बाइबल की भविष्यवाणियाँ—अंत के दिनों में परमेश्वर के न्याय के कार्य

अंत के दिनों में परमेश्वर के न्याय के बारे में बाइबल की कई भविष्यवाणियाँ हैं, वे कैसे पूरी होंगी? अंत के दिनों में परमेश्वर न्याय का कार्य क्यों करेगा? क्या अंत के दिनों में परमेश्वर का न्याय उद्धार है या निंदा और सजा है? न्याय और हमारे पाप से बचकर स्वर्गिक राज्य में प्रवेश करने के बीच क्या संबंध है? नीचे दी गई सामग्री आपको इन प्रश्नों के उत्तर बताएगी।

बाइबल की भविष्यवाणियाँ—अंत के दिनों में परमेश्वर के न्याय के कार्य

1. अंत के दिनों में परमेश्वर के न्याय के कार्य की भविष्यवाणियां

“सेनाओं के यहोवा का यही वचन है। तब मैं न्याय करने को तुम्हारे निकट आऊँगा” (मलाकी 3:5)।

“क्योंकि वह आनेवाला है। वह पृथ्वी का न्याय करने को आनेवाला है, वह धर्म से जगत का, और सच्चाई से देश-देश के लोगों का न्याय करेगा” (भजन संहिता 96:13)।

“इस कारण दुष्ट लोग अदालत में स्थिर न रह सकेंगे, और न पापी धर्मियों की मण्डली में ठहरेंगे” (भजन संहिता 1:5)।

“क्योंकि उसने एक दिन ठहराया है, जिसमें वह उस मनुष्य के द्वारा धार्मिकता से जगत का न्याय करेगा, जिसे उसने ठहराया है” (प्रेरितों के काम 17:31)।

“यदि कोई मेरी बातें सुनकर न माने, तो मैं उसे दोषी नहीं ठहराता, क्योंकि मैं जगत को दोषी ठहराने के लिये नहीं, परन्तु जगत का उद्धार करने के लिये आया हूँ। जो मुझे तुच्छ जानता है और मेरी बातें ग्रहण नहीं करता है उसको दोषी ठहरानेवाला तो एक है: अर्थात् जो वचन मैंने कहा है, वह अन्तिम दिन में उसे दोषी ठहराएगा” (यूहन्ना 12:47-48)।

“पिता किसी का न्याय भी नहीं करता, परन्तु न्याय करने का सब काम पुत्र को सौंप दिया है” (यूहन्ना 5:22)।

“वरन् उसे न्याय करने का भी अधिकार दिया है, इसलिए कि वह मनुष्य का पुत्र है” (यूहन्ना 5:27)।

“क्योंकि वह समय आ पहुँचा है, कि पहले परमेश्‍वर के लोगों का न्याय किया जाए” (1 पतरस 4:17)।

“उस प्राचीन के सम्मुख से आग की धारा निकलकर बह रही थी; फिर हजारों हज़ार लोग उसकी सेवा टहल कर रहे थे, और लाखों-लाख लोग उसके सामने हाज़िर थे; फिर न्यायी बैठ गए, और पुस्तकें खोली गईं” (दानिय्येल 7:10)।

“फिर मैंने एक बड़ा श्वेत सिंहासन और उसको जो उस पर बैठा हुआ है, देखा, जिसके सामने से पृथ्वी और आकाश भाग गए, और उनके लिये जगह न मिली। फिर मैंने छोटे बड़े सब मरे हुओं को सिंहासन के सामने खड़े हुए देखा, और पुस्तकें खोली गई; और फिर एक और पुस्तक खोली गईं, अर्थात् जीवन की पुस्तक; और जैसे उन पुस्तकों में लिखा हुआ था, उनके कामों के अनुसार मरे हुओं का न्याय किया गया” (प्रकाशितवाक्य 20:11-12)।

“और उसने बड़े शब्द से कहा, ‘परमेश्‍वर से डरो, और उसकी महिमा करो, क्योंकि उसके न्याय करने का समय आ पहुँचा है; और उसकी आराधना करो, जिसने स्वर्ग और पृथ्वी और समुद्र और जल के सोते बनाए’” (प्रकाशितवाक्य 14:7)।

2. परमेश्वरके अंतिम न्याय और हमारे स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करने के का बीच संबंध

“अन्त के दिनों में ऐसा होगा कि यहोवा के भवन का पर्वत सब पहाड़ों पर दृढ़ किया जाएगा, और सब पहाड़ियों से अधिक ऊँचा किया जाएगा; और हर जाति के लोग धारा के समान उसकी ओर चलेंगे। और बहुत देशों के लोग आएँगे, और आपस में कहेंगे: ‘आओ, हम यहोवा के पर्वत पर चढ़कर, याकूब के परमेश्‍वर के भवन में जाएँ; तब वह हमको अपने मार्ग सिखाएगा, और हम उसके पथों पर चलेंगे।’ क्योंकि यहोवा की व्यवस्था सिय्योन से, और उसका वचन यरूशलेम से निकलेगा। वह जाति-जाति का न्याय करेगा, और देश-देश के लोगों के झगड़ों को मिटाएगा; और वे अपनी तलवारें पीट कर हल के फाल और अपने भालों को हँसिया बनाएँगे; तब एक जाति दूसरी जाति के विरुद्ध फिर तलवार न चलाएगी, न लोग भविष्य में युद्ध की विद्या सीखेंगे। अहंकार नष्ट किया जाएगा” (यशायाह 2:2-4)।

“इस देश के सारे निवासियों की दो तिहाई मार डाली जाएँगी और बची हुई तिहाई उसमें बनी रहेगी। उस तिहाई को मैं आग में डालकर ऐसा निर्मल करूँगा, जैसा रूपा निर्मल किया जाता है, और ऐसा जाँचूँगा जैसा सोना जाँचा जाता है। वे मुझसे प्रार्थना किया करेंगे, और मैं उनकी सुनूँगा। मैं उनके विषय में कहूँगा, ‘ये मेरी प्रजा हैं,’ और वे मेरे विषय में कहेंगे, ‘यहोवा हमारा परमेश्‍वर है’” (जकर्याह 13:8-9)।

“उसने कहा, ‘हे दानिय्येल चला जा; क्योंकि ये बातें अन्त समय के लिये बन्द हैं और इन पर मुहर दी हुई है। बहुत लोग तो अपने-अपने को निर्मल और उजले करेंगे, और स्वच्छ हो जाएँगे; परन्तु दुष्ट लोग दुष्टता ही करते रहेंगे; और दुष्टों में से कोई ये बातें न समझेगा; परन्तु जो बुद्धिमान है वे ही समझेंगे’” (दानिय्येल 12:9-10)।

“धन्य वे हैं, जो अपने वस्त्र धो लेते हैं, क्योंकि उन्हें जीवन के पेड़ के पास आने का अधिकार मिलेगा, और वे फाटकों से होकर नगर में प्रवेश करेंगे” (प्रकाशितवाक्य 22:14)।

“देख, परमेश्‍वर का डेरा मनुष्यों के बीच में है; वह उनके साथ डेरा करेगा, और वे उसके लोग होंगे, और परमेश्‍वर आप उनके साथ रहेगा; और उनका परमेश्‍वर होगा। और वह उनकी आँखों से सब आँसू पोंछ डालेगा; और इसके बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहली बातें जाती रहीं” (प्रकाशितवाक्य 21:3-4)।

“जगत का राज्य हमारे प्रभु का और उसके मसीह का हो गया और वह युगानुयुग राज्य करेगा” (प्रकाशितवाक्य 11:15)।

