपना हृदय परमेश्वर को दिया जा सके, जहाँ वह अपना हृदय खोलकर रख सके, ताकि वह परमेश्वर द्वारा प्रेरित हो सके। यदि प्रार्थना को प्रभावी होना है, तो उसे परमेश्वर के वचन पढ़ने पर आधारित होना चाहिए। केवल परमेश्वर के वचनों के भीतर से प्रार्थना करने से ही व्यक्ति अधिक प्रबुद्धता और रोशनी प्राप्त कर सकता है। सच्ची प्रार्थना की अभिव्यक्तियाँ हैं : एक ऐसा हृदय होना, जो उस सबके लिए तरसता है जो परमेश्वर चाहता है, और यही नहीं, जो वह माँगता है उसे पूरा करने की इच्छा रखता है; उससे घृणा करना जिससे परमेश्वर घृणा करता है, और फिर इस आधार पर इसकी कुछ समझ प्राप्त करना, और परमेश्वर द्वारा प्रतिपादित सत्यों के बारे में कुछ ज्ञान और स्पष्टता हासिल करना। प्रार्थना के बाद यदि संकल्प, विश्वास, ज्ञान और अभ्यास का मार्ग हो, केवल तभी उसे सच्ची प्रार्थना कहा जा सकता है, और केवल इस प्रकार की प्रार्थना ही प्रभावी हो सकती है। फिर भी प्रार्थना को परमेश्वर के वचनों के आनंद पर निर्मित किया जाना चाहिए, उसे परमेश्वर के साथ उसके वचनों में, संवाद करने की नींव पर स्थापित होना चाहिए, और हृदय को परमेश्वर की खोज करने और उसके समक्ष शांत होने में सक्षम होना चाहिए। इस तरह की प्रार्थना पहले ही परमेश्वर के साथ सच्चे संवाद के चरण में प्रवेश कर चुकी है।

प्रार्थना के बारे में सबसे बुनियादी ज्ञान:

1. जो भी मन में आए, उसे बिना सोचे-समझे न कहो। तुम्हारे हृदय पर एक दायित्व होना चाहिए, यानी प्रार्थना करते समय तुम्हारे पास एक उद्देश्य होना चाहिए।

2. प्रार्थना में परमेश्वर के वचन शामिल होने चाहिए; उसे परमेश्वर के वचनों पर आधारित होना चाहिए।

3. प्रार्थना करते समय तुम्हें पुरानी या बीती बातों को उसमें नहीं मिलाना चाहिए। तुम्हारी प्रार्थनाएँ परमेश्वर के वर्तमान वचनों से संबंधित होनी चाहिए, और जब तुम प्रार्थना करो, तो परमेश्वर को अपने अंतरतम विचार बताओ।

4. समूह-प्रार्थना एक केंद्र के इर्दगिर्द घूमनी चाहिए, जो आवश्यक रूप से, पवित्र आत्मा का वर्तमान कार्य है।

5. सभी लोगों को मध्यस्थतापरक प्रार्थना सीखनी है। यह परमेश्वर की इच्छा के प्रति विचारशीलता दिखाने का एक तरीका भी है।

व्यक्ति का प्रार्थना का जीवन, प्रार्थना के महत्व की समझ और प्रार्थना के मूलभूत ज्ञान पर आधारित है। दैनिक जीवन में, बार-बार अपनी कमियों के लिए प्रार्थना करो, जीवन में अपने स्वभाव में बदलाव लाने के लिए प्रार्थना करो, और परमेश्वर के वचनों के अपने ज्ञान के आधार पर प्रार्थना करो। प्रत्येक व्यक्ति को प्रार्थना का अपना जीवन स्थापित करना चाहिए, उन्हें परमेश्वर के वचनों को जानने के लिए प्रार्थना करनी चाहिए, और उन्हें परमेश्वर के कार्य का ज्ञान प्राप्त करने के लिए प्रार्थना करनी चाहिए। परमेश्वर के सामने अपनी व्यक्तिगत परिस्थितियाँ खोलकर रख दो और तुम जिस ढंग से प्रार्थना करते हो, उसकी चिंता किए बिना अपने वास्तविक स्वरूप में रहो, और सच्ची समझ और परमेश्वर के वचनों का वास्तविक अनुभव प्राप्त करना ही मुख्य बात है। आध्यात्मिक जीवन में प्रवेश का अनुसरण करने वाले व्यक्ति को कई अलग-अलग तरीकों से प्रार्थना करने में सक्षम होना चाहिए। मौन प्रार्थना, परमेश्वर के वचनों पर चिंतन करना, परमेश्वर के कार्य को जानना—ये सभी सामान्य आध्यात्मिक जीवन में प्रवेश प्राप्त करने के लिए आध्यात्मिक संगति के उद्देश्यपूर्ण कार्य के उदाहरण हैं, जो हमेशा परमेश्वर के सामने व्यक्ति की अवस्थाओं में सुधार करते हैं और व्यक्ति को जीवन में और अधिक प्रगति करने के लिए प्रेरित करते हैं। संक्षेप में, तुम जो कुछ भी करते हो, चाहे वह परमेश्वर के वचनों को खाना और पीना हो, या चुपचाप प्रार्थना करना हो, या जोर-जोर से घोषणा करना हो, वह तुम्हें परमेश्वर के वचनों, उसके कार्य और जो कुछ वह तुममें हासिल करना चाहता है, उसे स्पष्ट रूप से देखने में सक्षम बनाने के लिए है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि तुम जो कुछ भी करते हो, वह परमेश्वर द्वारा अपेक्षित मानकों तक पहुँचने और अपने जीवन को नई ऊँचाइयों तक ले जाने के लिए किया जाता है। परमेश्वर की मनुष्य से न्यूनतम अपेक्षा यह है कि मनुष्य अपना हृदय उसके प्रति खोल सके। यदि मनुष्य अपना सच्चा हृदय परमेश्वर को देता है और उसे अपने हृदय की सच्ची बात बताता है, तो परमेश्वर उसमें कार्य करने को तैयार होता है। परमेश्वर मनुष्य के कलुषित हृदय की नहीं, बल्कि शुद्ध और ईमानदार हृदय की चाह रखता है। यदि मनुष्य परमेश्वर से अपने हृदय को खोलकर बात नहीं करता है, तो परमेश्वर उसके हृदय को प्रेरित नहीं करेगा या उसमें कार्य नहीं करेगा। इसलिए, प्रार्थना का मर्म है, अपने हृदय से परमेश्वर से बात करना, अपने आपको उसके सामने पूरी तरह से खोलकर, उसे अपनी कमियों या विद्रोही स्वभाव के बारे में बताना; केवल तभी परमेश्वर को तुम्हारी प्रार्थनाओं में रुचि होगी, अन्यथा वह तुमसे मुँह मोड़ लेगा। प्रार्थना का न्यूनतम मानदंड यह है कि तुम्हें परमेश्वर के सामने अपना हृदय शांत रखने में सक्षम होना चाहिए, और उसे परमेश्वर से अलग नहीं हटना चाहिए। यह हो सकता है कि इस चरण के दौरान तुम्हें एक नई या उच्च अंतर्दृष्टि प्राप्त न हो, लेकिन फिर तुम्हें यथास्थिति बनाए रखने के लिए प्रार्थना का उपयोग करना चाहिए—तुम्हें पीछे नहीं हटना चाहिए। कम से कम इसे तो तुम्हें प्राप्त करना ही चाहिए। यदि तुम यह भी नहीं कर सकते, तो इससे साबित होता है कि तुम्हारा आध्यात्मिक जीवन सही रास्ते पर नहीं है। परिणामस्वरूप, तुम्हारे पास पहले जो दृष्टि थी, उसे बनाए रखने में तुम असमर्थ होगे, तुम परमेश्वर में विश्वास खो दोगे, और तुम्हारा संकल्प इसके बाद नष्ट हो जाएगा। तुमने आध्यात्मिक जीवन में प्रवेश किया है या नहीं, इसका एक चिह्न यह देखना है कि क्या तुम्हारी प्रार्थना सही रास्ते पर है। सभी लोगों को इस वास्तविकता में प्रवेश करना चाहिए; उन सभी को प्रार्थना में स्वयं को लगातार सजगता से प्रशिक्षित करने का काम करना चाहिए, निष्क्रिय रूप से प्रतीक्षा करने के बजाय, सचेत रूप से पवित्र आत्मा द्वारा प्रेरित किए जाने का प्रयास करना चाहिए। तभी वे वास्तव में परमेश्वर की तलाश करने वाले लोग होंगे।

