उद्धार क्या है?

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परमेश्वर का उद्धार मनुष्यों द्वारा आपस में एक-दूसरे को बचाने से अलग है; यह अमीरों द्वारा गरीबों को दी जाने वाली धन-सम्बन्धी राहत नहीं है, यह डॉक्टरों द्वारा रोगियों पर किया गया कार्य जैसे कि घायलों का इलाज और मरने वालों को बचाना नहीं है, और यह धर्मार्थ संगठनों या समाज-सेवी लोगों का कर्म नहीं है। परमेश्वर का उद्धार मनुष्य की पतित आत्माओं को बचाने के लिए तैयार किया जाता है और उसके उद्धार की संपूर्णता में सत्य, मार्ग और जीवन शामिल है। जब हम उद्धार प्राप्त कर लेते हैं, उसके बाद दर्द, आँसू या दुःख और नहीं रह जाते हैं, न ही हमारे परिवारों में, हमारे अध्ययन में, हमारे काम और हमारे जीवन में बेबसी की कोई भावना होती है। हमारा जीवन प्रकाश और खुशी से भर जाता है; हम अधिक उद्देश्य और अर्थ के साथ जीते हैं, और हम परमेश्वर के वादों और आशीषों के भीतर जीते हैं।

एक जीवनकाल में, परमेश्वर हमें बचने के लिए कई अवसर देता है, लेकिन अगर हम परमेश्वर का उद्धार प्राप्त करना चाहते हैं, तो हमें पहले परमेश्वर के उद्धार को जानना चाहिए, अन्यथा हम इसे प्राप्त करने का अवसर खो देंगे। कुछ लोग कहते हैं, “अगर हम इसे गवाँ देते हैं, तो क्या? यह कोई बड़ी बात नहीं है।” लेकिन हमें यह समझना चाहिए कि परमेश्वर के उद्धार को प्राप्त करने का मौका चूकना, एक अच्छा भोजन खाने का अवसर खोने जैसा, या ट्रेन छूट जाने जैसा नहीं है, यह अध्ययन या रोजगार के अवसर को खोने जैसा नहीं है। परमेश्वर का उद्धार पाने के अपने अवसर को खोना, एक जलती हुई इमारत में फंसने और अग्निशामक दल द्वारा समय रहते बचाया जाने के अपने अवसर को खो देने जैसा है। इसलिए, परमेश्वर का उद्धार प्राप्त करने के अपने मौके को खोना अविश्वसनीय रूप से अफसोसजनक और विलाप करने योग्य है। परमेश्वर के उद्धार को जानना और परमेश्वर के उद्धार को पाना बहुत महत्वपूर्ण है। चूँकि वे इतने महत्वपूर्ण हैं, इसलिए परमेश्वर के कार्य से अब हम धीरे-धीरे सीखेंगे कि परमेश्वर का उद्धार क्या है। “उद्धार क्या है?”पढ़ना जारी रखें

प्रभु यीशु द्वारा सब्त के दिन का पालन न किया जाना हमें क्या चेतावनी देता है?

एक दिन सबेरे-सबेरे, जब मैं अपने आध्यात्मिक भक्ति में लगी हुई थी, तो मैंने बाइबिल में लिखी इन बातों को देखा: “उस समय यीशु सब्त के दिन खेतों में से होकर जा रहा था, और उसके चेलों को भूख लगी तो वे बालें तोड़-तोड़कर खाने लगे। फरीसियों ने यह देखकर उससे कहा, “देख, तेरे चेले वह काम कर रहे हैं, जो सब्त के दिन करना उचित नहीं।” उसने उनसे कहा, …पर मैं तुम से कहता हूँ कि यहाँ वह है जो मन्दिर से भी बड़ा है। यदि तुम इसका अर्थ जानते, ‘मैं दया से प्रसन्न होता हूँ, बलिदान से नहीं,’ तो तुम निर्दोष को दोषी न ठहराते। मनुष्य का पुत्र तो सब्त के दिन का भी प्रभु है” (मत्ती 12:1-3, 6-8)। इस अंश को पढ़ने के बाद, मैं गहरी सोच में डूब गई: “व्यवस्था के युग में, यहोवा ने आम लोगों को सब्त रखने का निर्देश दिया था। सब्त के दिन, आम आदमी को सारे काम रोक देने होते थे; अगर वे उस दिन काम करना नहीं रोकते, तो वह एक पाप होता, और उनको इसका हिसाब देना पड़ता था। जब प्रभु यीशु अपना कार्य करने के लिए आये, तो उन्होंने सब्त का दिन नहीं रखा, बल्कि वे अपने शिष्यों को विभिन्न स्थानों में सुसमाचार का प्रचार और कार्य करने के लिए ले गये। ऐसा क्यों किया गया था? प्रभु यीशु द्वारा ऐसा करना हमें क्या चेतावनी देता है? मैंने काफ़ी समय तक इस पर विचार किया, लेकिन मैं फिर भी इसे समझ नहीं पाई।