प्रासंगिक सत्य:
परमेश्वर कहते हैं: “अंत के दिनों का कार्य, सभी को उनके स्वभाव के आधार पर पृथक करना, परमेश्वर की प्रबंधन योजना का समापन करना है, क्योंकि समय निकट है और परमेश्वर का दिन आ गया है। परमेश्वर उन सभी को, जिन्होंने उसके राज्य में प्रवेश कर लिया है अर्थात्, वे सभी लोग जो अंत तक उसके वफादार रहे हैं, स्वयं परमेश्वर के युग में ले जाता है। हालाँकि, जब तक स्वयं परमेश्वर का युग नहीं आ जाता है तब तक परमेश्वर जो कार्य करेगा वह मनुष्य के कर्मों को देखना या मनुष्य जीवन के बारे में पूछताछ करना नहीं, बल्कि उनके विद्रोह का न्याय करना है, क्योंकि परमेश्वर उन सभी को शुद्ध करेगा जो उसके सिंहासन के सामने आते हैं। वे सभी जिन्होंने आज के दिन तक परमेश्वर के पदचिन्हों का अनुसरण किया है वे लोग हैं जो परमेश्वर के सिंहासन के सामने आ गए हैं, इसलिए, ऐसा हर एक व्यक्ति जो परमेश्वर के कार्य को इसके अंतिम चरण में स्वीकार करता है, वह परमेश्वर द्वारा शुद्ध किए जाने लायक है। दूसरे शब्दों में, हर कोई जो परमेश्वर के कार्य को इसके अंतिम चरण में स्वीकार करता है वही परमेश्वर के न्याय का पात्र है।“

“जब ‘न्याय’ शब्द की बात आती है, तो तुम उन वचनों के बारे में सोचोगे जो यहोवा ने सभी स्थानों के लिए कहे थे और फटकार के उन वचनों के बारे में सोचोगे जो यीशु ने फरीसियों को कहे थे। अपनी समस्त कठोरता के कारण, ये वचन मनुष्य के बारे में परमेश्वर का न्याय नहीं हैं, ये केवल विभिन्न परिस्थितियों, अर्थात्, विभिन्न हालातों में परमेश्वर द्वारा कहे गए वचन हैं; ये वचन मसीह द्वारा तब कहे गए वचनों के सामान नहीं हैं जब वह अन्त के दिनों में मनुष्यों का न्याय करता है। अंत के दिनों में, मसीह मनुष्य को सिखाने के लिए विभिन्न प्रकार के सत्यों का उपयोग करता है, मनुष्य के सार को उजागर करता है, और उसके वचनों और कर्मों का विश्लेषण करता है। इन वचनों में विभिन्न सत्यों का समावेश है, जैसे कि मनुष्य का कर्तव्य, मनुष्य को किस प्रकार परमेश्वर का आज्ञापालन करना चाहिए, हर व्यक्ति जो परमेश्वर के कार्य को करता है, मनुष्य को किस प्रकार परमेश्वर के प्रति निष्ठावान होना चाहिए, मनुष्य को किस प्रकार सामान्य मानवता से, और साथ ही परमेश्वर की बुद्धि और उसके स्वभाव इत्यादि को जीना चाहिए। ये सभी वचन मनुष्य के सार और उसके भ्रष्ट स्वभाव पर निर्देशित हैं। खासतौर पर, वे वचन जो यह उजागर करते हैं कि मनुष्य किस प्रकार से परमेश्वर का तिरस्कार करता है इस संबंध में बोले गए हैं कि किस प्रकार से मनुष्य शैतान का मूर्त रूप और परमेश्वर के विरुद्ध दुश्मन की शक्ति है। अपने न्याय का कार्य करने में, परमेश्वर केवल कुछ वचनों के माध्यम से मनुष्य की प्रकृति को स्पष्ट नहीं करता है; बल्कि वह लम्बे समय तक इसे उजागर करता है, इससे निपटता है, और इसकी काट-छाँट करता है। उजागर करने की इन विधियों, निपटने, और काट-छाँट को साधारण वचनों से नहीं, बल्कि सत्य से प्रतिस्थापित किया जा सकता है, जिसे मनुष्य बिल्कुल भी धारण नहीं करता है। केवल इस तरीके की विधियाँ ही न्याय समझी जाती हैं; केवल इसी तरह के न्याय के माध्यम से ही मनुष्य को वश में किया जा सकता है और परमेश्वर के प्रति समर्पण में पूरी तरह से आश्वस्त किया जा सकता है, और इसके अलावा मनुष्य परमेश्वर का सच्चा ज्ञान प्राप्त कर सकता है। न्याय का कार्य जिस चीज़ को उत्पन्न करता है वह है परमेश्वर के असली चेहरे और उसकी स्वयं की विद्रोहशीलता के सत्य के बारे में मनुष्य में समझ। न्याय का कार्य मनुष्य को परमेश्वर की इच्छा की, परमेश्वर के कार्य के उद्देश्य की, और उन रहस्यों की अधिक समझ प्राप्त करने देता है जो उसके लिए समझ से परे हैं। यह मनुष्य को उसके भ्रष्ट सार तथा उसकी भ्रष्टता के मूल को पहचानने और जानने, साथ ही मनुष्य की कुरूपता को खोजने देता है। ये सभी प्रभाव न्याय के कार्य के द्वारा पूरे होते हैं, क्योंकि इस कार्य का सार वास्तव में उन सभी के लिए परमेश्वर के सत्य, मार्ग और जीवन का मार्ग प्रशस्त करने का कार्य है जिनका उस पर विश्वास है। यह कार्य परमेश्वर के द्वारा किया गया न्याय का कार्य है।“

“जो अंत के दिनों के दौरान परमेश्वर के न्याय और ताड़ना के कार्य के दौरान—अर्थात्, शुद्धिकरण के अंतिम कार्य के दौरान—अडिग रहने में समर्थ हैं, ये वे लोग होंगे जो परमेश्वर के साथ अंतिम विश्राम में प्रवेश करेंगे; इसलिए, जो विश्राम में प्रवेश करेंगे, वे सब शैतान के प्रभाव से मुक्त हो चुके होंगे और केवल परमेश्वर के शुद्धिकरण के अंतिम कार्य से गुज़रने के बाद ही परमेश्वर द्वारा प्राप्त किए जा चुके होंगे। ये लोग ही जो अंततः परमेश्वर द्वारा प्राप्त किए जा चुके हैं अंतिम विश्राम में प्रवेश करेंगे। परमेश्वर की ताड़ना और न्याय का सार मानवजाति को शुद्ध करना है, और यह अंतिम विश्राम के दिन के लिए है। अन्यथा, संपूर्ण मानवजाति अपने स्वयं के स्वभाव का अनुसरण करने या विश्राम में प्रवेश करने में समर्थ नहीं होगी। यह कार्य ही मानवजाति के लिए विश्राम में प्रवेश करने का एकमात्र मार्ग है। केवल परमेश्वर द्वारा शुद्ध करने का कार्य ही मानवजाति को उसकी अधार्मिकता से शुद्ध करेगा, और केवल उसका ताड़ना और न्याय का कार्य ही मानव जाति की अवज्ञा की बातों को प्रकाश में लाएगा, फलस्वरूप, जिन्हें बचाया नहीं जा सकता है उनमें से जिन्हें बचाया जा सकता है उन्हें, और जो नहीं बचेंगे उनमें से जो बचेंगे उन्हें अलग करेगा। जब उसका कार्य समाप्त हो जाएगा, तो जो शेष बचेंगे वे शुद्ध किए जाएँगे, और जब वे मानवजाति के उच्चतर राज्य में प्रवेश करेंगे तो एक अद्भुत द्वितीय मानव जीवन का पृथ्वी पर आनंद उठाएँगे; दूसरे शब्दों में, वे मानवजाति के विश्राम में प्रवेश करेंगे और परमेश्वर के साथ-साथ रहेंगे। जो नहीं बच सकते हैं उनके ताड़ना और न्याय से गुजरने के बाद, उनके मूल स्वरूप पूर्णतः प्रकट हो जाएँगे; उसके बाद वे सबके सब नष्ट कर दिए जाएँगे और, शैतान के समान, उन्हें पृथ्वी पर जीवित रहने की अनुमति नहीं होगी। भविष्य की मानवजाति में इस प्रकार के कोई भी लोग शामिल नहीं होंगे; ये लोग अंतिम विश्राम के देश में प्रवेश करने के योग्य नहीं है, न ही ये लोग उस विश्राम के दिन में प्रवेश करने के योग्य हैं जिसे परमेश्वर और मनुष्य दोनों साझा करेंगे, क्योंकि वे दण्ड के लक्ष्य हैं और दुष्ट हैं, और वे धार्मिक लोग नहीं हैं। उन्हें एक बार छुटकारा दिया गया था, और उन्हें न्याय और ताड़ना भी दी गई थी; उन्होंने एक बार परमेश्वर को सेवाएँ भी दी थीं, परंतु जब अंतिम दिन आएगा, तो उन्हें तब भी उनकी अपनी दुष्टता, अवज्ञा व छुटकारा न पाने की योग्यता के कारण दूर और नष्ट कर दिया जाएगा। भविष्य के संसार में उनका अब और अस्तित्व नहीं रहेगा, और भविष्य की मानवजाति के बीच उनका अब और अस्तित्व नहीं रहेगा। …बुरे को दण्ड और अच्छे को पुरस्कार देने का उसका परम कार्य समस्त मानवजाति को सर्वथा शुद्ध करने के लिए है, ताकि वह पूर्णतः शुद्ध मानवजाति को अनंत विश्राम में ले जाए। उसके कार्य का यह चरण सबसे अधिक महत्वपूर्ण कार्य है। यह उसके समस्त प्रबंधन कार्य का अंतिम चरण है। यदि परमेश्वर दुष्टों का नाश नहीं करता बल्कि उन्हें बचा रहने देता तो संपूर्ण मानव जाति अभी भी विश्राम में प्रवेश करने योग्य नहीं होती, और परमेश्वर समस्त मानवजाति को एक बेहतर राज्य में नहीं पहुँचा पाता। इस प्रकार वह कार्य पूर्णतः समाप्त नहीं होता। जब वह अपना कार्य समाप्त कर लेगा, तो संपूर्ण मानव जाति पूर्णतः पवित्र हो जाएगी। केवल इस तरह से ही परमेश्वर शांतिपूर्वक विश्राम में रह सकता है।“

