परमेश्वर के प्रासंगिक वचन
“जब पवित्र आत्मा कार्य करता है, तो लोग सक्रिय रूप से प्रवेश कर सकते हैं; वे निष्क्रिय नहीं होते और उन्हें बाध्य भी नहीं किया जाता, बल्कि वे सक्रिय रहते हैं। जब पवित्र आत्मा कार्य करता है तो लोग प्रसन्न और इच्छापूर्ण होते हैं, और वे आज्ञा मानने के लिए तैयार होते हैं, और स्वयं को दीन करने में प्रसन्न होते हैं, और यद्यपि भीतर से पीड़ित और दुर्बल होते हैं, फिर भी उनमें सहयोग करने का दृढ़ निश्चय होता है, वे ख़ुशी-ख़ुशी दुःख सह लेते हैं, वे आज्ञा मान सकते हैं, और वे मानवीय इच्छा से निष्कलंक रहते हैं, मनुष्य की विचारधारा से निष्कलंक रहते हैं, और निश्चित रूप से मानवीय अभिलाषाओं और अभिप्रेरणाओं से निष्कलंक रहते हैं। जब लोग पवित्र आत्मा के कार्य का अनुभव करते हैं, तो वे भीतर से विशेष रूप से पवित्र हो जाते हैं। जो पवित्र आत्मा के कार्य को अपने अंदर रखते हैं वे परमेश्वर के प्रेम को और अपने भाइयों और बहनों के प्रेम को अपने जीवनों से दर्शाते हैं, और ऐसी बातों में आनंदित होते हैं जो परमेश्वर को आनंदित करती हैं, और उन बातों से घृणा करते हैं जिनसे परमेश्वर घृणा करता है। ऐसे लोग जो पवित्र आत्मा के कार्य के द्वारा स्पर्श किए जाते हैं, उनमें सामान्य मनुष्यत्व होता है, और वे मनुष्यत्व को रखते हैं और निरंतर सत्य का अनुसरण करते हैं। जब पवित्र आत्मा लोगों के भीतर कार्य करता है, तो उनकी परिस्थितियाँ और अधिक बेहतर हो जाती हैं और उनका मनुष्यत्व और अधिक सामान्य हो जाता है, और यद्यपि उनका कुछ सहयोग मूर्खतापूर्ण हो सकता है, परंतु फिर भी उनकी प्रेरणाएँ सही होती हैं, उनका प्रवेश सकारात्मक होता है, वे रूकावट बनने का प्रयास नहीं करते और उनमें कुछ भी दुर्भाव नहीं होता। … यदि अपने दिन-प्रतिदिन के जीवन में लोग सकारात्मक अवस्था में हों और उनके पास एक सामान्य आत्मिक जीवन हो, तो उनमें पवित्र आत्मा के कार्य पाए जाते हैं। ऐसी अवस्था में, जब वे परमेश्वर के वचनों को खाते और पीते हैं तो उनमें विश्वास आता है, जब वे प्रार्थना करते हैं, तो वे प्रेरित होते हैं, जब उनके साथ कुछ घटित होता है तो वे निष्क्रिय नहीं होते, और उनके साथ कुछ घटित होते समय वे उन सबकों या सीखों को देख सकते हैं जो परमेश्वर चाहता है कि वे सीखें, और वे निष्क्रिय, या कमजोर नहीं होते, और यद्यपि उनके जीवन में वास्तविक कठिनाइयाँ होती हैं, फिर भी वे परमेश्वर के सभी प्रबंधनों की आज्ञा मानने के लिए तैयार रहते हैं।”

“जब पवित्र आत्मा लोगों के प्रबोधन के लिए कार्य करता है, तो वह आम तौर पर उन्हें परमेश्वर के कार्य का ज्ञान देता है, और उनकी सच्ची प्रविष्टि और सच्ची अवस्था का ज्ञान देता है, और वह उन्हें संकल्प भी देता है, उन्हें परमेश्वर के उत्सुक इरादे और उसकी मनुष्य से वर्तमान अपेक्षाओं के बारे में समझने देता है, वह उन्हें हर तरह से खुलने का संकल्प देता है। यहाँ तक कि जब लोग रक्तपात और बलिदान से गुजरते हैं, उन्हें फिर भी परमेश्वर के लिए कार्य करना चाहिए, और जब वे उत्पीड़न और प्रतिकूल परिस्थितियों से मिलें, तब भी उन्हें परमेश्वर से प्रेम करना चाहिए, और उन्हें कोई अफ़सोस नहीं होना चाहिए, और परमेश्वर की गवाही देनी चाहिए। इस तरह का संकल्प पवित्र आत्मा की प्रेरणा है, और पवित्र आत्मा का कार्य है-लेकिन जान लो कि तुम हर गुजरते पल में इस तरह की प्रेरणा से संपन्न नहीं हो। कभी-कभी बैठकों में तुम बेहद प्रभावित और प्रेरित महसूस कर सकते हो और तुम अत्यधिक प्रशंसा करते हो और तुम नृत्य करते हो। तुम्हें लगता है कि दूसरे जिस पर सहभागिता कर रहे हैं, उसके बारे में तुम्हें एक अविश्वसनीय समझ है, तुम्हें अन्दर से बिलकुल नयेपन का एहसास होता है, और तुम्हारा हृदय खालीपन की किसी भी भावना के बिना बिल्कुल स्पष्ट होता है-यह सब पवित्र आत्मा के कार्य से संबंधित है। यदि तुम कोई ऐसे व्यक्ति हो जो नेतृत्व करता है, और तुम जब कलीसिया में काम करने के लिए जाते हो तो पवित्र आत्मा तुम्हें असाधारण प्रबोधन और प्रकाशन देता है, जिससे तुम अपने काम में अविश्वसनीय रूप से नेक, जिम्मेदार और गंभीर बन जाते हो, तो यह पवित्र आत्मा के कार्य से संबंधित है।” “पवित्र आत्मा का कार्य क्या है? पवित्र आत्मा का कार्य कैसे प्रकट किया जाता है?”पढ़ना जारी रखें