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कई दिनों के बाद, मैंने सुना कि मेरी सहकर्मी सू उपदेश सुनने की एक यात्रा से लौटी थी, इसलिए मैं उससे मिलने उसके घर चली गई। उसने खुशी-खुशी वो सारी बातें मुझे बताई जो उपदेशों को सुनकर उसे समझ आई थीं। फिर उसने एक पुस्तक निकाली। उसने बताया कि इस पुस्तक ने ऐसे कई सत्यों और रहस्यों को उजागर किया था, जो पहले कभी नहीं सुनी गई थीं। उसने कहा कि उसने पुस्तक का काफ़ी हिस्सा पढ़ा था, और वह इसे जितना अधिक पढ़ती थी, उसके हृदय में उतना ही अधिक प्रकाश भरता जाता था। उसने कहा कि उसे ऐसे कई सत्य समझ में आ गये, जिन्हें उसने पहले नहीं समझा था। सहकर्मी सू की बातें सुनने के बाद, मैं पूरे दिल से परमेश्वर की तैयारियों का धन्यवाद करने लगी और मैं उसे यह बताने से खुद को नहीं रोक पाई कि पिछले कुछ दिनों से कौन सी बात ने मुझे उलझन में डाल रखा था। उसने मुस्कुराते हुए मुझसे कहा, “प्रभु का धन्यवाद। यह पुस्तक इस मुद्दे के बारे में बहुत स्पष्ट रूप से बताती है कि प्रभु यीशु ने सब्त के दिन कार्य क्यों किया था। आओ इसे साथ मिलकर देखते हैं।” यह कहते हुए उसने पुस्तक को खोला और मुझे इसका एक अंश पढ़ने के लिए दिया। मैंने पढ़ा: “जब प्रभु यीशु मसीह आया, तो उसने लोगों से संवाद करने के लिए अपने व्यावहारिक कार्यों का उपयोग कियाः परमेश्वर ने व्यवस्था के युग को अलविदा किया था और नए कार्य का प्रारम्भ किया था, और इस नए कार्य को सब्त का पालन करने की आवश्यकता नहीं थी; जब परमेश्वर सब्त के दिन की सीमाओं से बाहर आ गया, तो यह उसके नए कार्य का बस एक पूर्वानुभव था, और उसका सचमुच का महान कार्य लगातार जारी हो रहा था। जब प्रभु यीशु ने अपना कार्य प्रारम्भ किया, तो उसने पहले से ही व्यवस्था की जंज़ीरों को पीछे छोड़ दिया था, और उस युग के विधि-विधानों और सिद्धांतों को तोड़ दिया था। उसमें, व्यवस्था से जुड़ी किसी भी चीज़ का निशान नहीं था; उसने उसे पूर्णत: उतार कर फेंक दिया था तथा उसका अब और अनुसरण नहीं करता था, और उसने मनुष्यजाति से उसका अब और अनुसरण करने की अपेक्षा नहीं की थी। इसलिए तुम यहाँ देखते हो कि प्रभु यीशु सब्त के दिन अनाज के खेतों से होकर गुज़रा, प्रभु ने आराम नहीं किया, बल्कि बाहर काम करता रहा। उसका यह कार्य लोगों की धारणाओं के लिए एक आघात था और इसने उन्हें सूचित किया कि वह व्यवस्था के अधीन अब और जीवन नहीं बिताएगा, और यह कि उसने सब्त की सीमाओं को छोड़ दिया है और एक नई कार्यशैली के साथ वह मनुष्यजाति के सामने और उनके बीच एक नई छवि में प्रकट हुआ है। उसके इस कार्य ने लोगों को बताया कि वह अपने साथ एक नया कार्य लाया है जो व्यवस्था से बाहर जाने और सब्त से बाहर जाने से आरम्भ हुआ था। जब परमेश्वर ने अपना नया कार्य कार्यान्वित किया, तो वह अतीत से अब और नहीं चिपका रहा, और वह व्यवस्था के युग की विधियों के बारे में अब और चिन्तित नहीं था। न ही वह पूर्ववर्ती युग के अपने कार्य से प्रभावित था, बल्कि