परमेश्वर के वचनों को पढ़ें और आप जीवन में उचित लक्ष्य पा सकेंगे।

यीशु मसीह का दूसरा आगमन खंड यीशु मसीह की वापसी के स्वागत में आपकी सहायता करते हैंI

यीशु मसीह के “पूरा हुआ” कहने का असल अर्थ क्या है?

वह रविवार की सुबह भी किसी अन्य सुबह जैसी ही थी। मैंने बाइबल खोली और अपने आध्यात्मिक भक्ति की शुरुआत करते हुए मैंने इब्रानियों में 9:28 पढ़ा, जिसमें लिखा था: “वैसे ही मसीह भी बहुतों के पापों को उठा लेने के लिये एक बार बलिदान हुआ; और जो लोग उसकी बाट जोहते हैं उनके उद्धार के लिये दूसरी बार बिना पाप उठाए हुए दिखाई देगा” इसके बारे में ध्यान से सोच-विचार करते हुए, मैं उलझन में पड़ गयी। मैंने सोचा, “ऐसा नहीं हो सकता। क्या क्रूस पर यीशु मसीह के ‘पूरा हुआ‘ कहने का अर्थ यह नहीं है कि मनुष्य को बचाने के लिए परमेश्वर का कार्य पूरी तरह से समाप्त हो गया है? जब प्रभु लौटेंगे, हम तुरंत स्वर्ग में प्रवेश कर प्रभु के साथ भोज करेंगे, तो यहाँ यह कैसे लिखा है कि जब यीशु मसीह वापस आयेंगे तो वे मनुष्य को बचाने के लिए फिर से प्रकट होंगे? आखिर इन सबका मतलब क्या है?”

जितना अधिक मैंने इसके बारे में सोचती जाती, उतना ही मेरा दिल संदेह से भरता जाता… मैंने सोचा, “ऐसे काम नहीं चलेगा! इस बारे में संगति करने के लिए मुझी किसी को तो खोजना ही होगा।” तभी मुझे कलीसिया के अपनी सहकर्मी, बहन शाओ ज़ू की याद आई। हम आमतौर पर एक साथ बाइबिल पर चर्चा किया करते थे, और सौभाग्य से बहन शाओ ज़ू, किसी जगह एक सभा में भाग लेकर अभी-अभी वापस ही आई थी। ऐसा कुछ नहीं था जिसे तलाशने में बहन शाओ मेरी मदद न कर सके।

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हम किस तरह परमेश्‍वर के पदचिन्‍हों की खोज करें और प्रभु के प्रकटन का स्‍वागत करें?

बाइबल के प्रासंगिक पद:

“माँगो, तो तुम्हें दिया जाएगा; ढूँढ़ो तो तुम पाओगे; खटखटाओ, तो तुम्हारे लिये खोला जाएगा” (मत्ती 7:7)।

“जिसके कान हों वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है” (प्रकाशितवाक्य 2:7)।

“देख, मैं द्वार पर खड़ा हुआ खटखटाता हूँ; यदि कोई मेरा शब्द सुनकर द्वार खोलेगा, तो मैं उसके पास भीतर आकर उसके साथ भोजन करूँगा और वह मेरे साथ” (प्रकाशितवाक्य 3:20)।

“ये वे ही हैं कि जहाँ कहीं मेम्ना जाता है, वे उसके पीछे हो लेते हैं” (प्रकाशितवाक्य 14:4)।

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:

“चूँकि मनुष्य परमेश्वर में विश्वास करता है, तो उसे परमेश्वर के पदचिन्हों का करीब से, कदम दर कदम, अनुसरण करना होगा; और उसे “जहाँ कहीं मेम्ना जाता है उसका अनुसरण” करना चाहिए। केवल ये ही ऐसे लोग हैं जो सच्चे मार्ग को खोजते हैं, केवल ये ही ऐसे मनुष्य हैं जो पवित्र आत्मा के कार्य को जानते हैं। लोग जो दासत्व से पत्रों एवं सिद्धान्तों का अनुसरण करते हैं वे ऐसे लोग हैं जिन्हें पवित्र आत्मा के कार्य के द्वारा निष्कासित किया गया है। समय की प्रत्येक अवधि में, परमेश्वर नया कार्य आरम्भ करेगा, और प्रत्येक अवधि में, मनुष्य के बीच में एक नई शुरुआत होगी। यदि मनुष्य केवल इन सच्चाईयों में ही बना रहता है कि ‘यहोवा ही परमेश्वर है’ और “यीशु ही मसीहा है,” जो ऐसी सच्चाईयां हैं जो केवल एक अकेले युग पर ही लागू होती हैं, तो मनुष्य कभी भी पवित्र आत्मा के कार्य के साथ कदम नहीं मिला पाएगा, और वह हमेशा पवित्र आत्मा के कार्य को हासिल करने में असमर्थ रहेगा। इसकी परवाह किए बगैर कि परमेश्वर कैसे कार्य करता है, मनुष्य जरा सा भी सन्देह किए बिना अनुसरण करता है, और वह करीब से अनुसरण करता है। इस रीति से, पवित्र आत्मा के द्वारा मनुष्य को कैसे निष्काषित किया जा सकता है? इसकी परवाह किए बगैर कि परमेश्वर क्या करता है, जब तक मनुष्य को निश्चय है कि यह पवित्र आत्मा का कार्य है, और वह बिना किसी आशंका के पवित्र आत्मा के कार्य में सहयोग करता है, और परमेश्वर की अपेक्षाओं को पूरा करने का प्रयास करता है, तो उसे कैसे दण्ड दिया जा सकता है?”