जब तुम प्रार्थना करना शुरू करो, तो अत्यधिक महत्वाकाँक्षी बनने की कोशिश मत करो और एक ही झटके में सबकुछ हासिल करने की उम्मीद मत करो। तुम इस बात की उम्मीद रखते हुए अतिशय माँगें नहीं कर सकते कि जैसे ही तुम माँगोगे, तुम्हें पवित्र आत्मा द्वारा प्रेरित कर दिया जाएगा, या कि तुम्हें प्रबुद्धता और रोशनी मिल जाएगी, या कि परमेश्वर तुम पर अनुग्रह बरसा देगा। ऐसा नहीं होगा; परमेश्वर अलौकिक चीजें नहीं करता। परमेश्वर अपने अनुसार लोगों की प्रार्थनाओं को स्वीकार करता है, और कभी-कभी वह यह देखने के लिए कि तुम उसके प्रति वफ़ादार हो या नहीं, तुम्हारे विश्वास को परखता है। जब तुम प्रार्थना करते हो, तो तुममें विश्वास, दृढ़ता और संकल्प होना चाहिए। अधिकांश लोग प्रशिक्षित होना शुरू करते ही हिम्मत हार जाते हैं, क्योंकि वे पवित्र आत्मा द्वारा प्रेरित होने में विफल रहते हैं। इससे काम नहीं चलेगा! तुम्हें दृढ़ रहना चाहिए; तुम्हें पवित्र आत्मा द्वारा प्रेरित किए जाने का एहसास करने और तलाश और खोज करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। कभी-कभी तुम्हारे अभ्यास का मार्ग सही नहीं होता, और कभी-कभी तुम्हारे व्यक्तिगत उद्देश्य और धारणाएँ परमेश्वर के सामने टिक नहीं पातीं, और इसलिए परमेश्वर का आत्मा तुम्हें प्रेरित करने में विफल रहता है। अन्य समय में, परमेश्वर यह देखता है कि तुम वफ़ादार हो या नहीं। संक्षेप में, प्रशिक्षण में तुम्हें ऊँची कीमत चुकानी चाहिए। यदि तुम्हें पता चलता है कि तुम अपने अभ्यास के मार्ग से हट रहे हो, तो तुम अपना प्रार्थना करने का तरीका बदल सकते हो। जब तक तुम सच्चे हृदय से खोज करते हो और प्राप्त करने के लिए लालायित रहते हो, पवित्र आत्मा तुम्हें निश्चित रूप से इस वास्तविकता में ले जाएगा। कभी-कभी तुम सच्चे हृदय से प्रार्थना करते हो, लेकिन ऐसा महसूस नहीं करते कि तुम विशेष रूप से प्रेरित किए गए हो। ऐसे समय में तुम्हें आस्था पर भरोसा रखना चाहिए, इस बात पर विश्वास करना चाहिए कि परमेश्वर तुम्हारी प्रार्थनाओं को देख रहा है; तुम्हें अपनी प्रार्थनाओं में दृढ़ रहना चाहिए।

ईमानदार व्यक्ति बनो; अपने हृदय में व्याप्त धोखे से छुटकारा दिलाने के लिए परमेश्वर से प्रार्थना करो। हर समय प्रार्थना के माध्यम से अपने आपको शुद्ध करो, प्रार्थना के माध्यम से परमेश्वर के आत्मा द्वारा प्रेरित किए जाओ, और तुम्हारा स्वभाव धीरे-धीरे बदल जाएगा। सच्चा आध्यात्मिक जीवन प्रार्थना का जीवन है—यह एक ऐसा जीवन है, जिसे पवित्र आत्मा द्वारा प्रेरित किया जाता है। पवित्र आत्मा द्वारा प्रेरित किए जाने की प्रक्रिया मनुष्य के स्वभाव को बदलने की प्रक्रिया है। पवित्र आत्मा द्वारा प्रेरित न किया जाने वाला जीवन आध्यात्मिक जीवन नहीं, बल्कि केवल धार्मिक अनुष्ठान का जीवन है। केवल उन्हीं लोगों ने, जो पवित्र आत्मा द्वारा अकसर प्रेरित किए जाते हैं, और पवित्र आत्मा द्वारा प्रबुद्ध और रोशन किए जाते हैं, आध्यात्मिक जीवन में प्रवेश किया है। मनुष्य जब प्रार्थना करता है, तो उसका स्वभाव लगातार बदलता जाता है। परमेश्वर का आत्मा जितना अधिक उसे प्रेरित करता है, वह उतना ही अग्रसक्रिय और आज्ञाकारी बन जाता है। इसलिए, उसका हृदय भी धीरे-धीरे शुद्ध होगा, और उसका स्वभाव धीरे-धीरे बदल जाएगा। ऐसा है सच्ची प्रार्थना का प्रभाव।

हमारे “प्रार्थना” पृष्ठ पर या नीचे दी गई संबंधित सामग्री में और जानकारी देखें। आपकी प्रार्थनाओं का उत्तर परमेश्वर द्वारा दिया जाएगा और आप परमेश्वर के साथ उचित संबंध बनाएंगे।

स्रोत: यीशु मसीह का अनुसरण करते हुए


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अंत के दिनों में अपना न्याय का कार्य करने के लिए परमेश्वर मनुष्य का उपयोग क्यों नहीं करता, बल्कि देहधारण कर उसे स्वयं क्यों करता है

न्याय का कार्य परमेश्वर का अपना कार्य है, इसलिए स्वाभाविक रूप से इसे परमेश्वर द्वारा ही किया जाना चाहिए; उसकी जगह इसे मनुष्य द्वारा नहीं किया जा सकता।

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:

न्याय का कार्य परमेश्वर का अपना कार्य है, इसलिए स्वाभाविक रूप से इसे परमेश्वर द्वारा ही किया जाना चाहिए; उसकी जगह इसे मनुष्य द्वारा नहीं किया जा सकता। चूँकि न्याय सत्य के माध्यम से मानवजाति को जीतना है, इसलिए परमेश्वर के अभी भी मनुष्यों के बीच इस कार्य को करने के लिए देहधारी छवि के रूप में प्रकट होने का सवाल ही नहीं उठता। अर्थात्, अंत के दिनों में मसीह दुनिया भर के लोगों को सिखाने के लिए और उन्हें सभी सच्चाइयों का ज्ञान कराने के लिए सत्य का उपयोग करेगा। यह परमेश्वर के न्याय का कार्य है “अंत के दिनों में अपना न्याय का कार्य करने के लिए परमेश्वर मनुष्य का उपयोग क्यों नहीं करता, बल्कि देहधारण कर उसे स्वयं क्यों करता है”पढ़ना जारी रखें

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Hindi Christian Devotional Song | परमेश्वर चाहता है इंसानियत जीती रहे (Lyrics)

जब इंसानियत मैल से भरी थी, कुछ हद तक नाफ़र्मानी करती थी,
तो अपने उसूलों और सार की ख़ातिर परमेश्वर को उसे तबाह करना पड़ा।
इंसानों के विद्रोह की वजह से परमेश्वर को उनसे नफ़रत थी।

Hindi Christian Devotional Song | परमेश्वर चाहता है इंसानियत जीती रहे (Lyrics)

जब इंसानियत मैल से भरी थी, कुछ हद तक नाफ़र्मानी करती थी,
तो अपने उसूलों और सार की ख़ातिर परमेश्वर को उसे तबाह करना पड़ा।
इंसानों के विद्रोह की वजह से परमेश्वर को उनसे नफ़रत थी। “Hindi Christian Devotional Song | परमेश्वर चाहता है इंसानियत जीती रहे (Lyrics)”पढ़ना जारी रखें

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परमेश्वर के दैनिक वचन | “परमेश्वर द्वारा धारण किये गए देह का सार” | अंश 101

इससे पहले कि यीशु अपना कार्य करता, वह अपनी सामान्य मानवता में जीया।

परमेश्वर के दैनिक वचन | “परमेश्वर द्वारा धारण किये गए देह का सार” | अंश 101

इससे पहले कि यीशु अपना कार्य करता, वह अपनी सामान्य मानवता में जीया। कोई नहीं कह सकता था कि वह परमेश्वर है, किसी को भी पता नहीं चला कि वह देहधारी परमेश्वर है; लोग उसे केवल एक पूर्णतः साधारण व्यक्ति समझते थे। “परमेश्वर के दैनिक वचन | “परमेश्वर द्वारा धारण किये गए देह का सार” | अंश 101″पढ़ना जारी रखें
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Christian Play “बुजुर्ग और नन्हा बालक”| Christian Testimony of Faith During Persecution and Hardship

2008 में, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी “स्थिरता” की आड़ में पागलों की तरह धार्मिक आस्थाओं का दमन करना शुरू कर देती है। बड़ी संख्या में ईसाइयों को जेल में डाल दिया जाता है और यातनाएँ दी जाती हैं, बहुत से लोगों को अपना घर-बार छोड़कर कहीं छिपने पर मजबूर होना पड़ता है, उनके पास वापस लौटने का कोई रास्ता नहीं होता।

2008 में, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी “स्थिरता” की आड़ में पागलों की तरह धार्मिक आस्थाओं का दमन करना शुरू कर देती है। बड़ी संख्या में ईसाइयों को जेल में डाल दिया जाता है और यातनाएँ दी जाती हैं, बहुत से लोगों को अपना घर-बार छोड़कर कहीं छिपने पर मजबूर होना पड़ता है, उनके पास वापस लौटने का कोई रास्ता नहीं होता। “Christian Play “बुजुर्ग और नन्हा बालक”| Christian Testimony of Faith During Persecution and Hardship”पढ़ना जारी रखें
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Hindi Christian Movie “तड़प” अंश 1 : तो इस तरह लौटते हैं प्रभु

बाइबल की इस भविष्यवाणी को बहुत-से विश्वासियों ने पढ़ा है: “मनुष्य के पुत्र को बड़ी सामर्थ्य और ऐश्‍वर्य के साथ आकाश के बादलों पर आते देखेंगे” (मत्ती 24:30)। (© BSI) उनका मानना है कि जब प्रभु लौटेंगे तो वे निश्चित रूप से बादल पर उतरेंगे, लेकिन बाइबल में अन्य भविष्यवाणियाँ भी हैं: “देख, मैं चोर के समान आता हूँ” (प्रकाशितवाक्य 16:15​)।