उसने सब्त के दिन में भी सामान्य रूप से कार्य किया और जब उसके चेले भूखे थे, तो वे अनाज की बालें तोड़कर खा सकते थे। यह सब कुछ परमेश्वर की निगाहों में बिल्कुल सामान्य था। परमेश्वर के पास अधिकांश कार्य के लिए जिसे वह करना चाहता है और अधिकांश चीज़ों के लिए जो वह कहना चाहता है एक नई शुरूआत हो सकती है। एक बार जब उसने एक नई शुरूआत कर दी, तो वह न तो फिर से अपने पिछले कार्य का उल्लेख करता है और न ही उसे जारी रखता है। क्योंकि परमेश्वर के पास उसके कार्य के स्वयं के सिद्धांत हैं। जब वह नया कार्य शुरू करना चाहता है, तो यह तब होता है जब वह मनुष्यजाति को अपने कार्य के एक नए स्तर में पहुँचाना चाहता है, और जब उसका कार्य एक उच्चतर चरण में प्रवेश कर लेता है। यदि लोग लगातार पुरानी कहावतों या विधि-विधानों के अनुसार काम करते रहेंगे या उन्हें निरन्तर मज़बूती से पकड़ें रहेंगे, तो वह इसका उत्सव नहीं मनाएगा और इसकी प्रशंसा नहीं करेगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि वह पहले से ही एक नए कार्य को ला चुका है, और अपने कार्य में एक नए चरण में प्रवेश कर चुका है। जब वह एक नए कार्य को आरम्भ करता है, तो वह मनुष्यजाति के सामने पूर्णतः नई छवि में, पूर्णतः नए कोण से, और पूर्णतः नए तरीके से प्रकट होता है ताकि लोग उसके स्वभाव के भिन्न-भिन्न पहलुओं को और उसके स्वरूप को देख सकें। यह उसके नए कार्य में उसके लक्ष्यों में से एक है। परमेश्वर पुराने को थामे नहीं रहता है या घिसे-पिटे मार्ग को नहीं लेता है; जब वह कार्य करता और बोलता है तो यह उतना निषेधात्मक नहीं होता है जितना लोग कल्पना करते हैं। परमेश्वर में, सभी स्वतंत्र और मुक्त हैं, और कोई निषेधात्मकता नहीं है, कोई लाचारी नहीं है—जो वह मनुष्यजाति के लिए लाता है वह सम्पूर्ण आज़ादी और मुक्ति है। वह एक जीवित परमेश्वर है, एक ऐसा परमेश्वर जो असलियत में, और सचमुच में अस्तित्व में है। वह कोई कठपुतली या मिट्टी की मूर्ति नहीं है, और वह उन मूर्तियों से बिल्कुल भिन्न है जिन्हें लोग प्रतिष्ठापित करते हैं और जिनकी आराधना करते हैं। वह जीवित और जीवन्त है और उसके कार्य और वचन मनुष्यों के लिए जो लेकर आते हैं वे हैं सम्पूर्ण जीवन और ज्योति, सम्पूर्ण स्वतन्त्रता और मुक्ति, क्योंकि वह सत्य, जीवन, और मार्ग को धारण करता है—और वह अपने किसी भी कार्य में किसी भी चीज़ के द्वारा विवश नहीं होता है। … इस प्रकार, प्रभु यीशु मसीह खुलकर बाहर जा सकता था और सब्त के दिन कार्य कर सकता था क्योंकि उसके हृदय में कोई नियम नहीं थे, और वहाँ मानव जाति से उत्पन्न कोई ज्ञान और सिद्धांत नहीं था। जो उसके पास था वह परमेश्वर का नया कार्य और उस का मार्ग था, और उस का कार्य मानव जाति को स्वतन्त्र करना था, उसे मुक्त करना था, उन्हें ज्योति में बने रहने की अनुमति देना था, और उन्हें जीने की अनुमति देना था। “प्रभु यीशु द्वारा सब्त के दिन का पालन न किया जाना हमें क्या चेतावनी देता है?”पढ़ना जारी रखें