“परमेश्वर का कार्य एवं मनुष्य का रीति व्यवहार” से

परमेश्‍वर के पदचिन्‍हों की खोज करें

चूँकि हम परमेश्वर के पदचिन्हों को खोज रहे हैं, हमें अवश्य ही परमेश्वर की इच्छा, परमेश्वर के वचन, परमेश्वर के कथन की खोज करनी चाहिए; क्योंकि जहां परमेश्वर के नए वचन हैं, वहाँ परमेश्वर की वाणी है, और जहां परमेश्वर के पदचिन्ह हैं, वहाँ परमेश्वर के कार्य हैं। जहां परमेश्वर की अभिव्यक्ति है, वहाँ परमेश्वर का प्रकट होना है, और जहां परमेश्वर का प्रकट होना है, वहाँ मार्ग, सत्य और जीवन का अस्तित्व है। परमेश्वर के पदचिन्हों को ढूँढते हुए, तुम लोगों ने उन शब्दों की अवहेलना कर दी कि “परमेश्वर ही मार्ग, सत्य और जीवन है।” इसलिए कई लोग जब सत्य प्राप्त करते हैं, वे विश्वास नहीं करते कि वे परमेश्वर के पदचिन्हों को पा चुके हैं और बहुत कम परमेश्वर के प्रकट होने को स्वीकार करते हैं। कितनी गंभीर त्रुटि है यह! परमेश्वर के प्रकट होने का मनुष्य की धारणाओं के साथ समझौता नहीं किया जा सकता है, परमेश्वर का मनुष्य के आदेश पर दिखाई देना उस से भी कम संभव है। जब परमेश्वर अपना कार्य करता है तो वह अपने स्वयं के चुनाव करता है और अपनी स्वयं की योजनाएं बनाता है; इसके अलावा, उसके पास अपने ही उद्देश्य हैं, और अपने ही तरीके हैं। जो कार्य वह करता है उसे उस पर मनुष्य के साथ चर्चा करने की या मनुष्य की सलाह लेने की आवश्यकता नहीं है, और ना ही उसे अपने कार्य की हर एक व्यक्ति को सूचना देने की आवश्यकता है। यह परमेश्वर का स्वभाव है और, इससे बढ़कर, हर किसी को यह पहचानना चाहिए। यदि तुम लोग परमेश्वर के प्रकट होने को देखने की चाहत रखते हो, यदि तुम लोग परमेश्वर के पदचिन्हों का अनुसरण करने के इच्छुक हो, तो फिर तुम लोगों को पहले अपनी धारणाओं से ऊँचा उठना आवश्यक है। तुम लोगों को यह माँग नहीं करनी चाहिए कि परमेश्वर यह कार्य करे या वह करे, उससे भी कम तुझे उसे अपनी स्वयं की सीमा में रखना चाहिए और उसे अपनी स्वयं की धारणाओं में सीमित करना चाहिए। इसके बजाय, तुम लोगों को उससे यह पूछना चाहिए कि कैसे तुम लोग परमेश्वर के पदचिन्हों को खोज सकते हो, तुम लोगों को परमेश्वर के प्रकट होने को कैसे स्वीकार करना चाहिए, और कैसे तुम लोगो को परमेश्वर के नए कार्य के लिए समर्पण करना चाहिए; मनुष्य को यही कार्य करना चाहिए। चूँकिमनुष्य सत्य नहीं है, और न ही सत्य के अधीन है, इसलिए मनुष्य को खोज करनी, स्वीकार करना, और पालन करना चाहिए।

चाहे तू अमेरिकी, ब्रिटिश, या किसी भी अन्य राष्ट्रीयता का हो, तुझे अपने स्वयं के दायरे से बाहर आना चाहिए, तुझे स्वयं को पार करना चाहिए, और परमेश्वर की एक सृष्टि के रूप में परमेश्वर के कार्य को देखना चाहिए। इस तरीके से, तू परमेश्वर के पदचिन्हों पर रुकावट नहीं डाल पाएगा। क्योंकि, आज, कई लोग परमेश्वर के एक निश्चित देश या राष्ट्र में प्रकट होने को असंभव समझते हैं। परमेश्वर के कार्य का कितना गहरा महत्व है, और परमेश्वर का प्रकट होना कितना महत्वपूर्ण है! उन्हें कैसे मनुष्य की धारणाओं और सोच से मापा जा सकता है? और इसलिए मैं कहता हूँ, जब तू परमेश्वर के प्रकट होने को खोजता है तब तुझे अपनी राष्ट्रीयता या जातीयता की धारणाओं को तोड़ देना चाहिए। इस तरह, तू अपने स्वयं की धारणाओं से विवश नहीं हो पाएगा; इस तरह, तू परमेश्वर के प्रकट होने का स्वागत करने में सक्षम हो पाएगा। अन्यथा, तू हमेशा अन्धकार में रहेगा, और परमेश्वर की मंजूरी कभी हासिल नहीं कर पाएगा।

…जहाँ परमेश्वर प्रकट होता है, वहाँ सत्य की अभिव्यक्ति है, और वहाँ परमेश्वर की वाणी है। केवल वे ही लोग, जो सत्य को स्वीकार कर सकते हैं परमेश्वर की वाणी सुन सकते हैं, और केवल ऐसे लोग ही परमेश्वर के प्रकट होने को देखने के योग्य हैं। अपनी धारणाओं को एक तरफ रख दो! रुको और ध्यान से इन शब्दों को पढ़ो। यदि तू सच के लिए तीव्र इच्छा रखता है, तो परमेश्वर तुझे उसकी इच्छा और शब्दों को समझने के लिए प्रकाशमान करेगा। अपने “असंभव” के विचार को एक तरफ रखो! जितना अधिक लोग यह मानते हैं कि कुछ असंभव है, उतना ही अधिक उसके घटित होने की संभावना है, क्योंकि परमेश्वर की बुद्धि स्वर्ग से भी ऊँची उड़ान भरती है, परमेश्वर के विचार मनुष्य के विचारों की तुलना में ऊँचे हैं, और परमेश्वर का कार्य मनुष्य की सोच और धारणा की सीमा से कहीं ऊँचा होता है। जितना अधिक कुछ असंभव है, उतना अधिक वहाँ सच्चाई को खोजने की आवश्यकता है; जितना अधिक वह मनुष्य की धारणा और कल्पना से परे है, उतना ही अधिक उस में परमेश्वर की इच्छा समाहित होती है। क्योंकि परमेश्वर स्वयं को चाहे जहां भी प्रकट करे, परमेश्वर फिर भी परमेश्वर है, और उसके स्थान और उसके प्रकट होने के तरीकों के कारण उसका तत्व कभी नहीं बदलेगा। उसके पदचिन्ह चाहे कहीं भी क्यों न हों परमेश्वर का स्वभाव एक जैसा बना रहता है। चाहे जहां कहीं भी परमेश्वर के पदचिन्ह क्यों न हों, वह सभी मानव जाति का परमेश्वर है। उदाहरण के लिए, प्रभु यीशु केवल इस्राएलियों का परमेश्वर नहीं है, बल्कि एशिया, यूरोप और अमेरिका में सभी लोगों का परमेश्वर है, और यहां तक कि पूरे ब्रह्मांड में सिर्फ वो ही परमेश्वर है। इसलिए, हम परमेश्वर के कथनों से परमेश्वर की इच्छा की और उसके प्रकट होने की खोज करें और उसके पदचिन्हों का अनुसरण करें! परमेश्वर ही मार्ग, सत्य और जीवन है। उसके वचन और उसका प्रकट होना समवर्ती है, और उसका स्वभाव और पदचिन्ह हमेशा मानव जाति के लिए उपलब्ध रहेंगे। प्रिय भाइयों और बहनों, मुझे आशा है कि तुम लोग इन शब्दों में परमेश्वर के प्रकट होने को देख सकते हो, और तुम लोग उसके पदचिन्हों का अनुसरण करना शुरू कर दोगे, एक नए युग की ओर और एक सुंदर नए आकाश और नई पृथ्वी में प्रवेश कर सकोगे जो परमेश्वर के प्रकट होने की प्रतीक्षा करनेवालों के लिए तैयार किए गए हैं।