Hindi Christian Movie “तड़प” अंश 1 : तो इस तरह लौटते हैं प्रभु

बाइबल की इस भविष्यवाणी को बहुत-से विश्वासियों ने पढ़ा है: “मनुष्य के पुत्र को बड़ी सामर्थ्य और ऐश्‍वर्य के साथ आकाश के बादलों पर आते देखेंगे” (मत्ती 24:30)। (© BSI) उनका मानना है कि जब प्रभु लौटेंगे तो वे निश्चित रूप से बादल पर उतरेंगे, लेकिन बाइबल में अन्य भविष्यवाणियाँ भी हैं: “देख, मैं चोर के समान आता हूँ” (प्रकाशितवाक्य 16:15)। “Hindi Christian Movie “तड़प” अंश 1 : तो इस तरह लौटते हैं प्रभु”पढ़ना जारी रखें
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2020 Hindi Christian Testimony Video | महान श्वेत सिंहासन का न्याय शुरू हो चुका है

मुख्य पात्र, जियांग मेंगसी एक धर्मनिष्ठ ईसाई है। वह अंत के दिनों में न्याय के बारे में कई वीडियो ऑनलाइन देखती है और यह मानने लगती है कि जब प्रभु वापस आएँगे, तो वह सभी देशों और लोगों का न्याय करने और लोगों के अंत को निर्धारित करने के लिए एक महान श्वेत सिंहासन पर विराजमान होंगे।

2020 Hindi Christian Testimony Video | महान श्वेत सिंहासन का न्याय शुरू हो चुका है

मुख्य पात्र, जियांग मेंगसी एक धर्मनिष्ठ ईसाई है। वह अंत के दिनों में न्याय के बारे में कई वीडियो ऑनलाइन देखती है और यह मानने लगती है कि जब प्रभु वापस आएँगे, तो वह सभी देशों और लोगों का न्याय करने और लोगों के अंत को निर्धारित करने के लिए एक महान श्वेत सिंहासन पर विराजमान होंगे। “2020 Hindi Christian Testimony Video | महान श्वेत सिंहासन का न्याय शुरू हो चुका है”पढ़ना जारी रखें
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सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन “केवल अंतिम दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनन्त जीवन का मार्ग दे सकता है”

जीवन का मार्ग कोई ऐसी चीज नहीं है जो हर किसी के पास होता है, न ही यह कोई ऐसी चीज है जिसे हर कोई आसानी से प्राप्त कर सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि जीवन केवल परमेश्वर से ही आ सकता है, कहने का तात्पर्य है कि केवल स्वयं परमेश्वर के पास ही जीवन का सार है, और केवल स्वयं परमेश्वर के पास ही जीवन का मार्ग है।

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन “केवल अंतिम दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनन्त जीवन का मार्ग दे सकता है”

जीवन का मार्ग कोई ऐसी चीज नहीं है जो हर किसी के पास होता है, न ही यह कोई ऐसी चीज है जिसे हर कोई आसानी से प्राप्त कर सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि जीवन केवल परमेश्वर से ही आ सकता है, कहने का तात्पर्य है कि केवल स्वयं परमेश्वर के पास ही जीवन का सार है, और केवल स्वयं परमेश्वर के पास ही जीवन का मार्ग है। “सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन “केवल अंतिम दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनन्त जीवन का मार्ग दे सकता है””पढ़ना जारी रखें
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देहधारण और उसका सार क्या है

देहधारण का अर्थ यह है कि परमेश्वर देह में प्रकट होता है, और वह अपनी सृष्टि के मनुष्यों के मध्य देह की छवि में कार्य करने आता है।

संदर्भ के लिए बाइबल के पद:

“आदि में वचन था, और वचन परमेश्‍वर के साथ था, और वचन परमेश्‍वर था” (यूहन्ना 1:1)।

“और वचन देहधारी हुआ; और अनुग्रह और सच्‍चाई से परिपूर्ण होकर हमारे बीच में डेरा किया, और हम ने उसकी ऐसी महिमा देखी, जैसी पिता के एकलौते की महिमा” (यूहन्ना 1:14) “देहधारण और उसका सार क्या है”पढ़ना जारी रखें

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परमेश्वर के दैनिक वचन | “मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है” | अंश 79

न्याय का कार्य परमेश्वर का स्वयं का कार्य है, इसलिए प्राकृतिक रूप से इसे परमेश्वर के द्वारा किया जाना चाहिए; उसकी जगह इसे मनुष्य द्वारा नहीं किया जा सकता है।

परमेश्वर के दैनिक वचन | “मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है” | अंश 79

न्याय का कार्य परमेश्वर का स्वयं का कार्य है, इसलिए प्राकृतिक रूप से इसे परमेश्वर के द्वारा किया जाना चाहिए; उसकी जगह इसे मनुष्य द्वारा नहीं किया जा सकता है। क्योंकि सत्य के माध्यम से मानवजाति को जीतना न्याय है, इसलिए यह निर्विवाद है कि तब भी परमेश्वर मनुष्यों के बीच इस कार्य को करने के लिए देहधारी छवि के रूप में प्रकट होता है। “परमेश्वर के दैनिक वचन | “मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है” | अंश 79″पढ़ना जारी रखें

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Hindi Christian Movie | परमेश्‍वर का नाम बदल गया है?! | Revealing the Mystery of God’s Name

ग ह्वा नामक महिला दक्षिणी चीन की एक गृह कलीसिया की प्रचारिका हैं। प्रभु में विश्वास करना शुरू करने के बाद, उन्‍होंने बाइबल में पाया कि पुराने नियम में परमेश्वर को यहोवा कहा जाता था, और नये नियम में यीशु। परमेश्वर के अलग-अलग नाम क्यों हैं?

Hindi Christian Movie | परमेश्‍वर का नाम बदल गया है?! | Revealing the Mystery of God’s Name

ग ह्वा नामक महिला दक्षिणी चीन की एक गृह कलीसिया की प्रचारिका हैं। प्रभु में विश्वास करना शुरू करने के बाद, उन्‍होंने बाइबल में पाया कि पुराने नियम में परमेश्वर को यहोवा कहा जाता था, और नये नियम में यीशु। परमेश्वर के अलग-अलग नाम क्यों हैं? “Hindi Christian Movie | परमेश्‍वर का नाम बदल गया है?! | Revealing the Mystery of God’s Name”पढ़ना जारी रखें

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मैंने पाप से शुद्धि का मार्ग पा लिया है

जब प्रभु वापस आयेंगे तो वह हमें सीधे स्वर्ग के राज्य में ले जायेंगे।” लेकिन जब मैं अधीर होकर प्रभु यीशु के लौटने और उनके द्वारा स्वर्ग के राज्य में ले जाये जाने की प्रतीक्षा कर रही थी, तब कुछ ऐसा हुआ जो मेरे लिए विशेष रूप से दर्दनाक और उलझन में डालने वाला था।

एक ऐसी ईसाई होने के नाते जिसने वर्षों से प्रभु पर विश्वास किया है, मैंने अक्सर पादरियों को उनके उपदेशों के दौरान यह कहते सुना है कि, “हम जैसे विश्वासियों को हमारे पापों से छुटकारा मिल चुका है और हम क्षमा पा चुके हैं। जब प्रभु वापस आयेंगे तो वह हमें सीधे स्वर्ग के राज्य में ले जायेंगे।” लेकिन जब मैं अधीर होकर प्रभु यीशु के लौटने और उनके द्वारा स्वर्ग के राज्य में ले जाये जाने की प्रतीक्षा कर रही थी, तब कुछ ऐसा हुआ जो मेरे लिए विशेष रूप से दर्दनाक और उलझन में डालने वाला था “मैंने पाप से शुद्धि का मार्ग पा लिया है”पढ़ना जारी रखें

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परमेश्वर के साथ एक उचित संबंध स्थापित करना बहुत महत्वपूर्ण है

तहेदिल से परमेश्वर की आत्मा को स्पर्श करके लोग परमेश्वर पर विश्वास करते हैं, उससे प्रेम करते हैं, और उसे संतुष्ट करते हैं, और इस प्रकार वे परमेश्वर की संतुष्टि प्राप्त करते हैं; जब वे के संपर्क में आते हैं, तो परमेश्वर का आत्मा का उन पर भावनात्मक प्रभाव पड़ता है।

मसीही जीवन क्या है|ईसाई भक्तियाँ|ईसाई प्रार्थना

तहेदिल से परमेश्वर की आत्मा को स्पर्श करके लोग परमेश्वर पर विश्वास करते हैं, उससे प्रेम करते हैं, और उसे संतुष्ट करते हैं, और इस प्रकार वे परमेश्वर की संतुष्टि प्राप्त करते हैं; जब वे के संपर्क में आते हैं, तो परमेश्वर का आत्मा का उन पर भावनात्मक प्रभाव पड़ता है। “परमेश्वर के साथ एक उचित संबंध स्थापित करना बहुत महत्वपूर्ण है”पढ़ना जारी रखें

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सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन “क्या परमेश्वर का कार्य इतना सरल है, जितना मनुष्य कल्पना करता है?”

परमेश्वर पर विश्वास करने वाले व्यक्ति के रूप में, तुम को यह समझना चाहिए कि, आज, इन अंतिम दिनों में परमेश्वर का कार्य और तुम में परमेश्वर की योजना के सारे कार्य को पाने में, तुमने परमेश्वर की ओर से उत्कर्ष और को वास्तव में पा लिया है।

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन “क्या परमेश्वर का कार्य इतना सरल है, जितना मनुष्य कल्पना करता है?”