The True Meaning of Faith in God | Hindi Gospel Movie | “परमेश्वर में आस्था” (Hindi Dubbed)

यू कोंगुआंग सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की कलीसिया के साथ सुसमाचार को फैलाता है, और चीनी पुलिस की गिरफ्तारी से बचने की कोशिश करते हुए उसे स्थानीय गृह-कलीसिया के एक सहकर्मी, झेंग ज़ुन द्वारा बचाया जाता है। उसके बाद वह झेंग ज़ुन और अन्‍य लोगों के साथ, परमेश्‍वर में आस्‍था क्या होती है, परमेश्‍वर की स्‍वीकृति प्राप्‍त करने हेतु कैसे विश्‍वास करना चाहिए, और सत्‍य के अन्‍य पहलुओं पर, कई बार संगति करता है। अंत में, ये सत्‍य झेंग ज़ुन और दूसरों की लंबे समय से चले आ रही भ्रांतियों और कठिनाइयों का समाधान करते हैं, और उन्हें “परमेश्‍वर में आस्था” के सही अर्थ को समझने देते हैं और उनके हृदयों को मुक्‍त कर देते हैं।

स्रोत: यीशु मसीह का अनुसरण करते हुए

परमेश्वर के वचनों को पढ़ें, और आपको परमेश्वर में विश्वास का सच्चा अर्थ मिल जाएगा।

और पढ़ेंI आप प्रभु यीशु मसीह के कार्य में उसके ईमानदार प्रयोजन को बेहतर तरीके से समझ पायेंगेI

 

 

Hindi Christian Testimony Video | परमेश्‍वर के आशीष | The Wonderful Salvation of God in Disasters

लोग अक्सर कहते हैं कि “तूफान बिना चेतावनी के आते हैं और दुर्भाग्य रातों-रात मनुष्य को तबाह कर देता है।” हमारे वर्तमान युग में जब विज्ञान, आधुनिक परिवहन और भौतिक सम्पत्ति का तेजी से विस्तार कर रहा है, हमारे चारों ओर हो रही आपदाएं भी दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं। जब हम समाचार पत्र को खोलते हैं या टीवी को चालू करते हैं, तो मुख्यतौर पर हमें: युद्ध, भूकंप, सुनामी, तूफान, आग, बाढ़, हवाई दुर्घटना, खदान दुर्घटनाएं, सामाजिक अशांति, हिंसक संघर्ष, आतंकवादी हमले आदि देखने को मिलते हैं। हम प्राकृतिक प्रकोप और मानव-निर्मित आपदाओं को देखते हैं। ये आपदाएं अक्सर होती रहती हैं और तेजी से तीव्र होती जा रही हैं। आपदा के यह हमले अपने साथ, पीड़ा, रक्त, अपंगता और मौत लेकर आते हैं। जीवन की अल्‍पता और दुर्बलता पर जोर देते हुए, दुर्भाग्य हर समय हमारे आसपास घटित होते रहते हैं। भविष्य में हमें किस तरह की आपदाओं का सामना करना पड़ेगा, इसका अनुमान लगाने का कोई तरीका नहीं है। इसके अलावा, हम यह भी नहीं जानते कि हमें किस प्रकार की कार्रवाई करनी चाहिए। मानवता के सदस्य के रूप में, इन आपदाओं से मुक्त होने के लिए हमें क्या करना चाहिए? इस कार्यक्रम में, आपको उत्तर मिल जायेगा। आपको परमेश्वर का बचाव प्राप्त करने का एकमात्र मार्ग मिल जायेगा जिससे कि आप आसन्‍न आपदाओं से बच सकें।

स्रोत: यीशु मसीह का अनुसरण करते हुए

परमेश्वर की स्तुति पाने के लिए प्रार्थना कैसे करनी है, ये जानने के लिए अभी पढें।

परमेश्वर का वचन खण्ड, आपके साथ परमेश्वर के नवीनतम कथनों को साझा करता है और परमेश्वर को बेहतर तरीके से जानने में ईसाइयों की मदद करता हैI

 

“बच्चे, घर लौट आओ” क्लिप 1 – युवा गेमिंग व्यसनियों से उनका व्यसन छुड़ाने का एक तरीका है

आधुनिक समाज में ऐसे कई नौजवान हैं जो ऑनलाइन गेमिंग से सम्मोहित हैं और उससे ख़ुद को मुक्त नहीं करा पा रहे हैं। इससे उनकी सेहत और पढ़ाई दोनों पर बहुत गंभीर असर पड़ता है। अपने बच्चो से इंटरनेट छुड़ाने के लिए माता-पिता चाहे कोई भी उपाय क्यों न करें, इसका कोई फायदा नहीं होता है, और बच्चों से उनका गेम खेलने का व्यसन कैसे छुड़ाया जाए यह कई परिवारों के लिए सबसे बड़ा सरदर्द बन गया है। यह मूवी क्लिप, युवा गेमिंग व्यसनियों से उनका व्यसन छुड़ाने का एक तरीका है, में हमारे लिए इस विषय पर रोशनी डाली जाएगी।

स्रोत: यीशु मसीह का अनुसरण करते हुए

परमेश्वर के वचनों को पढ़ें और आप जीवन में उचित लक्ष्य पा सकेंगे।

यह वेबसाइट, “यीशु मसीह का अनुसरण करते हुए” में यीशु मसीह को जानना, स्वर्ग के राज्य का रहस्य, प्रभु की वापसी, प्रार्थना, विवाह और परिवार जैसे खंड शामिल हैं जो आपकी आस्था की राह में आने वाली उलझनों में आपकी सहायता करते हैंI

 

 

परमेश्‍वर का नाम क्‍यों बदला? क्‍या यीशु जब वापिस लौटेंगे तब भी उनका नाम यीशु ही रहेगा?