“परमेश्वर का प्रकटीकरण एक नया युग लाया है” से

“वे सभी धन्य हैं जो पवित्र आत्मा की वास्तविक उक्तियों का पालन करने में सक्षम हैं। इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे कैसे थे, या उनके भीतर पवित्र आत्मा कैसे कार्य किया करता था—जिन्होंने नवीनतम कार्य को प्राप्त किया है वे सबसे अधिक धन्य हैं, और जो लोग आज के नवीनतम कार्य का अनुसरण नहीं कर सकते हैं, वे हटा दिए जाते हैं। परमेश्वर उन्हें चाहता है जो नई रोशनी को स्वीकार करने में सक्षम हैं, और वह उन्हें चाहता है जो उसके नवीनतम कार्य को स्वीकार करते और जान लेते हैं। ऐसा क्यों कहा गया है कि तुम लोगों को शुद्ध कुँवारी होना चाहिए? एक शुद्ध कुँवारी पवित्र आत्मा के कार्य की तलाश करने में और नई चीज़ों को समझने में सक्षम होती है, और इसके अलावा, पुरानी अवधारणाओं को दूर करने और परमेश्वर के आज के कार्य का अनुसरण करने में सक्षम होती है। इस समूह के लोगों को, जो आज के नवीनतम कार्य को स्वीकार करते हैं, परमेश्वर ने युगों पहले ही पूर्वनिर्धारित किया था, और वे सभी लोगों में सबसे अधिक धन्य हैं। तुम लोग सीधे परमेश्वर की आवाज सुनते हो, और परमेश्वर की उपस्थिति का दर्शन करते हो, और इस तरह, समस्त स्वर्ग और पृथ्वी में, और सारे युगों में, कोई भी तुम सब से, लोगों के इस समूह से, अधिक धन्य नहीं है।

“परमेश्वर के सबसे नए कार्य को जानो और परमेश्वर के चरण-चिन्हों का अनुसरण करो” से

यीशु मसीह का दूसरा आगमन खंड यीशु मसीह की वापसी के स्वागत में आपकी सहायता करते हैं।

यह यीशु मसीह का प्रचार पेज़ अभी देखिये, प्रभु यीशु के बारे में और जानने के लिए।

Hindi Christian Dance Video | पूरब की ओर लाया है परमेश्वर अपनी महिमा | Bible Prophecy Has Come True

Hindi Christian Dance Video | पूरब की ओर लाया है परमेश्वर अपनी महिमा | Bible Prophecy Has Come True

पूरब की ओर लाया है परमेश्वर अपनी महिमा
इस्राएल को दी अपनी महिमा परमेश्वर ने, फिर हटा ली महिमा उसने वहां से,
ले आया इस्राएलियों को, सभी इंसानों को पूरब में।
परमेश्वर ले आया है उन्हें रोशनी की ओर
ताकि वे फिर एक हो सकें, जुड़ सकें रोशनी से,
न करनी पड़े तलाश रोशनी की।
जिन्हें है तलाश, वो फिर से देख सकेंगे रोशनी परमेश्वर की कृपा से,
और उसकी महिमा जो थी कभी इस्राएल में,
देखो परमेश्वर आया है होकर सवार सफ़ेद बादलों पर इंसानों के बीच,
देखो सफ़ेद बादल, देखो फल-कुंज,
देखो इस्राएल का यहोवा परमेश्वर,
देखो यहूदियों का मालिक, देखो मसीहा जिसकी हसरत थी,
देखो उसका पूर्ण प्रकटन युगों तक जिसे सताया शासकों ने,
देखो यहूदियों का मालिक, देखो मसीहा जिसकी हसरत थी,
देखो उसका पूर्ण प्रकटन युगों तक जिसे सताया शासकों ने।
काम परमेश्वर पूरे जगत का करेगा, और काम वो महान करेगा,
दिखाएगा अपनी सारी महिमा, सारे कर्म इंसान को, अंत के दिनों में।
परमेश्वर दिखाएगा अपनी महिमा का पूरा रूप उन्हें,
जिन्होंने इंतज़ार किया है उसका बरसों-बरस,
जिन्होंने ख़्वाहिश की है आएगा वो होकर बादलों पर सवार,
इस्राएल को जिसने हसरत की है वो आए फिर एक बार,
उन तमाम इंसानों को जो सताते हैं परमेश्वर को।
तो जान जाएंगे सभी, बहुत पहले हटा ली है परमेश्वर ने महिमा अपनी,
और ले आया है इसे पूरब में।
ये यहूदिया में नहीं है, चूँकि अंत के दिनों का आगमन हो चुका है।
“वचन देह में प्रकट होता है” से

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यीशु मसीह का दूसरा आगमन खंड यीशु मसीह की वापसी के स्वागत में आपकी सहायता करते हैं।

Hindi Christian Video “मर्मभेदी यादें” क्लिप 5 – अंत के दिनों में न्याय और स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करने के बीच क्या संबंध है?

Hindi Christian Video “मर्मभेदी यादें” क्लिप 5 – अंत के दिनों में न्याय और स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करने के बीच क्या संबंध है?

धार्मिक जगत में, ऐसे बहुत से लोग हैं जो मानते हैं कि अगर वे प्रभु के नाम को बनाए रखेंगे, प्रभु के वादे में दृढ़ता से विश्वास करेंगे और प्रभु के लिए कड़ी मेहनत से कार्य करेंगे, तो प्रभु के लौटने पर उनका स्वर्गारोहण किया जा सकता है और वे स्वर्ग के राज्य में प्रवेश पा सकते हैं। क्या प्रभु में इस तरह से विश्वास करके कोई वास्तव में स्वर्ग के राज्य में प्रवेश कर सकता है? यदि हम अंत के दिनों में सर्वशक्तिमान परमेश्वर के न्याय के कार्य को स्वीकार नहीं करते हैं तो हमारे साथ वास्तव में क्या होगा? सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं, “अंतिम दिनों का मसीह जीवन लेकर आया, और सत्य का स्थायी एवं अनन्त मार्ग प्रदान किया। इसी सत्य के मार्ग के द्वारा मनुष्य जीवन को प्राप्त करेगा, और एक मात्र इसी मार्ग से मनुष्य परमेश्वर को जानेगा और परमेश्वर का अनुमोदन प्राप्त करेगा। यदि तुम अंतिम दिनों के मसीह के द्वारा प्रदान किए गए जीवन के मार्ग को नहीं खोजते हो, तो तुम कभी भी यीशु के अनुमोदन को प्राप्त नहीं कर पाओगे और कभी भी स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करने के योग्य नहीं बन पाओगे… इन अंतिम दिनों में मसीह मनुष्यों के लिए परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करने का माध्यम है, जिसकी अवहेलना कोई भी नहीं कर सकता। मसीह के माध्यम बने बिना कोई भी परमेश्वर के द्वारा पूर्णता को प्राप्त नहीं कर सकता” (वचन देह में प्रकट होता है)। एक अधिक विस्तृत समझ प्राप्त करने के लिए, कृपया इस लघु वीडियो को देखें!

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Hindi Christian Movie “मर्मभेदी यादें” क्लिप 2 – स्वर्ग के राज्य में प्रवेश की कसौटी क्या है?

Hindi Christian Movie “मर्मभेदी यादें” क्लिप 2 – स्वर्ग के राज्य में प्रवेश की कसौटी क्या है?

किस प्रकार के लोग स्वर्ग के राज्य में प्रवेश कर सकते हैं, इस बारे में प्रभु यीशु ने कहा है, “परन्तु वही जो मेरे स्वर्गीय पिता की इच्छा पर चलता है” (मत्ती 7:21)। (© BSI) तो वास्तव में किस प्रकार के लोग स्वर्ग के पिता की इच्छा को पूरा करते हैं? बहुत से लोगों का मानना है कि जो लोग पौलुस के उदाहरण का अनुसरण करते हैं और कड़ी मेहनत से प्रभु के लिए कार्य करते हैं, वे ही स्वर्ग के पिता की इच्छा को पूरा करते हैं। फिर कुछ ऐसे लोग हैं जो मानते हैं कि जो लोग पूरे हृदय, मन और आत्मा से परमेश्वर को प्रेम करते हैं, जो अब और पाप नहीं करते हैं और जो शुद्धिकरण को प्राप्त कर चुके हैं, वे ही स्वर्ग के पिता की इच्छा को पूरा करते हैं। तो इन दो दृष्टिकोणों में कौन सही है और कौन ग़लत है? कृपया गर्मागर्म बहस में संलग्न इन दोनों पक्षों को देखिए!