परमेश्वर पर विश्वास करने वाले व्यक्ति के रूप में, तुम को यह समझना चाहिए कि, आज, इन अंतिम दिनों में परमेश्वर का कार्य और तुम में परमेश्वर की योजना के सारे कार्य को पाने में, तुमने परमेश्वर की ओर से उत्कर्ष और को वास्तव में पा लिया है। “सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन “क्या परमेश्वर का कार्य इतना सरल है, जितना मनुष्य कल्पना करता है?””पढ़ना जारी रखें
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परमेश्वर के दैनिक वचन | “जब तक तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देखोगे, तब तक परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नया बना चुका होगा” | अंश 76

तुम लोगों की सत्यनिष्ठा सिर्फ़ वचनों में है, तुम लोगों का ज्ञान सिर्फ़ बौद्धिक और वैचारिक है, तुम लोगों की मेहनत सिर्फ स्वर्ग की आशीषें पाने के लिए है, और इसलिए तुम लोगों का विश्वास अवश्य ही किस प्रकार का हो सकता है?

परमेश्वर के दैनिक वचन | “जब तक तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देखोगे, तब तक परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नया बना चुका होगा” | अंश 76

तुम लोगों की सत्यनिष्ठा सिर्फ़ वचनों में है, तुम लोगों का ज्ञान सिर्फ़ बौद्धिक और वैचारिक है, तुम लोगों की मेहनत सिर्फ स्वर्ग की आशीषें पाने के लिए है, और इसलिए तुम लोगों का विश्वास अवश्य ही किस प्रकार का हो सकता है? आज भी, तुम लोग सत्य के प्रत्येक वचन को एक बहरे कान से ही सुनते हो। “परमेश्वर के दैनिक वचन | “जब तक तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देखोगे, तब तक परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नया बना चुका होगा” | अंश 76″पढ़ना जारी रखें
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परमेश्वर की भेड़ें सुन सकती हैं उसकी वाणी | Hindi Christian Song With Lyrics

आत्मा कलीसियाओं से बोले।
अगर कान हों तो सुनो!

परमेश्वर की भेड़ें सुन सकती हैं उसकी वाणी | Hindi Christian Song With Lyrics

दिन ख़त्म हो जाएँगे;
दुनिया समाप्त हो जाएगी,
हर चीज़ नया जन्म लेगी।
इसे भूलना नहीं! “परमेश्वर की भेड़ें सुन सकती हैं उसकी वाणी | Hindi Christian Song With Lyrics”पढ़ना जारी रखें
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2020 Hindi Christian Testimony Video | कौन हैं आज के फरीसी?

मुख्य किरदार एक धर्मनिष्ठ ईसाई महिला है, जो वर्षों तक ईमानदारी से प्रभु की सेवा करने के बाद, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अंत के दिनों के सुसमाचार को स्वीकार कर लेती है।

मुख्य किरदार एक धर्मनिष्ठ ईसाई महिला है, जो वर्षों तक ईमानदारी से प्रभु की सेवा करने के बाद, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अंत के दिनों के सुसमाचार को स्वीकार कर लेती है। “2020 Hindi Christian Testimony Video | कौन हैं आज के फरीसी?”पढ़ना जारी रखें
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बाइबल के सत्य पहले ही पूर्ण हैं। परमेश्वर में हमारी आस्था के लिए हमारे पास बाइबल का होना काफी है।हमें और कोई नये वचन नहीं चाहिए!

बाइबल में दर्ज सामग्री सीमित मात्रा में है। पुराने नियम में सिर्फ यहोवा परमेश्वर के कार्य को दर्ज किया गया, जबकि नये नियम में प्रभु यीशु के कार्य को दर्ज किया गया।

हिंदी बाइबल स्टडी|बाइबल वचन फोटो

उत्तर: बाइबल में दर्ज सामग्री सीमित मात्रा में है। पुराने नियम में सिर्फ यहोवा परमेश्वर के कार्य को दर्ज किया गया, जबकि नये नियम में प्रभु यीशु के कार्य को दर्ज किया गया। लेकिन परमेश्वर के अंत के दिनों के कार्य के बारे में, बाइबल में सिर्फ भविष्यवाणियाँ है बाइबल में सटीक विवरण दर्ज नहीं है। “बाइबल के सत्य पहले ही पूर्ण हैं। परमेश्वर में हमारी आस्था के लिए हमारे पास बाइबल का होना काफी है।हमें और कोई नये वचन नहीं चाहिए!”पढ़ना जारी रखें

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चीजें नहीं जोड़ने के बारे में बाइबल में प्रकाशितवाक्य 22:18 में गद्यांश का मतलब

आजकल,बड़ी-बड़ी आपदाएं आ रही हैं। प्रभु के आगमन की आगवानी करने के इस सर्वाधिक महत्वपूर्ण समय में,केवल सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया ही सार्वजनिक रूप से प्रमाणित करती है कि प्रभु यीशु पहले ही वापस आ चुका है और परमेश्वर के घर से न्याय की बात और कार्य कर रहा है।

आजकल,बड़ी-बड़ी आपदाएं आ रही हैं। प्रभु के आगमन की आगवानी करने के इस सर्वाधिक महत्वपूर्ण समय में,केवल सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया ही सार्वजनिक रूप से प्रमाणित करती है कि प्रभु यीशु पहले ही वापस आ चुका है और परमेश्वर के घर से न्याय की बात और कार्य कर रहा है। बहुत से लोग जो सचमुच प्रभु में विश्वास करते हैं,वे खोजने और जाँच करने के लिए आ रहे हैं। “चीजें नहीं जोड़ने के बारे में बाइबल में प्रकाशितवाक्य 22:18 में गद्यांश का मतलब”पढ़ना जारी रखें

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2020 Hindi Christian Song | आने वाली पीढ़ियों के लिए अय्यूब की गवाही की चेतावनी (Lyrics)

अय्यूब की आस्था, आज्ञाकारिता, शैतान को हराने की गवाही
लोगों के लिए मदद और हौसले का स्रोत रहा है।

2020 Hindi Christian Song | आने वाली पीढ़ियों के लिए अय्यूब की गवाही की चेतावनी (Lyrics)

अय्यूब की आस्था, आज्ञाकारिता, शैतान को हराने की गवाही
लोगों के लिए मदद और हौसले का स्रोत रहा है।
अय्यूब में उन्हें उद्धार की उम्मीद नज़र आती है,
वे शैतान को हरा सकते हैं
ईश्वर के प्रति सच्ची आस्था, आज्ञाकारिता से,
उसके प्रति सच्ची श्रद्धा से। “2020 Hindi Christian Song | आने वाली पीढ़ियों के लिए अय्यूब की गवाही की चेतावनी (Lyrics)”पढ़ना जारी रखें
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परमेश्वर के दैनिक वचन | “बाइबल के विषय में (1)” | अंश 269

बाइबल एक ऐतिहासिक पुस्तक है, और यदि तुमने अनुग्रह के युग के दौरान पुराने विधान को खाया और पीया होता—यदि तुम अनुग्रह के युग के दौरान पुराने विधान के समय में जो अपेक्षित था, उसे व्यवहार में लाए होते—तो यीशु ने तुम्हें अस्वीकार कर दिया होता, और तुम्हारी निंदा की होती; यदि तुमने पुराने विधान को यीशु के कार्य में लागू किया होता, तो तुम एक फरीसी होते।

परमेश्वर के दैनिक वचन | “बाइबल के विषय में (1)” | अंश 269

बाइबल एक ऐतिहासिक पुस्तक है, और यदि तुमने अनुग्रह के युग के दौरान पुराने विधान को खाया और पीया होता—यदि तुम अनुग्रह के युग के दौरान पुराने विधान के समय में जो अपेक्षित था, उसे व्यवहार में लाए होते—तो यीशु ने तुम्हें अस्वीकार कर दिया होता, और तुम्हारी निंदा की होती; यदि तुमने पुराने विधान को यीशु के कार्य में लागू किया होता, तो तुम एक फरीसी होते। “परमेश्वर के दैनिक वचन | “बाइबल के विषय में (1)” | अंश 269″पढ़ना जारी रखें

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यूहन्ना 5

1इन बातों के पश्चात् यहूदियों का एक पर्व हुआ, और यीशु यरूशलेम को गया।

1इन बातों के पश्चात् यहूदियों का एक पर्व हुआ, और यीशु यरूशलेम को गया।

2यरूशलेम में भेड़-फाटक के पास एक कुण्ड है, जो इब्रानी भाषा में बैतहसदा कहलाता है, और उसके पाँच ओसारे हैं।

3इनमें बहुत से बीमार, अंधे, लँगड़े और सूखे अंगवाले (पानी के हिलने की आशा में) पड़े रहते थे “यूहन्ना 5”पढ़ना जारी रखें

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Christian Song | क्या परमेश्वर उतना सरल है जितना कि तुम कहते हो?

इन कई वर्षों तक, लोगों ने न सिर्फ़ पवित्रात्मा को और न सिर्फ एक पुरुष,
एक नर को देखा है,
बल्कि कई ऐसी चीजों को भी देखा है जो मनुष्य की अवधारणाओं की हँसी नहीं उड़ाती हैं,
और इस प्रकार वे कभी भी परमेश्वर की पूरी तरह थाह पाने में समर्थ नहीं हैं।

Christian Song | क्या परमेश्वर उतना सरल है जितना कि तुम कहते हो?