यहोवा परमेश्वर ने पुराने नियम में हमें स्पष्ट रूप से बताया है: “मैं ही यहोवा हूँ और मुझे छोड़ कोई उद्धारकर्ता नहीं” (यशायाह 43:11)। “यहोवा … सदा तक मेरा नाम यही रहेगा, और पीढ़ी पीढ़ी में मेरा स्मरण इसी से हुआ करेगा” (निर्गमन 3:15)। और फिर नये नियम में लिखा है: “किसी दूसरे के द्वारा उद्धार नहीं; क्योंकि स्वर्ग के नीचे मनुष्यों में और कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया, जिसके द्वारा हम उद्धार पा सकें” (प्रेरितों 4:12)। “यीशु मसीह कल और आज और युगानुयुग एक–सा है” (इब्रानियों 13:8)। पुराने नियम में यह कहा जाता है कि केवल यहोवा ही परमेश्वर का नाम है और वह सदा के लिए ऐसा ही रहेगाI हालांकि, नये नियम में यह कहा जाता है कि किसी को भी केवल यीशु के नाम से ही बचाया जा सकता हैI चूँकि व्यवस्था के युग में परमेश्वर का नाम हमेशा के लिए यहोवा रहना था, तो अनुग्रह के युग में परमेश्वर को यीशु क्यों कहा गया? हम बाइबल में उल्लिखित शब्द “युगानुयुग” को कैसे समझ सकते हैं? परमेश्वर के नामों के पीछे कौन से सत्य और रहस्य छिपे हैं? चलिए, अब हम इस बारे में संगति करते हैंI

परमेश्वर का नाम,प्रभु यीशु को जानें

यहोवा नाम यीशु क्यों बन गया?

बाइबल में यह स्पष्ट रूप से दर्ज़ है कि यहोवा का नाम हमेशा के लिए और पीढ़ी दर पीढ़ी रहेगाI लेकिन जब प्रभु यीशु अपना छुटकारे का कार्य करने के लिए आया, तो यहोवा नाम का उससे आगे उल्लेख नहीं किया गयाI सभी ने प्रभु यीशु के नाम से प्रार्थना की और उसे पुकारा, और उन्होंने यीशु का नाम पवित्र कियाI हमें ऐसा लगता है जैसे बाइबल के इन विभिन्न हिस्सों के बीच विरोधाभास है, लेकिन वास्तव में कोई विरोधाभास नहीं हैI ऐसा इसलिए है क्योंकि परमेश्वर द्वारा बोले गए “पीढ़ी पीढ़ी में” और “युगानुयुग” शब्द, उस युग से सम्बन्धित कार्य के लिए बोले गए थेI जब तक उस विशेष युग में परमेश्वर का कार्य पूर्ण नहीं हुआ, तब तक उस युग में उसका नाम नहीं बदलेगा, और परमेश्वर का अनुसरण करने वाले सभी लोगों को परमेश्वर के उस युग के नाम को थामे रखना थाI केवल इसी तरह वे पवित्र आत्मा का कार्य प्राप्त कर सकते थे और परमेश्वर की देखरेख और सुरक्षा में जीवन जी सकते थेI लेकिन जब परमेश्वर ने नया युग प्रारम्भ किया और नये कार्य की शुरुआत की, परमेश्वर का नाम भी इसके साथ ही बदल गयाI जब यह हुआ, तो केवल परमेश्वर के नये नाम को स्वीकार करने और उसके नये नाम से प्रार्थना करने से ही लोग परमेश्वर की स्वीकृति और पवित्र आत्मा का कार्य प्राप्त कर सकते थेI उदाहरण के लिए, व्यवस्था के युग में, परमेश्वर का नाम यहोवा था और यहोवा का नाम धारण करके और उसके द्वारा घोषित नियमों और आज्ञाओं पर टिके रहकर, लोग परमेश्वर का आशीर्वाद और दया प्राप्त कर सकते थेI हालांकि, जब प्रभु यीशु अपना कार्य करने के लिए आया, उसने अनुग्रह के युग की शुरुआत और व्यवस्था के युग का अंत किया, अगर लोग फिर भी यहोवा के नाम को धारण किये रहते और प्रभु यीशु के नाम को स्वीकार नहीं करते, तो उन्हें पवित्र आत्मा द्वारा नापसंद और अस्वीकार कर दिया जाता, और वे अन्धकार में जीवन जीतेI जिन लोगों ने यीशु को अपने उद्धारकर्ता के रूप में स्वीकारा और यीशु के नाम से प्रार्थना की और उसे पुकारा, जैसे कि पतरस, मत्ती और सामरी स्त्री, उन्होंने पवित्र आत्मा का कार्य और प्रभु का उद्धार प्राप्त कियाI जाहिर है, परमेश्वर का नाम अपरिवर्तनीय नहीं है, बल्कि यह परमेश्वर के कार्य में परिवर्तन के साथ परिवर्तित होता हैI “परमेश्‍वर का नाम क्‍यों बदला? क्‍या यीशु जब वापिस लौटेंगे तब भी उनका नाम यीशु ही रहेगा?”पढ़ना जारी रखें