यह यीशु मसीह का प्रचार पेज़ अभी देखिये, प्रभु यीशु के बारे में और जानने के लिए।

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों में वह सभी सत्य समाहित है जिसे मनुष्य को समझने की आवशकता है, और जो उसे नए युग में ले जाता ह

परमेश्वर का राज्‍य कहाँ हैं? इसका उत्‍तर प्रभु की प्रार्थना में है

बहुत से ईसाई मानते हैं कि स्वर्ग का राज्य स्वर्ग में है, लेकिन प्रभु की प्रार्थना कहती है, “तेरा राज्य आए। तेरी इच्छा जैसी स्वर्ग में पूरी होती है, वैसे पृथ्वी पर भी हो” (मत्ती 6: 10)। “प्रकाशितवाक्य की पुस्तक भी यह कहती है, “जगत का राज्य हमारे प्रभु का और उसके मसीह का हो गया” (प्रकाशितवाक्य 11:15)। तो, स्वर्ग का राज्य स्वर्ग में है या पृथ्वी पर? इस लेख में, हम आपके सामने जवाब पेश करते हैं।

प्रभु की प्रार्थना में छिपे परमेश्वर के राज्य का रहस्य

परमेश्वर का राज्य स्वर्ग में है या पृथ्वी पर?

बैठकों में, मैं अक्सर अपने पादरी को यह कहते हुए सुनता हूँ, “मेरे पिता के घर में बहुत से रहने के स्थान हैं, यदि न होते तो मैं तुम से कह देता; क्योंकि मैं तुम्हारे लिये जगह तैयार करने जाता हूँ। और यदि मैं जाकर तुम्हारे लिये जगह तैयार करूँ, तो फिर आकर तुम्हें अपने यहाँ ले जाऊँगा कि जहाँ मैं रहूँ वहाँ तुम भी रहो” (यूहन्ना 14:2-3)। “तब वह मुझे आत्मा में एक बड़े और ऊँचे पहाड़ पर ले गया, और पवित्र नगर यरूशलेम को स्वर्ग से परमेश्‍वर के पास से उतरते दिखाया… बारहों फाटक बारह मोतियों के थे; एक एक फाटक एक एक मोती का बना था। नगर की सड़क स्वच्छ काँच के समान शुद्ध सोने की थी” (प्रकाशितवाक्य 21:10, 21) वो हमें पवित्रशास्त्र से इसी तरह के अंश सुनाते हैं ताकि हमें ये बता सकें कि प्रभु हमारे लिए एक जगह तैयार करने गये हैं, और जब वो वापस लौटेंगे, तो हम सभी सीधे स्वर्ग में मोतियों और सोने का आनंद लेने के लिए आरोहित किये जाएंगे। वे हमसे कहते हैं कि हमें शांति से इंतजार करना चाहिए और अक्सर प्रार्थना करनी चाहिए कि जब प्रभु लौट कर आएं तो हम पीछे न रह जायें…

अपने पादरी के शब्दों को सुनने के बाद, मैं स्वर्ग के राज्य के लिए तड़प से भर जाता था। मुझे सोचता था कि, इस संसार में रहते हुए, मैंने कभी भी सोना या मोती नहीं देखा, इसलिए मैं वास्तव में यह देखना चाहता था कि स्वर्ग का राज्य कैसा दिखता है। कभी-कभी मैं खुद के वहाँ होने की भी कल्पना करता था कि मैं स्वर्ग के राज्य में खड़ा, अपने चारों ओर सोने और भव्यता को देख रहा हूँ, मेरी आँखों में चमकती हुई सोने की जगमगाहट, मेरे कदमों के नीचे, सुनहरे फुटपाथ पर मेरे जूते टकराने से होती स्पष्ट ध्वनि, हवा में धूल का एक कण भी नहीं.… यह सच में एक स्वर्गिक जीवन होगा! जितना मैं इसके बारे में सोचता, उतना ही मैं प्रभु के वापस लौटने और हमारे स्वर्ग में आरोहित होने की आशा करता था, ताकि मैं इसकी सुंदरता का आनंद ले सकूं। यह प्रभु से मेरी अधिकांश प्रार्थनाओं का केंद्र हो गया था।

एक दिन, मैंने प्रभु की प्रार्थना पढ़ी, “तेरा राज्य आए। तेरी इच्छा जैसी स्वर्ग में पूरी होती है, वैसे पृथ्वी पर भी हो” (मत्ती 6: 10)। मैंने प्रभु के वचनों पर विचार करना शुरू किया, मैं उलझन में पड़ गया: परमेश्वर का इरादा है कि हम परमेश्वर के राज्य के धरती पर आने के लिए प्रार्थना करें, तो पादरी यह क्यों कहते हैं कि प्रभु वापस लौटने पर हमें सीधे स्वर्ग में आरोहित करेंगे? पादरी के उपदेश स्पष्ट रूप से प्रभु के वचनों का विरोध करते हैं। आखिर ऐसा क्यों है?

परमेश्वर के राज्य का रहस्योद्घाटन

एक दिन, मेरे एक सहकर्मी मुझे एक छोटे समूह में शामिल होने के लिए साथ लाये, वहाँ एक बहन बाइबल पर बहुत स्पष्ट रूप से संगति कर रही थी, जो मेरे लिए बहुत ही रोशन करने वाला था। मैंने सोचा, “यह एक दुर्लभ अवसर है, तो क्यों न इस बहन से मैं अपनी उलझन का जवाब माँगूं?” इसलिए मैंने उनसे पूछा, “हर दिन हमारे पादरी हमसे धैर्य के साथ प्रतीक्षा करने को कहते हैं। वे बताते हैं कि जब प्रभु आयेंगे तो हमें स्वर्ग में आरोहित करेंगे। लेकिन प्रभु की प्रार्थना में, प्रभु स्पष्ट रूप से हमें परमेश्वर के राज्य के पृथ्वी पर आने लिए प्रार्थना करने को कहते हैं, जो कि पादरी के इस कथन के साथ विरोधाभास में है कि हमें प्रभु के आने पर स्वर्ग में आरोहित किये जाने की प्रतीक्षा करनी चाहिए। तो, परमेश्वर का राज्य स्वर्ग में है या पृथ्वी पर?”