इन कई वर्षों तक, लोगों ने न सिर्फ़ पवित्रात्मा को और न सिर्फ एक पुरुष,
एक नर को देखा है,
बल्कि कई ऐसी चीजों को भी देखा है जो मनुष्य की अवधारणाओं की हँसी नहीं उड़ाती हैं,
और इस प्रकार वे कभी भी परमेश्वर की पूरी तरह थाह पाने में समर्थ नहीं हैं। “Christian Song | क्या परमेश्वर उतना सरल है जितना कि तुम कहते हो?”पढ़ना जारी रखें
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Christian Song | विश्वासियों को परमेश्वर के पद-चिन्हों का ध्यान से अनुसरण करना चाहिए | Music Video

चूँकि मनुष्य परमेश्वर में विश्वास करता है,
तो उसे परमेश्वर के पदचिह्नों का, कदम दर कदम, करीब से अवश्य अनुसरण करना चाहिए;
और उसे “जहाँ कहीं मेम्ना जाता है उसका अनुसरण करना” चाहिए।

Christian Song | विश्वासियों को परमेश्वर के पद-चिन्हों का ध्यान से अनुसरण करना चाहिए | Music Video

चूँकि मनुष्य परमेश्वर में विश्वास करता है,
तो उसे परमेश्वर के पदचिह्नों का, कदम दर कदम, करीब से अवश्य अनुसरण करना चाहिए;
और उसे “जहाँ कहीं मेम्ना जाता है उसका अनुसरण करना” चाहिए।
केवल ये ही ऐसे लोग हैं जो सच्चे मार्ग को खोजते हैं,
केवल ये ही ऐसे लोग हैं जो पवित्र आत्मा के कार्य को जानते हैं। “Christian Song | विश्वासियों को परमेश्वर के पद-चिन्हों का ध्यान से अनुसरण करना चाहिए | Music Video”पढ़ना जारी रखें

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2020 Hindi Christian Testimony Video | परमेश्वर की तरफ मुड़ने के लिए झूठ के जाल से निकलना

मुख्य किरदार निंग शाओ सीसीपी के झूठ से धोखा खा जाता है और सर्वशक्तिमान परमेश्वर में अपनी पत्नी की आस्था का विरोध करता है। उसक आड़े आने की वह भरसक कोशिश करता है।

मुख्य किरदार निंग शाओ सीसीपी के झूठ से धोखा खा जाता है और सर्वशक्तिमान परमेश्वर में अपनी पत्नी की आस्था का विरोध करता है। उसक आड़े आने की वह भरसक कोशिश करता है। लेकिन वह देखता है कि वह अपनी आस्था में कितनी दृढ़ और आशावान है। वह सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के बनाये कुछ वीडियो देख कर समझ पाता है कि वे सब कितने सकारात्मक हैं। उसे जिज्ञासा होती है : यह आखिर किस प्रकार की कलीसिया है? अंदरूनी संघर्ष के बाद, वह खुद जाकर सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया को देखने का फैसला करता है। अपनी जांच-पड़ताल से उसे अफवाहों के पीछे की सच्चाई साफ़ तौर पर समझ आती है, वह कलीसिया की सच्ची समझ हासिल करता है, और सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अंत के दिनों के सुसमाचार को आनंदपूर्वक स्वीकार कर लेता है।

आपके लिए अनुशंसित: यह हिंदी ईसाई फिल्म, परमेश्वर की गवाही, आपको दिखाएगी कि कैसे एक ईसाई को CCP द्वारा सताया गया था और अभी भी वह परमेश्वर का अनुसरण करने के लिए दृढ़ था।
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आज का वचन | “बाइबल के विषय में (1)” | अंश 268

यदि तुम व्यवस्था के युग के कार्य को देखने की इच्छा करते हो, और यह देखना चाहते हो कि इज़राइली किस प्रकार यहोवा के मार्ग का अनुसरण करते थे, तो तुम्हें पुराना विधान अवश्य पढ़ना चाहिए; यदि तुम अनुग्रह के युग के कार्य को समझना चाहते हो, तो तुम्हें नया विधान अवश्य पढ़ना चाहिए।

आज का वचन| “बाइबल के विषय में (1)” | अंश 268

यदि तुम व्यवस्था के युग के कार्य को देखने की इच्छा करते हो, और यह देखना चाहते हो कि इज़राइली किस प्रकार यहोवा के मार्ग का अनुसरण करते थे, तो तुम्हें पुराना विधान अवश्य पढ़ना चाहिए; यदि तुम अनुग्रह के युग के कार्य को समझना चाहते हो, तो तुम्हें नया विधान अवश्य पढ़ना चाहिए। “आज का वचन | “बाइबल के विषय में (1)” | अंश 268″पढ़ना जारी रखें
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परमेश्वर का वचन इन हिंदी | “आरंभ में मसीह के कथन : अध्याय 15 | अंश 51

सभी कलीसियाओं में परमेश्वर पहले से ही प्रकट हो चुका है। आत्मा बोल रहा है, वह एक प्रबल अग्नि है, उसमें महिमा है और वह न्याय कर रहा है; वह मनुष्य का पुत्र है, जो पाँवों तक का वस्त्र पहने हुए है और छाती पर सोने की पटुका बाँधे हुए है।

परमेश्वर का वचन इन हिंदी| “आरंभ में मसीह के कथन : अध्याय 15 | अंश 51

सभी कलीसियाओं में परमेश्वर पहले से ही प्रकट हो चुका है। आत्मा बोल रहा है, वह एक प्रबल अग्नि है, उसमें महिमा है और वह न्याय कर रहा है; वह मनुष्य का पुत्र है, जो पाँवों तक का वस्त्र पहने हुए है और छाती पर सोने की पटुका बाँधे हुए है। उसके सिर और बाल श्‍वेत ऊन के समान उज्ज्वल हैं, और उसकी आँखें आग की ज्वाला के समान हैं; उसके पाँव उत्तम पीतल के समान हैं, मानो भट्ठी में तपे हुए हों; और उसके वचन अनेक जलों के समान हैं। “परमेश्वर का वचन इन हिंदी | “आरंभ में मसीह के कथन : अध्याय 15 | अंश 51”पढ़ना जारी रखें
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Hindi Christian Movie | मर्मभेदी यादें

फैन गुओई चीन में हाउस चर्च का एक एल्डर था। बीस वर्ष से अधिक की सेवा के दौरान, उसने हमेशा पौलुस का अनुकरण किया, और कठोर श्रम किया तथा पूरे उत्साह से प्रभु के लिए व्यय किया।

Hindi Christian Movie | मर्मभेदी यादें

फैन गुओई चीन में हाउस चर्च का एक एल्डर था। बीस वर्ष से अधिक की सेवा के दौरान, उसने हमेशा पौलुस का अनुकरण किया, और कठोर श्रम किया तथा पूरे उत्साह से प्रभु के लिए व्यय किया। “Hindi Christian Movie | मर्मभेदी यादें”पढ़ना जारी रखें

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परमेश्वर के दैनिक वचन | “परमेश्वर के प्रकटन ने एक नए युग का सूत्रपात किया है” | अंश 72

चाहे तुम अमेरिकी हो, ब्रिटिश या फिर किसी अन्य देश के, तुम्हें अपनी राष्ट्रीयता की सीमाओं से बाहर कदम रखना चाहिए, अपनी अस्मिता के पार जाना चाहिए, और परमेश्वर के कार्य को एक सृजित प्राणी के दृष्टिकोण से देखना चाहिए। इस तरह तुम परमेश्वर के पदचिह्नों को सीमाओं में नहीं बाँधोगे।

 

चाहे तुम अमेरिकी हो, ब्रिटिश या फिर किसी अन्य देश के, तुम्हें अपनी राष्ट्रीयता की सीमाओं से बाहर कदम रखना चाहिए, अपनी अस्मिता के पार जाना चाहिए, और परमेश्वर के कार्य को एक सृजित प्राणी के दृष्टिकोण से देखना चाहिए। इस तरह तुम परमेश्वर के पदचिह्नों को सीमाओं में नहीं बाँधोगे। ऐसा इसलिए है, क्योंकि आजकल बहुत-से लोग इसे असंभव समझते हैं कि परमेश्वर किसी विशेष राष्ट्र में या कुछ निश्चित लोगों के बीच प्रकट होगा। परमेश्वर के कार्य का कितना गहन अर्थ है, और परमेश्वर का प्रकटन कितना महत्वपूर्ण है!! “परमेश्वर के दैनिक वचन | “परमेश्वर के प्रकटन ने एक नए युग का सूत्रपात किया है” | अंश 72″पढ़ना जारी रखें
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Hindi Christian Movie | कितनी सुंदर वाणी। | Have You Welcomed the Return of Lord Jesus?

डॉन्‍ग जिंगशीन चीन की एक गृह कलीसिया में प्रचारक हैं। वे पिछले तीस वर्षों से प्रभु में विश्वास कर रही हैं, और उन्हें सत्य से प्रेम है; वे अक्सर प्रभु के वचनों को पढ़ती है और उनसे प्रेरित होती हैं। वे प्रभु के लिए बड़े उत्साह से स्वयं को समर्पित करती है।

Hindi Christian Movie | कितनी सुंदर वाणी। | Have You Welcomed the Return of Lord Jesus?

डॉन्‍ग जिंगशीन चीन की एक गृह कलीसिया में प्रचारक हैं। वे पिछले तीस वर्षों से प्रभु में विश्वास कर रही हैं, और उन्हें सत्य से प्रेम है; वे अक्सर प्रभु के वचनों को पढ़ती है और उनसे प्रेरित होती हैं। वे प्रभु के लिए बड़े उत्साह से स्वयं को समर्पित करती है। अपने प्रचारक के कार्य की वजह से, चीनी कम्युनिस्ट सरकार की पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया था, जहाँ उन्हें क्रूरता और यातनाओं का सामना करना पड़ा। ये केवल प्रभु के वचन ही थे जिन्होंने अमानवीय कैद के सात वर्षों के जीवन को बरदाश्‍त करने में उनका मार्गदर्शन किया। “Hindi Christian Movie | कितनी सुंदर वाणी। | Have You Welcomed the Return of Lord Jesus?”पढ़ना जारी रखें

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परमेश्वर के दैनिक वचन | “परमेश्वर के प्रकटन ने एक नए युग का सूत्रपात किया है” | अंश 71

परमेश्वर की छह-हज़ार-वर्षीय प्रबंधन योजना समाप्त हो रही है, और राज्य का द्वार उन सभी लोगों के लिए पहले से ही खोल दिया गया है, जो उसका प्रकटन चाहते हैं। प्रिय भाइयो और बहनो, तुम लोग किस चीज़ की प्रतीक्षा कर रहे हो? वह क्या है, जो तुम खोजते हो?