क्या मसीह वास्तव में परमेश्वर का पुत्र है या वह खुद ही परमेश्वर है?

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बाइबल के अभिलेखों के अनुसार, पवित्र आत्मा ने यह गवाही दी थी कि प्रभु यीशु परमेश्वर के प्रिय पुत्र हैं, और प्रभु यीशु ने भी स्वर्ग के परमेश्वर को “पिता” कहा। इसलिए, बहुत से लोग मानते हैं कि प्रभु यीशु मसीह परमेश्वर के पुत्र हैं, साथ ही स्वर्ग में पिता परमेश्वर भी हैं। फिर भी प्रभु यीशु ने कहा है: “जिसने मुझे देखा है उसने पिता को देखा है।…मैं पिता में हूँ और पिता मुझ में है” (यूहन्ना 14:9-10)। “मैं और पिता एक हैं” (यूहन्ना 10:30)। तो, प्रभु यीशु परमेश्वर के पुत्र हैं, या स्वयं परमेश्वर? जवाब जानने के लिए अभी पढें।

संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
“फिलिप्पुस ने उससे कहा, ‘हे प्रभु, पिता को हमें दिखा दे, यही हमारे लिये बहुत है।’ यीशु ने उससे कहा, ‘हे फिलिप्पुस, मैं इतने दिन से तुम्हारे साथ हूँ, और क्या तू मुझे नहीं जानता? जिसने मुझे देखा है उसने पिता को देखा है। तू क्यों कहता है कि पिता को हमें दिखा? क्या तू विश्‍वास नहीं करता कि मैं पिता में हूँ और पिता मुझ में है? ये बातें जो मैं तुम से कहता हूँ, अपनी ओर से नहीं कहता, परन्तु पिता मुझ में रहकर अपने काम करता है। मेरा विश्‍वास करो कि मैं पिता में हूँ और पिता मुझ में है; नहीं तो कामों ही के कारण मेरा विश्‍वास करो‘” (यूहन्ना 14:8-11) “क्या मसीह वास्तव में परमेश्वर का पुत्र है या वह खुद ही परमेश्वर है?”पढ़ना जारी रखें

परमेश्वर का नाम क्यों बदलता है?

पुराने व्यवस्थान में लिखा है, “मैं ही यहोवा हूँ और मुझे छोड़ कोई उद्धारकर्ता नहीं” (यशायाह 43:11)। “यहोवा … सदा तक मेरा नाम यही रहेगा, और पीढ़ी पीढ़ी में मेरा स्मरण इसी से हुआ करेगा” (निर्गमन 3:15)। पवित्रशास्त्र में यह स्पष्ट रूप से बताया गया है कि यहोवा का नाम हमेशा के लिए है, और फिर भी नया नियम यह कहता है कि परमेश्वर का नाम बदलकर यीशु हो गया है, जैसा कि लिखा है, “यीशु मसीह कल और आज और युगानुयुग एक–सा है” (इब्रानियों 13:8)। परमेश्वर का नाम क्यों बदलता है? इसके पीछे क्या रहस्य है?