उसने मुस्कुराते हुए कहा, “भाई, आपने बहुत अच्छा सवाल उठाया है, और हम एक साथ जवाब तलाश सकते हैं। प्रभु की प्रार्थना में, प्रभु यीशु यकीनन स्पष्ट रूप से कहते हैं कि हमें परमेश्वर के राज्य के पृथ्वी पर आने के लिए प्रार्थना करनी चाहिए, और यह कि ईश्वर की इच्छा धरती पर पूरी हो। कहीं यह नहीं कहा गया है कि स्वर्ग में परमेश्वर का राज्य स्थापित किया जाएगा। वास्तव में, प्रभु ने कहा है, ‘कोई स्वर्ग पर नहीं चढ़ा, केवल वही जो स्वर्ग से उतरा, अर्थात् मनुष्य का पुत्र जो स्वर्ग में है’ (युहन्ना 3:13)। प्रभु स्पष्ट रूप से हमें बताते हैं कि परमेश्वर से अलावा, कोई भी आदमी स्वर्ग में नहीं जा सकता है। स्वर्ग ईश्वर का निवास स्थान है, और प्रभु हमसे परमेश्वर के राज्य के पृथ्वी पर आने के लिए प्रार्थना करने को कहते हैं। फिर भी हम स्वर्ग में चढ़ना चाहते हैं। क्या यह एक अति करने वाली इच्छा नहीं है? तो, परमेश्वर का राज्य अंततः पृथ्वी पर प्रकट होगा, न कि स्वर्ग में। हम बाइबल से कई पदों को भी देख सकते हैं, ‘जब सातवें दूत ने तुरही फूँकी, तो स्वर्ग में इस विषय के बड़े बड़े शब्द होने लगे: जगत का राज्य हमारे प्रभु का और उसके मसीह का हो गया, और वह युगानुयुग राज्य करेगा’ (प्रकाशितवाक्य 11:15)। ‘फिर मैं ने पवित्र नगर नये यरूशलेम को स्वर्ग से परमेश्‍वर के पास से उतरते देखा। वह उस दुल्हिन के समान थी जो अपने पति के लिये सिंगार किए हो। फिर मैं ने सिंहासन में से किसी को ऊँचे शब्द से यह कहते हुए सुना, देख, परमेश्‍वर का डेरा मनुष्यों के बीच में है। वह उनके साथ डेरा करेगा, और वे उसके लोग होंगे, और परमेश्‍वर आप उनके साथ रहेगा और उनका परमेश्‍वर होगा। वह उनकी आँखों से सब आँसू पोंछ डालेगा; और इसके बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहली बातें जाती रहीं’ (प्रकाशितवाक्य 21:2–4)। ये सभी पद इन तथ्यों को संदर्भित करते हैं ‘जगत का राज्य हमारे प्रभु का और उसके मसीह का हो गया,’ ‘फिर मैं ने पवित्र नगर नये यरूशलेम को स्वर्ग से परमेश्‍वर के पास से उतरते देखा,’ ‘परमेश्‍वर का डेरा मनुष्यों के बीच में है।’ ये सभी संकेत करते हैं कि परमेश्वर का राज्य पृथ्वी पर अवरोहित होगा। यदि हम अपनी कल्पनाओं के अनुसार चलते हैं, यह मानते हुए कि परमेश्वर का राज्य स्वर्ग में है और जब प्रभु आयेंगे तो वह हमें स्वर्ग में रहने के लिए आरोहित करेंगे, तो क्या इसका मतलब यह नहीं है कि इन भविष्यवाणियों को पूरा नहीं किया जाएगा? हम सभी जानते हैं कि शुरुआत में, परमेश्वर ने मिट्टी से मानवजाति का निर्माण किया था और उन्हें पृथ्वी पर सभी चीजों को देखने के लिए अदन की वाटिका में रखा था, साथ ही साथ पृथ्वी पर परमेश्वर की आज्ञा का पालन करने, उनकी आराधना और महिमा करने के लिए रखा था, इसलिए हम देख सकते हैं कि मानवजाति के लिए परमेश्वर की इच्छा है कि वो पृथ्वी पर रहे। बाद में, शैतान ने मानवजाति को भ्रष्ट कर दिया, और मानवजाति को बचाने के लिए परमेश्वर का सारा कार्य पृथ्वी पर किया गया है। परमेश्वर ने मूसा द्वारा इस्राएलियों को मिस्र से बाहर निकाला, और यह पृथ्वी पर किया गया था। प्रभु यीशु व्यक्तिगत रूप से मानवजाति को छुड़ाने के लिए देहधारी शरीर के रूप में आए, और यह भी पृथ्वी पर था। इसलिए, मानवजाति की मंज़िल पृथ्वी पर है, न कि स्वर्ग में, और यह बहुत पहले परमेश्वर द्वारा पूर्व निर्धारित किया गया था।”

उनकी संगति सुनने पर मुझे बहुत व्यावहारिक लगी। उनकी समझ बाइबल और प्रभु के वचनों के अनुसार है। पहले, मुझे लगता था कि मेरे पादरी के शब्द और प्रभु यीशु के वचन परस्पर विरोधी हैं, लेकिन मुझे उनके भीतर का सत्य समझ नहीं आया था। इस संगति ने मुझे यह समझा दिया की, चूँकि शुरुआत में परमेश्वर ने पृथ्वी पर मानवजाति का निर्माण किया, मानवजाति को बचाने के लिए परमेश्वर के सभी कार्य पृथ्वी पर किए गए हैं, और प्रभु हमसे परमेश्वर के राज्य के पृथ्वी पर आने के लिए प्रार्थना करने को कहते हैं, तो परमेश्वर की इच्छा है कि हम धरती पर रहें, न कि हम स्वर्ग में चढ़ें।

इसके बाद, मेरे बहन ने इन वचनों को पढ़ा, “परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे। परमेश्वर अपनी मूल अवस्था में लौट जाएगा, और प्रत्येक व्यक्ति अपने-अपने स्थान में लौट जाएगा। ये वे स्थान हैं जिनमें परमेश्वर के समस्त प्रबंधन के अंत के बाद परमेश्वर और मनुष्य अपने-अपने विश्राम करेंगे। परमेश्वर के पास परमेश्वर की मंज़िल है, और मनुष्य के पास मनुष्य की मंज़िल है। विश्राम करते हुए, परमेश्वर पृथ्वी पर समस्त मानवजाति के जीवन का मार्गदर्शन करता रहेगा। जबकि परमेश्वर के प्रकाश में, मनुष्य स्वर्ग के एकमात्र सच्चे परमेश्वर की आराधना करेगा। …जब मानवजाति विश्राम में प्रवेश करती है, तो इसका अर्थ है कि मनुष्य एक सच्ची सृष्टि बन गया है; मानवजाति पृथ्वी पर से परमेश्वर की आराधना करेगी और सामान्य मानवीय जीवन जीएगी। लोग परमेश्वर के अब और अवज्ञाकारी और प्रतिरोध करने वाले नहीं होंगे; वे आदम और हव्वा के मूल जीवन की ओर लौट जाएँगे। विश्राम में प्रवेश करने के बाद ये परमेश्वर और मनुष्य के संबंधित जीवन और उनकी मंज़िलें हैं। परमेश्वर और शैतान के बीच युद्ध में शैतान की पराजय अपरिहार्य प्रवृत्ति है। इस तरह, परमेश्वर का अपने प्रबंधन का कार्य पूरा करने के बाद विश्राम में प्रवेश करना और मनुष्य का पूर्ण उद्धार और विश्राम में प्रवेश इसी तरह से अपरिहार्य प्रवृत्ति बन जाता है। मनुष्य के विश्राम का स्थान पृथ्वी है, और परमेश्वर के विश्राम का स्थान स्वर्ग में है। जब मनुष्य विश्राम करते हुए परमेश्वर की आराधना करेगा, तो वो पृथ्वी पर जीवन यापन करेगा, और जब परमेश्वर विश्राम करते हुए मानवजाति के बचे हुए हिस्से की अगुआई करेगा; तो वह उनकी स्वर्ग से अगुआई करेगा, पृथ्वी से नहीं।” (परमेश्वर और मनुष्य एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे)।

उन्होंने अपनी संगति जारी रखते हुए कहा, “इस अंश से, हम देख सकते हैं कि परमेश्वर द्वारा हमें पूरी तरह से शैतान के हाथों से छुड़ा लेने के बाद, वे पृथ्वी पर मानवजाति के जीवन की अगुवाई करना जारी रखेंगे, न कि हमें स्वर्ग में आरोहित करेंगे। भले ही हम धरती पर ही रहेंगे, लेकिन उस समय शैतान की सभी ताकतें, जो परमेश्वर का विरोध करती हैं, पूरी तरह से नष्ट हो चुकी होंगी, अब शैतान पृथ्वी को परेशान और नुकसान नहीं पहुँचाएगा, लोगों के बीच कोई मनमुटाव, चालबाज़ी या धोखा नहीं होगा, लोग तब पीड़ित नहीं होंगे, न चिंता करेंगे, न बीमार होकर मरेंगे। मानवजाति आदम और हव्वा के समान अदन की वाटिका में रहेगी, परमेश्वर की आराधना करेगी, परमेश्वर के आशीष के बीच रहेगी। उस समय, परमेश्वर और मानवजाति दोनों ही विश्राम से प्रवेश करेंगे, परमेश्वर स्वर्ग से मानवजाति की अगुवाई करेंगे और मनुष्य के संसार पर स्वर्ग का आशीष बरसाएंगे, और पृथ्वी पर मानवजाति परमेश्वर के मार्गदर्शन का आनंद लेगी, एक स्वर्गिक जीवन जियेगी, और परमेश्वर और इन्सान सदा खुशी-ख़ुशी रहेंगे। यह वो खूबसूरत मंज़िल है जिसे परमेश्वर ने हमारे लिए तैयार किया है। यह पूरी तरह से प्रकाशितवाक्य के इस भविष्यवाणी को पूरा करता है, ‘वह उनकी आँखों से सब आँसू पोंछ डालेगा; और इसके बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहली बातें जाती रहीं’ (प्रकाशितवाक्य 21: 4)।”