परमेश्वर की छह-हज़ार-वर्षीय प्रबंधन योजना समाप्त हो रही है, और राज्य का द्वार उन सभी लोगों के लिए पहले से ही खोल दिया गया है, जो उसका प्रकटन चाहते हैं। प्रिय भाइयो और बहनो, तुम लोग किस चीज़ की प्रतीक्षा कर रहे हो? वह क्या है, जो तुम खोजते हो? क्या तुम परमेश्वर के प्रकट होने की प्रतीक्षा कर रहे हो? क्या तुम उसके पदचिह्न खोज रहे हो? परमात्मा के दर्शन के लिए व्यक्ति कैसे लालायित होता है! और परमेश्वर के पदचिह्नों को पाना कितना कठिन है! इस तरह के युग में, इस तरह की दुनिया में, हमें उस दिन को देखने के लिए क्या करना चाहिए, जिस दिन परमेश्वर प्रकट होता है? हमें परमेश्वर के पदचिह्नों के साथ तालमेल बनाए रखने के लिए क्या करना चाहिए? “परमेश्वर के दैनिक वचन | “परमेश्वर के प्रकटन ने एक नए युग का सूत्रपात किया है” | अंश 71″पढ़ना जारी रखें
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परमेश्वर का राज्य मनुष्यों के बीच स्थापित है | Hindi Christian Song With Lyrics

पृथ्वी और ब्रह्मांड में, देखी जा सकती है परमेश्वर की बुद्धि।
सभी चीजों और सभी लोगों के बीच,
मधुर फलों को उपजाती है उसकी बुद्धि।

परमेश्वर का राज्य मनुष्यों के बीच स्थापित है | Hindi Christian Song With Lyrics

पृथ्वी और ब्रह्मांड में, देखी जा सकती है परमेश्वर की बुद्धि।
सभी चीजों और सभी लोगों के बीच,
मधुर फलों को उपजाती है उसकी बुद्धि।
सबकुछ दिखे जैसे है परमेश्वर के राज्य का उत्पाद। “परमेश्वर का राज्य मनुष्यों के बीच स्थापित है | Hindi Christian Song With Lyrics”पढ़ना जारी रखें
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परमेश्वर का वचन इन हिंदी | “बाइबल के विषय में (1)” | अंश 267

बाइबल किस प्रकार की पुस्तक है? पुराना विधान व्यवस्था के युग के दौरान किया गया परमेश्वर का कार्य है।

 

परमेश्वर का वचन इन हिंदी| “बाइबल के विषय में (1)” | अंश 267

बाइबल किस प्रकार की पुस्तक है? पुराना विधान व्यवस्था के युग के दौरान किया गया परमेश्वर का कार्य है। बाइबल के पुराने विधान में व्यवस्था के युग के दौरान किया गया यहोवा का समस्त कार्य और उसका सृष्टि के निर्माण का कार्य दर्ज है। इसमें यहोवा द्वारा किया गया समस्त कार्य दर्ज है, और वह अंततः मलाकी की पुस्तक के साथ यहोवा के कार्य का वृत्तांत समाप्त करता है। “परमेश्वर का वचन इन हिंदी | “बाइबल के विषय में (1)” | अंश 267″पढ़ना जारी रखें

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परमेश्वर मनुष्य के साथ अपनी वाचा के लिए इंद्रधनुष को चिन्ह के रूप में ठहराता है

उत्पत्ति 9:11-13 “और मैं तुम्हारे साथ अपनी यह वाचा बाँधता हूँ कि सब प्राणी फिर जल-प्रलय से नष्‍ट न होंगे: और पृथ्वी का नाश करने के लिये फिर जल-प्रलय न होगा।”

उत्पत्ति 9:11-13 “और मैं तुम्हारे साथ अपनी यह वाचा बाँधता हूँ कि सब प्राणी फिर जल-प्रलय से नष्‍ट न होंगे: और पृथ्वी का नाश करने के लिये फिर जल-प्रलय न होगा।” फिर परमेश्‍वर ने कहा, “जो वाचा मैं तुम्हारे साथ, और जितने जीवित प्राणी तुम्हारे संग हैं उन सब के साथ भी युग-युग की पीढ़ियों के लिये बाँधता हूँ, उसका यह चिह्न है: मैं ने बादल में अपना धनुष रखा है, वह मेरे और पृथ्वी के बीच में वाचा का चिह्न होगा।

इसके आगे, आओ हम पवित्र शास्त्र के इस भाग पर एक नज़र डालें कि किस प्रकार परमेश्वर ने मनुष्य के साथ अपनी वाचा के लिए इंद्रधनुष को एक चिन्ह के रूप में ठहराया।

अधिकांश लोग जानते हैं कि इंद्रधनुष क्या है और उन्होंने इंद्रधनुष से जुड़ी कुछ कहानियों को सुना है। जहाँ तक बाइबल में इंद्रधनुष के बारे में उस कहानी की बात है, कुछ लोग इसका विश्वास करते हैं, कुछ दंतकथा के रूप में इससे व्यवहार करते हैं, जबकि अन्य लोग इस पर बिलकुल भी विश्वास नहीं करते हैं। चाहे कुछ भी हो, सब कुछ जो इंद्रधनुष के सम्बन्ध में घटित हुआ था वह सब ऐसी चीजें हैं जिन्हें परमेश्वर ने किसी समय किया था, और ऐसी चीज़ें हैं जो मनुष्य के लिए परमेश्वर के प्रबंधन की प्रक्रिया के दौरान घटित हुई थीं। इन चीज़ों को बाइबल में हू-बहू लिखा गया है। ये लेख हमें यह नहीं बताते हैं कि उस समय परमेश्वर किस मनोदशा में था या इन वचनों के पीछे उसके क्या इरादे थे जिन्हें परमेश्वर ने कहा था। इसके अतिरिक्त, कोई भी समझ नहीं सकता है कि परमेश्वर कैसा महसूस कर रहा था जब उसने उन्हें कहा था। फिर भी, इस समूचे हालात के लिहाज से परमेश्वर के मन की दशा को पाठ की पंक्तियों के बीच प्रकट किया गया है। यह ऐसा है मानो उस समय के उसके विचार परमेश्वर के वचन के प्रत्येक शब्द एवं वाक्यांश के ज़रिये पन्नों से निकल पड़ते हैं।

नोह की नौका|जलप्रलय|नूह

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क्या ऐसा हो सकता है कि परमेश्वर केवल पुरुष के रूप में देहधारण ले सकता है?

जब हमने सुना कि आप गवाही दे रहे हैं कि प्रभु यीशु देहधारी सर्वशक्तिमान परमेश्वर के रूप में वापस लौट आए हैं, और वह सत्य व्यक्त कर रहे हैं और न्याय और ताड़ना का कार्य कर रहे हैं, तो हमने फैसला किया कि हम प्रभु के वचनों के अनुसार पहलकदमी और सत्य मार्ग का अन्वेषण करेंगे, लेकिन जब हमें पता चला कि प्रभु ने इस बार एक स्त्री के रूप में देहधारण किया है, तो हमारे अंदर संदेह पैदा हो गया।

प्रश्न: हम सालों से प्रभु के वापस लौटने की बाट जोह रहें हैं। जब हमने सुना कि आप गवाही दे रहे हैं कि प्रभु यीशु देहधारी सर्वशक्तिमान परमेश्वर के रूप में वापस लौट आए हैं, और वह सत्य व्यक्त कर रहे हैं और न्याय और ताड़ना का कार्य कर रहे हैं, तो हमने फैसला किया कि हम प्रभु के वचनों के अनुसार पहलकदमी और सत्य मार्ग का अन्वेषण करेंगे, लेकिन जब हमें पता चला कि प्रभु ने इस बार एक स्त्री के रूप में देहधारण किया है, तो हमारे अंदर संदेह पैदा हो गया। सालों पहले प्रभु यीशु का देहधारण पुरुष का था, और परमेश्वधर का लिंग पुरुष का है, इसलिए वापस लौटने वाले प्रभु को भी पुरुष ही होना चाहिए। वह संभवतः स्त्री कैसे हो सकते हैं? यह चीज हमारी समझ से बाहर है, तो क्या आप हमें यह चीज समझा सकते हैं? “क्या ऐसा हो सकता है कि परमेश्वर केवल पुरुष के रूप में देहधारण ले सकता है?”पढ़ना जारी रखें

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जलप्रलय के बाद नूह के लिए परमेश्वर की आशीष

उत्पत्ति 9:1-6 फिर परमेश्‍वर ने नूह और उसके पुत्रों को आशीष दी और उनसे कहा, “फूलो-फलो, और बढ़ो, और पृथ्वी में भर जाओ।