परमेश्वर का नाम

मैंने एक किताब में इसका उत्तर पाया है। किताब में लिखा है: ““यहोवा” वह नाम है जिसे मैंने इस्राएल में अपने कार्य के दौरान अपनाया था, और इसका अर्थ है इस्राएलियों (परमेश्वर के चुने हुए लोग) का परमेश्वर जो मनुष्य पर दया कर सकता है, मनुष्य को शाप दे सकता है, और मनुष्य के जीवन को मार्गदर्शन दे सकता है। इसका अर्थ है वह परमेश्वर जिसके पास बड़ी सामर्थ्य है और जो बुद्धि से भरपूर है। “यीशु” इम्मानुएल है, और इसका मतलब है वह पाप बलि जो प्रेम से परिपूर्ण है, करुणा से भरपूर है, और मनुष्य को छुटकारा देता है। उसने अनुग्रह के युग का कार्य किया, और वह अनुग्रह के युग का प्रतिनिधित्व करता है, और वह प्रबन्धन योजना के केवल एक भाग का ही प्रतिनिधित्व कर सकता है। अर्थात्, केवल यहोवा ही इस्राएल के चुने हुए लोगों का परमेश्वर, इब्राहीम का परमेश्वर, इसहाक का परमेश्वर, याकूब का परमेश्वर, मूसा का परमेश्वर, और इस्राएल के सभी लोगों का परमेश्वर है। और इसलिए वर्तमान युग में, यहूदा के कुटुम्ब के अलावा सभी इस्राएली यहोवा की आराधना करते हैं। वे वेदी पर उसके लिए बलिदान करते हैं, और याजकीय लबादे पहनकर मन्दिर में उसकी सेवा करते हैं। वे यहोवा के पुनः प्रकट होने की आशा करते हैं। केवल यीशु ही मानवजाति को छुटकारा दिलाने वाला है। यीशु वह पाप बलि है जिसने मानवजाति को पाप से छुटकारा दिलाया है। जिसका अर्थ है, कि यीशु का नाम अनुग्रह के युग से आया, और अनुग्रह के युग में छुटकारे के कार्य के कारण विद्यमान रहा। अनुग्रह के युग के लोगों के पुनर्जीवित किए जाने और बचाए जाने की ख़ातिर यीशु का नाम विद्यमान था, और यीशु का नाम पूरी मानवजाति के उद्धार के लिए एक विशेष नाम है। और इस प्रकार यीशु का नाम छुटकारे के कार्य को दर्शाता है, और अनुग्रह के युग का द्योतक है। यहोवा का नाम इस्राएल के लोगों के लिए एक विशेष नाम है जो व्यवस्था के अधीन जिए थे। प्रत्येक युग में और कार्य के प्रत्येक चरण में, मेरा नाम आधारहीन नहीं है, किन्तु प्रतिनिधिक महत्व रखता हैः प्रत्येक नाम एक युग का प्रतिनिधित्व करता है। “यहोवा” व्यवस्था के युग का प्रतिनिधित्व करता है, और यह उस परमेश्वर के लिए सम्मानसूचक है जिसकी आराधना इस्राएल के लोगों के द्वारा की जाती है। “यीशु” अनुग्रह के युग का प्रतिनिधित्व करता है, और यह उन सबके परमेश्वर का नाम है जिन्हें अनुग्रह के युग के दौरान छुटकारा दिया गया था” (उद्धारकर्त्ता पहले ही एक “सफेद बादल” पर सवार होकर वापस आ चुका है)। “परमेश्वर का नाम क्यों बदलता है?”पढ़ना जारी रखें

The Second Coming of Jesus | Hindi Best Christian Movie “द्वार पर दस्तक”

दो हज़ार साल पहले, प्रभु यीशु ने भविष्‍यवाणी की थी, “आधी रात को धूम मची: ‘देखो, दूल्हा आ रहा है! उससे भेंट करने के लिये चलो’” (मत्ती 25:6)। “देख, मैं द्वार पर खड़ा हुआ खटखटाता हूँ; यदि कोई मेरा शब्द सुनकर द्वार खोलेगा, तो मैं उसके पास भीतर आकर उसके साथ भोजन करूँगा और वह मेरे साथ” (प्रकाशितवाक्य 3:20)। (© BSI) दो हज़ार वर्षों से, प्रभु के विश्‍वासी चौकन्‍ने रहकर द्वार पर प्रभु की दस्तक की प्रतीक्षा कर रहे हैं, तो प्रभु जब लौटेगा तब वह किस तरह मनुष्‍यजाति के द्वार पर दस्तक देगा? अंत के दिनों में, कुछ लोगों ने यह गवाही दी है कि प्रभु यीशु लौट आया है—देहधारी सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर—और वह अंत के दिनों में न्‍याय का कार्य कर रहा है। इस समाचार ने पूरे धार्मिक जगत को कंपित कर दिया है। इस फिल्‍म की नायिका, यांग आइगुआंग, दशकों से प्रभु में विश्‍वास करते हुए, कार्य और धर्मोपदेश में हमेशा उत्साहपूर्वक शामिल रह कर प्रभु के लौटने के स्‍वागत की प्रतीक्षा करती रही हैं। एक दिन, दो लोग आते हैं, उसके दरवाज़े पर दस्‍तक देते हैं, यांग आइगुआंग और उसके पति को कहते हैं कि प्रभु यीशु लौट आया है, उनके साथ सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर के वचनों को साझा करते हैं। सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर के वचनों से वे गहराई तक प्रेरित हो जाते हैं, लेकिन क्योंकि यांग आइगुआँग पादरियों और एल्‍डरों की भ्रांतियों, धोखों और बाध्‍यताओं के अधीन रह चुकी है, इसलिए वह सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की कलीसिया के गवाहों को घर से बाहर निकाल देती हैं। उसके बाद, वे साक्षी लोग कई बार उनके द्वार को खटखटाते हैं और अंत के दिनों के परमेश्‍वर के कार्य की गवाही देते हुए यांग आइगुआँग को सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर के वचन पढ़ कर सुनाते हैं। इस दौरान, पादरी लोग, बार-बार यांग आइगुआंग को व्‍यवधान पैदा कर रोकते हैं, और वह डगमगाती रहती हैं। हालाँकि, सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर के वचनों को सुनने के माध्‍यम से, यांग आइगुआंग सत्‍य को समझने लगती है और पादरियों तथा एल्‍डर्स द्वारा फैलाई गई अफवाहों और भ्रांतियों के बारे में उसे विवेक प्राप्त हो जाता है। अंतत: वह समझ जाती हैं कि अंत के दिनों में अपनी वापसी के समय प्रभु लोगों के द्वारों पर किस तरह से दस्‍तक देता है, और हमें कैसे उनका स्‍वागत करना चाहिए। धुंध के छँटने पर, यांग आइगुआंग आख़िरकार परमेश्‍वर की आवाज को सुनती है और यह स्‍वीकार करती है कि सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर ही सचमुच प्रभु यीशु की वापसी है!