जब मैंने इस अंश पर अपनी बहन की संगति सुनी, तो मेरा दिल उज्ज्वल हो गया। तो आखिर इस तरह प्रकाशितवाक्य की भविष्यवाणियों को पूरा किया जाएगा। अब मैं समझ गया कि परमेश्वर द्वारा मानवजाति के लिए तैयार की गयी सुंदर मंज़िल धरती पर है, लेकिन जब यह आएगी तो इन्सान शैतान की गड़बड़ी के बिना जियेंगे और एक-दूसरे के साथ शांति से रह सकेंगे, जो वो धन्य जीवन होगा जिसे परमेश्वर ने हमें दिया है। यह सोचकर कि कैसे, पहले मैं सोचता था कि परमेश्वर द्वारा मानवजाति के लिए तैयार की गयी सुंदर मंज़िल स्वर्ग में थी, किस तरह से मैंने स्वर्ग में जीवन के बारे में कल्पना की थी, मुझे अब यह एहसास हुआ कि उस तरह से कल्पना करना हास्यास्पद था। हम देह युक्त प्राणी हैं, इसलिए हम स्वर्ग में कैसे रह सकते हैं? परमेश्वर के मार्गदर्शन के लिए उनका धन्यवाद, जिसने मुझे परमेश्वर के राज्य के रहस्य को समझने दिया।

मुझे एहसास नहीं हुआ कि अंधेरा हो रहा था, और इससे पहले कि मुझे ऐसा लगे कि मैंने काफी कुछ सुन लिया है, बैठक खत्म हो गई। लेकिन, मुझे इससे वास्तव में बहुत फायदा हुआ, और मैं अगली बैठक में अधिक सत्य समझने की आशा करता हूँ…

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यीशु मसीह का दूसरा आगमन खंड यीशु मसीह की वापसी के स्वागत में आपकी सहायता करते हैंI

Hindi Gospel Movie “बाइबल और परमेश्वर” क्लिप 5 – परमेश्वर के पदचिह्नों पर चलने वाले ही अनंत जीवन का मार्ग पा सकते हैं

Hindi Gospel Movie “बाइबल और परमेश्वर” क्लिप 5 – परमेश्वर के पदचिह्नों पर चलने वाले ही अनंत जीवन का मार्ग पा सकते हैं

प्रभु में विश्वास रखने वाले कई लोग मानते हैं: चूँकि बाइबल परमेश्वर के वचनों और मनुष्य की गवाहियों का एक अभिलेख है और लोगों को बड़ी आत्मिक उन्नति दे सकता है, इसलिए बाइबल पढ़ने से हमें अनंत जीवन मिलना चाहिए। लेकिन प्रभु यीशु ने कहा है, “मैं ही पुनरुज्जीवन, और जीवन हूँ: जो कोई भी मुझमें विश्वास करता है, चाहे उसकी मृत्यु क्यों न हो जाएं, वह जीवित रहेगा। और जो कोई भी मुझमें जीता और विश्वास करता है, वह कभी नहीं मरता है” (यूहन्ना 11:25-26)। (© BSI) प्रभु यीशु ने ऐसा क्यों कहा कि बाइबल में कोई अनंत जीवन नहीं है? हमें क्या करना चाहिए जिससे कि हम अनंत जीवन का मार्ग पा सकें?

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Hindi Christian Movie “बाइबल और परमेश्वर” क्लिप – क्या बाइबल में परमेश्‍वर के सभी कार्य और वचन हैं?

Hindi Christian Movie “बाइबल और परमेश्वर” क्लिप – क्या बाइबल में परमेश्‍वर के सभी कार्य और वचन हैं?

संपूर्ण धार्मिक संसार विश्वास करता है कि परमेश्‍वर के सभी कार्य और वचन बाइबल में हैं, और बाइबल के अलावा, परमेश्वर ने कोई भी वचन नहीं कहा और कोई कार्य नहीं किया। इसलिए, जब आप बाइबल में श्रद्धा और विश्वास रखते हैं, तब यह सुनिश्चित है कि आप स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करने में सफल होंगे। क्या ये सभी विचार परमेश्वर के कार्यों के अनुसार हैं? क्या परमेश्वर ने बाइबल से अलग कुछ भी कहा है? वह कौन-सा मार्ग है जिसके माध्यम से मनुष्य स्वर्ग के राज्य में प्रवेश कर सकता है। क्या यह कार्य बाइबल के मार्ग का अनुसरण करना है, या मेमने के पदचिन्हों पर चलना है? यह क्लिप आपके समक्ष सभी उत्तरों को पेश करेगी!

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बाइबिल के उपदेश आपको बाइबल की गहराई में जाने और परमेश्वर की इच्छा को समझने में मदद करता हैI

मुश्किल समयों में आपकी आस्था मजबूत करने के लिए शक्ति के बारे में बाइबल के 10 पद

जब हम जीवन में कठिनाई और मुश्किलों का सामना करते हैं, तो कभी-कभी हम नकरात्मक और कमज़ोर हो जाते हैं और परमेश्वर में आस्था खो देते हैं। हालाँकि, हमें यह विश्वास होना चाहिए कि मनुष्य की शक्ति और आस्था परमेश्वर से आती है और अगर हम परमेश्वर पा भरोसा करते हैं, तो हमारे पास सभी कठिनाइयों और मुश्किलों का सामना करने की शक्ति होगी। शक्ति के बारे में बाइबल के ये 10 पद पढ़ें हमारी आस्था और ताकत को मजबूत कर सकते हैं और परमेश्वर के नज़दीक ले जा सकते हैं।

मुश्किल समयों में आपकी आस्था मजबूत करने

“परमेश्‍वर हमारा शरणस्थान और बल है, संकट में अति सहज से मिलनेवाला सहायक” (भजन संहिता 46:1)।

“परमेश्‍वर मेरा बल और भजन का विषय है; वह मेरा उद्धार ठहरा है” (भजन संहिता 118:14)।

“जो मुझे सामर्थ्य देता है उसमें मैं सब कुछ कर सकता हूँ” (फिलिप्पियों 4:13)।

“परमेश्‍वर मेरा उद्धार है, मैं भरोसा रखूँगा और न थरथराऊँगा; क्योंकि प्रभु यहोवा मेरा बल और मेरे भजन का विषय है, और वह मेरा उद्धारकर्ता हो गया है” (यशायाह 12:2)।

“हे यहोवा, हम लोगों पर अनुग्रह कर; हम तेरी ही बाट जोहते हैं। भोर को तू उनका भुजबल, संकट के समय हमारा उद्धारकर्ता ठहर” (यशायाह 33:2)।

“वह थके हुए को बल देता है और शक्तिहीन को बहुत सामर्थ्य देता है” (यशायाह 40:29)।

“परन्तु जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे नया बल प्राप्त करते जाएँगे, वे उकाबों के समान उड़ेंगे, वे दौड़ेंगे और श्रमित न होंगे, चलेंगे और थकित न होंगे” (यशायाह 40:31)।

“कि वह अपनी महिमा के धन के अनुसार तुम्हें यह दान दे कि तुम उसके आत्मा से अपने भीतरी मनुष्यत्व में सामर्थ्य पा कर बलवन्त होते जाओ” (इफिसियों 3:16)।

“इसलिए प्रभु में और उसकी शक्ति के प्रभाव में बलवन्त बनो” (इफिसियों 6:10)।

“जरुब्बाबेल के लिये यहोवा का यह वचन है: न तो बल से, और न शक्ति से, परन्तु मेरे आत्मा के द्वारा होगा, मुझ सेनाओं के यहोवा का यही वचन है” (जकर्याह 4:6)।

स्रोत: यीशु मसीह का अनुसरण करते हुए

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बाइबल वचन हिंदी में, इसमें प्रेम, आस्था, प्रार्थना, आशीष, विवाह इत्यादि संबंधी पद शामिल हैं। आवश्यकता अनुसार पदों की खोज में यह बहुत ही सुविधाजनक है

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