उत्पत्ति 9:1-6 फिर परमेश्‍वर ने नूह और उसके पुत्रों को आशीष दी और उनसे कहा, “फूलो-फलो, और बढ़ो, और पृथ्वी में भर जाओ। तुम्हारा डर और भय पृथ्वी के सब पशुओं, और आकाश के सब पक्षियों, और भूमि पर के सब रेंगनेवाले जन्तुओं, और समुद्र की सब मछलियों पर बना रहेगा: ये सब तुम्हारे वश में कर दिए जाते हैं। सब चलनेवाले जन्तु तुम्हारा आहार होंगे; जैसा तुम को हरे हरे छोटे पेड़ दिए थे, वैसा ही अब सब कुछ देता हूँ। पर मांस को प्राण समेत अर्थात् लहू समेत तुम न खाना। और निश्‍चय ही मैं तुम्हारे लहू अर्थात् प्राण का बदला लूँगा: सब पशुओं और मनुष्यों, दोनों से मैं उसे लूँगा; मनुष्य के प्राण का बदला मैं एक एक के भाई बन्धु से लूँगा। जो कोई मनुष्य का लहू बहाएगा उसका लहू मनुष्य ही से बहाया जाएगा, क्योंकि परमेश्‍वर ने मनुष्य को अपने ही स्वरूप के अनुसार बनाया है।”

तुम लोग इस अंश से क्या देखते हो? मैंने इन वचनों को क्यों चुना? मैंने जहाज़ पर नूह और उसके परिवार के जीवन से एक उद्धरण क्यों नहीं लिया? क्योंकि उस जानकारी का उस विषय से ज़्यादा सम्बन्ध नहीं है जिस पर आज हम बातचीत कर रहे हैं। जिस पर हम ध्यान दे रहे हैं वह है परमेश्वर का स्वभाव। यदि तुम लोग उन विवरणों के विषय में जानना चाहते हो, तो तुम लोग बाइबल उठाकर स्वयं पढ़ सकते हो। यहाँ हम इसके विषय में बात नहीं करेंगे। वह मुख्य बात जिसके बारे में हम आज बात कर रहे हैं वह इस विषय में है कि परमेश्वर के कार्यों को कैसे जानें।

नूह के परमेश्वर के निर्देशों को स्वीकार करने, जहाज़ बनाने और परमेश्वर द्वारा संसार का नाश करने के लिए जलप्रलय का उपयोग किये जाने के दौरान जीवित रहने के पश्चात, आठ लोगों का उसका पूरा परिवार जीवित बच गया। नूह के परिवार के आठ लोगों को छोड़कर, सारी मानवजाति का नाश कर दिया गया था, और पृथ्वी पर सभी जीवित प्राणियों का नाश कर दिया गया था। नूह को, परमेश्वर ने आशीषें दीं, और उससे और उसके बेटों से कुछ बातें कहीं। ये बातें वे थीं जिन्हें परमेश्वर उसे प्रदान कर रहा था और उसके लिए परमेश्वर की आशीष भी थी। यह वह आशीष एवं प्रतिज्ञा है जिसे परमेश्वर किसी ऐसे व्यक्ति को देता है जो उसे ध्यान से सुन सकता है और उसके निर्देशों को स्वीकार कर सकता था, और साथ ही ऐसा तरीका भी है जिससे परमेश्वर लोगों को प्रतिफल देता है। कहने का तात्पर्य है, इसके बावजूद कि नूह परमेश्वर की दृष्टि में एक सिद्ध पुरुष था या एक धर्मी पुरुष था, और इसके बावजूद कि वह परमेश्वर के बारे में कितना कुछ जानता था, संक्षेप में, नूह और उसके तीन पुत्र सभी ने परमेश्वर के वचनों को सुना था, परमेश्वर के कार्य के साथ सहयोग किया था, और वही किया था जिसे उनसे परमेश्वर के निर्देशों के अनुसार करने की अपेक्षा की गई थी। परिणामस्वरूप, जलप्रलय के द्वारा संसार के विनाश के बाद उन्होंने मनुष्यों एवं विभिन्न प्रकार के जीवित प्राणियों को पुनः प्राप्त करने में परमेश्वर की सहायता की थी, और परमेश्वर की प्रबंधकीय योजना के अगले चरण में बड़ा योगदान दिया था। वह सब कुछ जो उसने किया था उसके कारण, परमेश्वर ने उसे आशीष दी। शायद आज के लोगों के लिए, जो कुछ नूह ने किया था वह उल्लेख करने के भी लायक नहीं है। कुछ लोग सोच सकते हैं: नूह ने कुछ भी नहीं किया था; परमेश्वर ने उसे बचाने के लिए अपना मन बना लिया था, अतः उसे निश्चित रूप से बचाया जाना था। उसके जीवित बचने का श्रेय उसे नहीं जाता है। यह वह है जिसे परमेश्वर घटित करना चाहता था, क्योंकि मनुष्य निष्क्रिय है। लेकिन यह वह नहीं है जो परमेश्वर सोच रहा था। परमेश्वर को, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि कोई व्यक्ति महान है या मामूली, जब तक वे उसे ध्यान से सुन सकते हैं, उसके निर्देशों और जो कुछ वह सौंपता है उसका पालन कर सकते हैं, और उसके कार्य, उसकी इच्छा एवं उसकी योजना के साथ सहयोग कर सकते हैं, ताकि उसकी इच्छा एवं उसकी योजना को निर्विघ्नता से पूरा किया जा सके, तो ऐसा आचरण उसके द्वारा उत्सव मनाए जाने के योग्य है और उसकी आशीष को प्राप्त करने के योग्य है। परमेश्वर ऐसे लोगों को मूल्यवान जानकर सहेजकर रखता है, और वह उनके कार्यों एवं अपने लिए उनके प्रेम एवं उनके स्नेह को ह्रदय में संजोता है। यह परमेश्वर का रवैया है। तो परमेश्वर ने नूह को आशीष क्यों दी? क्योंकि परमेश्वर इसी तरह से मनुष्‍य के ऐसे कार्यों एवं उसकी आज्ञाकारिता से पेश आता है।

नूह|बाइबल वचन फोटो

नूह के विषय में परमेश्वर की आशीष के लिहाज से, कुछ लोग कहेंगे: “यदि मनुष्य परमेश्वर को ध्यान से सुनता है और परमेश्वर को संतुष्ट करता है, तो परमेश्वर को मनुष्य को आशीष देना चाहिए। क्या यह स्पष्ट नहीं है?” क्या हम ऐसा कह सकते हैं? कुछ लोग कहते हैं: “नहीं।” हम ऐसा क्यों नहीं कह सकते हैं? कुछ लोग कहते हैं: “मनुष्य परमेश्वर की आशीष का आनन्द उठाने के लायक नहीं है।” यह पूर्णतः सही नहीं है। क्योंकि जब कोई व्यक्ति जो कुछ परमेश्वर सौंपता है उसे स्वीकार करता है, तो परमेश्वर के पास न्याय करने के लिए एक मापदंड होता है कि उस व्यक्ति के कार्य अच्छे हैं या बुरे और उस व्यक्ति ने आज्ञा का पालन किया है या नहीं, और उस व्यक्ति ने परमेश्वर की इच्छा को संतुष्ट किया है या नहीं और जो कुछ वे करते हैं वो उपयुक्त है या नहीं। परमेश्वर जिसकी परवाह करता है वह किसी व्यक्ति का हृदय है, न कि सतह पर किए गए उनके कार्य। स्थिति ऐसी नहीं है कि परमेश्वर को किसी व्यक्ति को तब तक आशीष देना चाहिए जब तक वे इसे करते हैं, इसके बावजूद कि वे इसे कैसे करते हैं। यह परमेश्वर के बारे में लोगों की ग़लतफ़हमी है। परमेश्वर सिर्फ चीज़ों के अंत के परिणाम को ही नहीं देखता, बल्कि इस पर अधिक जोर देता है कि किसी व्यक्ति का हृदय कैसा है और चीज़ों के विकास के दौरान किसी व्यक्ति का रवैया कैसा है, और यह देखता है कि उनके हृदय में आज्ञाकारिता, विचार, एवं परमेश्वर को संतुष्ट करने की इच्छा है या नहीं। उस समय नूह परमेश्वर के विषय में कितना जानता था? क्या यह उतना था जितने ये सिद्धान्त हैं जिन्हें अब तुम लोग जानते हो? परमेश्वर की अवधारणाएँ एवं उसका ज्ञान जैसे सत्य के पहलुओं के सम्बन्ध में, क्या उसने उतनी सिंचाई एवं चरवाही पाई थी जितनी तुम लोगों ने पाई है? नहीं, उसने नहीं पाई! लेकिन एक तथ्य है जिसे नकारा नहीं जा सकता है: चेतना में, मस्तिष्कों में, और यहाँ तक कि आज के लोगों के हृदयों की गहराई में भी, परमेश्वर के विषय में उनकी अवधारणाएँ और रवैया धुंधला एवं अस्पष्ट है। तुम लोग यहाँ तक कह सकते हो कि लोगों का एक हिस्सा परमेश्वर के अस्तित्व के प्रति एक नकारात्मक रवैया रखता है। लेकिन नूह के हृदय एवं चेतना में, परमेश्वर का अस्तित्व पूर्ण एवं बिना किसी सन्देह के था, और इस प्रकार परमेश्वर के प्रति उसकी आज्ञाकारिता शुद्ध थी और परीक्षा का सामना कर सकती थी। परमेश्वर के प्रति उसका हृदय शुद्ध एवं खुला हुआ था। उसे परमेश्वर के हर एक वचन का अनुसरण करने हेतु अपने आपको आश्वस्त करने के लिए सिद्धान्तों के बहुत अधिक ज्ञान की आवश्यकता नहीं थी, न ही उसे परमेश्वर के अस्तित्व को साबित करने के लिए बहुत सारे तथ्यों की आवश्यकता थी, ताकि जो कुछ परमेश्वर ने सौंपा था वह उसे स्वीकार कर सके और जो कुछ भी करने के लिए परमेश्वर ने उसे अनुमति दी थी वह उसे करने के योग्य हो सके। यह नूह और आज के लोगों के बीच आवश्यक अन्तर है, और साथ ही यह बिलकुल सही परिभाषा भी है कि परमेश्वर की दृष्टि में एक सिद्ध व्यक्ति कैसा होता है। जिन्हें परमेश्वर चाहता है वे नूह के समान लोग हैं। वह उस प्रकार का व्यक्ति है जिसकी प्रशंसा परमेश्वर करता है, और बिलकुल उसी प्रकार का व्यक्ति है जिसे परमेश्वर आशीष देता है। क्या तुम लोगों ने इससे कोई प्रबोधन प्राप्त किया है? लोग मनुष्यों को बाहर से देखते हैं, जबकि जो कुछ परमेश्वर देखता है वह लोगों के हृदय एवं उनके सार हैं। परमेश्वर किसी को भी अपने प्रति अधूरा-मन या सन्देह रखने की अनुमति नहीं देता है, न ही वह लोगों को किसी रीति से उस पर सन्देह करने या उसकी परीक्षा लेने की इजाज़त देता है। इस प्रकार, हालाँकि आज लोग परमेश्वर के वचन के आमने-सामने हैं, या तुम लोग यह भी कह सकते हो कि परमेश्वर के आमने-सामने हैं, फिर भी किसी चीज़ के कारण जो उनके हृदयों की गहराई में है, उनके भ्रष्ट मूल-तत्व के अस्तित्व, और उसके प्रति उनके प्रतिकूल रवैये के कारण, परमेश्वर में उनके सच्चे विश्वास से उन्हें अवरोधित किया गया है, और उसके प्रति उनकी आज्ञाकारिता में उन्हें बाधित किया गया है। इस कारण, यह उनके लिए बहुत कठिन है कि वे उसी आशीष को हासिल करें जिसे परमेश्वर ने नूह को प्रदान किया था।