स्रोत: यीशु मसीह का अनुसरण करते हुए

यीशु मसीह का दूसरा आगमन खंड यीशु मसीह की वापसी के स्वागत में आपकी सहायता करते हैंI

बाइबल अध्ययन खण्ड, बाइबल के पदों के बारे में ईसाइयों की शुद्ध समझ को आपके साथ साझा करता है, यह आपको बाइबल की गहराई में जाने और परमेश्वर की इच्छा को समझने में मदद करता हैI

Hindi Christian Movie | ईमान से समझौता नहीं | Christian Testimony in the Workplace (Hindi Dubbed)

वांग शिनयू और उसके पति की कपड़े की एक दुकान है। हालाँकि आरंभ में वे पूरी सच्चाई और ईमानदारी से अपना स्टोर चलाते हैं। लेकिन अधिक धन नहीं कमा पाते और बड़ी मुश्किल से गुज़र-बसर कर पाते हैं। लेकिन जब वे अपने साथियों को झूठ और फ़रेब से कारोबार करके गाड़ियाँ और घर ख़रीदते, ऐशो-आराम की ज़िंदगी जीते देखते हैं, तो वे निर्णय करते हैं कि अब वे भी पीछे नहीं रहेंगे, और अपने साथियों की राह पर ही चलते हुए, वे झूठ और फ़रेब से कारोबार करने लगते हैं। कुछ सालों बाद, हालाँकि उन्होंने पैसा कमा लिया, उनकी अंतरात्मा उन्हें कचोटती है, उन्हें अपने दिल में एक ख़ालीपन का एहसास होता है। तब वे सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अंत के दिनों के सुसमाचार को स्वीकार कर लेते हैं, परमेश्वर के वचन पढ़ते हैं। इससे उन्हें पता चलता है कि परमेश्वर को ईमानदार लोग पसंद हैं और वह कपटी लोगों से घृणा करता है। उन्हें समझ में आ जाता है कि ईमानदार लोगों को परमेश्वर की आशीष मिलती है। लेकिन, वे जगत में बुराई और अंधेरा भी देखते हैं और इस बात से चिंतित हो जाते हैं कि ईमानदारी से कारोबार करके वे धन नहीं कमा सकेंगे, बल्कि पैसा गँवाने का जोखिम बना रहेगा। इस तरह वे झूठ और कपट के सहारे ग्राहकों को धोखा देते रहते हैं। वे यह भी जानते हैं कि परमेश्वर इसी वजह से उनसे घृणा करता है… तमाम संघर्षों और नाकामियों के बाद, आख़िरकार वे परमेश्वर के वचनों के अनुसार, ईमानदार इंसान बनने का संकल्प लेते हैं। जब उन्हें परमेश्वर की आशीष मिलती है तो वे आश्चर्यचकित हो जाते हैं। उनका कारोबार तो फलता-फूलता ही है, उन्हें ईमानदार इंसान बनने का सुख और सुरक्षा भी प्राप्त होती है।

स्रोत: यीशु मसीह का अनुसरण करते हुए

यह वेबसाइट, “यीशु मसीह का अनुसरण करते हुए” में यीशु मसीह को जानना, स्वर्ग के राज्य का रहस्य, प्रभु की वापसी, प्रार्थना, विवाह और परिवार जैसे खंड शामिल हैं जो आपकी आस्था की राह में आने वाली उलझनों में आपकी सहायता करते हैंI

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