मत्ती 4

1तब उस समय पवित्र आत्मा यीशु को एकांत में ले गया ताकि शैतान से उसकी परीक्षा हो।*

2वह चालीस दिन, और चालीस रात, निराहार रहा, तब उसे भूख लगी। (निर्ग. 34:28)

यीशु की कहानी|प्रभु यीशु

1तब उस समय पवित्र आत्मा यीशु को एकांत में ले गया ताकि शैतान से उसकी परीक्षा हो।*

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2020 Hindi Christian Testimony Video | मुझे स्वर्ग के राज्य में प्रवेश का मार्ग मिल गया है

मुख्य किरदार ने बचपन से ही ईसाई आस्था में अपने माता-पिता का अनुसरण किया था और शादी के बाद वह अपने पति के साथ कलीसिया में काम करने लगी थी।

मसीह के वचन | “संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन : अध्याय 26 | अंश 63

राज्य में, सृष्टि की असंख्य चीज़ें पुनः जीवित होना और अपनी जीवन शक्ति फिर से प्राप्त करना आरम्भ करती हैं।

Hindi Christian Song With Lyrics | सच्ची प्रार्थना का प्रभाव

ईमानदारी से चलो,
और प्रार्थना करो कि तुम अपने दिल में बैठे, गहरे छल से छुटकारा पाओगे।

ख़ामोशी से आता है हमारे मध्य परमेश्वर | Hindi Christian Songs With Lyrics

मौन है परमेश्वर, सामने हमारे कभी प्रकट हुआ नहीं,
फिर भी कार्य उसका कभी रुका नहीं।

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Hindi Christian Testimony Video | मौत के मुंह से बच निकलना

मुख्यभूमि चीन में, सीसीपी द्वारा कई हज़ार ईसाइयों को गिरफ़्तार कर उत्पीड़ित किया जाता है और उन्हें भयावह बर्बर यातनाओं से गुज़रना पड़ता है।

आस्था प्रश्न व उत्तर

धार्मिक दुनिया के कई विश्वासी ऐसा सोचते हैं कि “बाइबल में विश्वास करना यानी प्रभु में विश्वास करना; बाइबल रखना यानी प्रभु में विश्वास करना है।” क्या यह नजरिया प्रभु के वचनों के अनुसार है?

बाइबल में, पौलुस ने कहा था “सम्पूर्ण पवित्रशास्त्र परमेश्‍वर की प्रेरणा से रचा गया है” (2 तीमुथियुस 3:16), पौलुस के वचन बाइबल में हैं। इसीलिए, वे परमेश्‍वर द्वारा प्रेरित थे; वे परमेश्‍वर के वचन हैं। प्रभु में विश्वास करना बाइबल में विश्वास करना है। चाहे कोई भी विचारधारा क्‍यों न हो, यदि वह बाइबल से भटकती है, तो वह विधर्म है! हम प्रभु में विश्वास करते हैं, इसीलिए हमें सदा बाइबल के अनुसार कार्य करना चाहिए, अर्थात्, हमें बाइबल के वचनों का पालन करना चाहिए। बाइबल ईसाई धर्म का मूलभूत सिद्धांत है, हमारे विश्वास की नींव है। बाइबल को त्‍यागना प्रभु में अविश्‍वास करने के समान है; यदि हम बाइबल को त्‍याग देते हैं, तो हम प्रभु में कैसे विश्वास कर सकते हैं? बाइबल में प्रभु के वचन लिखे हैं। क्या कहीं और भी ऐसी जगह है जहां हम उनके वचनों को पा सकते हैं? यदि प्रभु में हमारा विश्वास बाइबल पर आधारित नहीं है, तो इसका आधार क्या है?

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परमेश्वर के दैनिक वचन | “छुटकारे के युग में कार्य के पीछे की सच्ची कहानी” | अंश 1

मेरी सम्पूर्ण प्रबन्धन योजना, ऐसी योजना जो छः हज़ार सालों तक फैली हुई है, तीन चरणों या तीन युगों को शामिल करती हैः आरंभ में व्यवस्था का युग; अनुग्रह का युग (जो छुटकारे का युग भी है); और अंत के दिनों में राज्य का युग।

आज का वचन | “मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक अद्भुत मंज़िल पर ले जाना” | अंश 588

मनुष्य आज के कार्य एवं भविष्य के कार्य के विषय में थोड़ा बहुत ही जानता है, परन्तु वह उस मंज़िल को नहीं समझता जिसमें मानवजाति प्रवेश करेगी।

आज का वचन | “मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक अद्भुत मंज़िल पर ले जाना” | अंश 588

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सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन “परमेश्वर के प्रकटन ने एक नए युग का सूत्रपात किया है”

परमेश्वर की छह-हज़ार-वर्षीय प्रबंधन योजना समाप्त हो रही है, और राज्य का द्वार उन सभी लोगों के लिए पहले से ही खोल दिया गया है जो उसके प्रकटन को चाहते हैं।

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