स्रोत: यीशु मसीह का अनुसरण करते हुए


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परमेश्वर के दैनिक वचन | “बाइबल के विषय में (1)” | अंश 266

परमेश्वर द्वारा व्यवस्था के युग का कार्य कर लेने के बाद पुराना विधान बनाया गया और तब से लोगों ने बाइबल पढ़ना शुरू किया। यीशु ने आने के बाद अनुग्रह के युग का कार्य किया, और उसके प्रेरितों ने नया विधान लिखा।

परमेश्वर के दैनिक वचन | “बाइबल के विषय में (1)” | अंश 266

परमेश्वर द्वारा व्यवस्था के युग का कार्य कर लेने के बाद पुराना विधान बनाया गया और तब से लोगों ने बाइबल पढ़ना शुरू किया। यीशु ने आने के बाद अनुग्रह के युग का कार्य किया, और उसके प्रेरितों ने नया विधान लिखा। इस प्रकार बाइबल के पुराने और नए विधान की रचना हुई, और आज तक वे सभी लोग, जो परमेश्वर में विश्वास करते हैं, बाइबल पढ़ते रहे हैं। बाइबल इतिहास की पुस्तक है। “परमेश्वर के दैनिक वचन | “बाइबल के विषय में (1)” | अंश 266″पढ़ना जारी रखें

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आज का वचन | “बाइबल के विषय में (1)” | अंश 265

यदि तुम करते हो, तो तुम परमेश्वर के साथ विश्वासघात कर रहे हो। उस समय से जब बाइबल थी, प्रभु के प्रति लोगों का विश्वास बाइबल के प्रति विश्वास रहा है।

आज का वचन| “बाइबल के विषय में (1)” | अंश 265

बहुत सालों से, लोगों के विश्वास का परम्परागत माध्यम (दुनिया के तीन मुख्य धर्मों में से एक, मसीहियत के विषय में) बाइबल पढ़ना ही रहा है; बाइबल से दूर जाना प्रभु में विश्वास नहीं है, बाइबल से दूर जाना एक दुष्ट पंथ और विधर्म है, और यहाँ तक कि जब लोग अन्य पुस्तकों को पढ़ते हैं, तो इन पुस्तकों की बुनियाद, बाइबल की व्याख्या ही होनी चाहिए। “आज का वचन | “बाइबल के विषय में (1)” | अंश 265″पढ़ना जारी रखें
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आस्था प्रश्न व उत्तर

परमेश्वर ने इस संसार की सृष्टि की, उसने इस मानवजाति को बनाया, और इतना ही नहीं, वह प्राचीन यूनानी संस्कृति और मानव-सभ्यता का वास्तुकार भी था।

आज आपदाएँ बढ़ती गंभीरता और आवृत्ति के साथ हो रही हैं। ये संकेत बताते हैं कि बाइबल में जिनकी भविष्यवाणी की गई है, अंतिम दिनों की वे महान आपदाएँ शुरू होने वाली हैं। इन आपदाओं के बीच हम कैसे परमेश्वर की सुरक्षा हासिल कर, बचे रह सकते हैं?

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:

परमेश्वर ने इस संसार की सृष्टि की, उसने इस मानवजाति को बनाया, और इतना ही नहीं, वह प्राचीन यूनानी संस्कृति और मानव-सभ्यता का वास्तुकार भी था। केवल परमेश्वर ही इस मानवजाति को सांत्वना देता है, और केवल परमेश्वर ही रात-दिन इस मानवजाति का ध्यान रखता है। मानव का विकास और प्रगति परमेश्वर की संप्रभुता से जुड़ी है, मानव का इतिहास और भविष्य परमेश्वर की योजनाओं में निहित है। यदि तुम एक सच्चे ईसाई हो, तो तुम निश्चित ही इस बात पर विश्वास करोगे कि किसी भी देश या राष्ट्र का उत्थान या पतन परमेश्वर की योजनाओं के अनुसार होता है। केवल परमेश्वर ही किसी देश या राष्ट्र के भाग्य को जानता है और केवल परमेश्वर ही इस मानवजाति की दिशा नियंत्रित करता है। यदि मानवजाति अच्छा भाग्य पाना चाहती है, यदि कोई देश अच्छा भाग्य पाना चाहता है, तो मनुष्य को परमेश्वर की आराधना में झुकना होगा, पश्चात्ताप करना होगा और परमेश्वर के सामने अपने पाप स्वीकार करने होंगे, अन्यथा मनुष्य का भाग्य और गंतव्य एक अपरिहार्य विभीषिका बन जाएँगे।

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परमेश्वर के दैनिक वचन | “सहस्राब्दि राज्य आ चुका है” | अंश 220

क्या तुम लोगों ने देखा है कि इस समूह के लोगों में परमेश्वर कौन सा कार्य पूर्ण करेगा? परमेश्वर ने कहा, कि यहाँ तक कि सहस्राब्दि राज्य में भी लोगों को उसके कथनों का पालन अवश्य करना चाहिए, और भविष्य में परमेश्वर के कथन अंततोगत्वा मनुष्य के जीवन को कनान के उत्तम देश में सीधे तौर पर मार्गदर्शन करेगा।

परमेश्वर के दैनिक वचन | “सहस्राब्दि राज्य आ चुका है” | अंश 220

क्या तुम लोगों ने देखा है कि इस समूह के लोगों में परमेश्वर कौन सा कार्य पूर्ण करेगा? परमेश्वर ने कहा, कि यहाँ तक कि सहस्राब्दि राज्य में भी लोगों को उसके कथनों का पालन अवश्य करना चाहिए, और भविष्य में परमेश्वर के कथन अंततोगत्वा मनुष्य के जीवन को कनान के उत्तम देश में सीधे तौर पर मार्गदर्शन करेगा। जब मूसा जंगल में था, तो परमेश्वर ने सीधे तौर पर उसे निर्देश दिया और उससे बातचीत की। “परमेश्वर के दैनिक वचन | “सहस्राब्दि राज्य आ चुका है” | अंश 220″पढ़ना जारी रखें

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God’s Warning in the Last Days | Hindi Christian Movie | “शहर परास्त किया जाएगा” (Hindi Dubbed)

ईसाई चेंग ह्युआइज़ चीन की एक गृह-कलीसिया में सहकर्मी हैं। वे अपनी कलीसिया को एक कारखाना खोलते हुए देखती हैं जिसमें पादरी विश्‍वासियों को सीसीपी सरकार को सौंपने के लिए थ्री-सेल्‍फ-कलीसिया में शामिल होने के लिए प्रेरित करते हैं।

God’s Warning in the Last Days | Hindi Christian Movie | “शहर परास्त किया जाएगा” (Hindi Dubbed)

ईसाई चेंग ह्युआइज़ चीन की एक गृह-कलीसिया में सहकर्मी हैं। वे अपनी कलीसिया को एक कारखाना खोलते हुए देखती हैं जिसमें पादरी विश्‍वासियों को सीसीपी सरकार को सौंपने के लिए थ्री-सेल्‍फ-कलीसिया में शामिल होने के लिए प्रेरित करते हैं। चर्च के पादरी और एल्‍डर्स गोपनीय और ख़ुलेआम तरीकों से अपने व्‍यक्तिगत ओहदों और नाम के‍ लिए ईर्ष्‍यापूर्ण ढंग से संघर्ष करते हैं और कलीसिया को विभाजित कर देते हैं। चमकती पूर्वी बिजली का विरोध करने के लिए और विश्‍वासियों को उसका अध्‍ययन करने से रोकने के लिए वे सीसीपी सरकार के साथ भी गठजोड़ कर लेते हैं। “God’s Warning in the Last Days | Hindi Christian Movie | “शहर परास्त किया जाएगा” (Hindi Dubbed)”पढ़ना जारी रखें
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