आसान बाइबल – एक ऐप जो किसी भी समय या स्थान पर आपके भक्तों के साथ कर सकता है।

क्ति हर ईसाई के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। भक्ति के माध्यम से, हम परमेश्वर के करीब जाते हैं, पूरे दिन सहजता और दृढ़ता से महसूस करते हैं, हमारे दिल में परमेश्वर के का मार्गदर्शन करते हैं, और जब कुछ भी फसल करते हैं, तो शांत रहते हैं।

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क्ति हर ईसाई के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। भक्ति के माध्यम से, हम परमेश्वर के करीब जाते हैं, पूरे दिन सहजता और दृढ़ता से महसूस करते हैं, हमारे दिल में परमेश्वर के का मार्गदर्शन करते हैं, और जब कुछ भी फसल करते हैं, तो शांत रहते हैं।

हाल ही में, बहन जूलिया ने मुझे संदेश भेजा, “मेरे पास भक्तों के लिए सुबह का समय नहीं है, आप जानते हैं, मेरे दो बच्चे हैं, सुबह मुझे उनके लिए नाश्ता तैयार करना होगा, उसके बाद मैं उन्हें उनके स्कूलों में ले जाऊंगी।” , अगला, मैं घर का काम करना शुरू करता हूं, बगीचे को सीधा करता हूं। जब मैंने इन्हें पूरा कर लिया है, तब यह काम पर जाने का समय है। 

संक्षेप में, सभी प्रकार की चीजों पर उसका कब्जा है। क्या आपको भी यही कठिनाई है? आप इसके साथ कैसे लेन – देन करते हैं?

आज, मैं एक ऐसे ऐप की सलाह देता हूं जिसके द्वारा आप किसी भी समय या स्थान पर आध्यात्मिक भक्ति का अभ्यास कर सकते हैं, परमेश्वर के वचन को पढ़ सकते हैं, और बाइबल का अध्ययन कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, भक्ति के लिए भजन और विभिन्न लेख हैं। इस ऐप की मदद से आप परमेश्वर के वचन को पढ़ने, भजन सुनने और प्रभु के साथ एक सामान्य संबंध स्थापित करने के लिए ख़ाली समय का लाभ उठा सकते हैं।

स्रोत: यीशु मसीह का अनुसरण करते हुए

आसान बाइबल (हिंदी बाइबल एप) – कभी भी बाइबल पढ़ें और परमेश्वर के करीब आएं

परमेश्वर के दैनिक वचन | “स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है IV” | अंश 139

  (अय्यूब 1:6-11) एक दिन यहोवा परमेश्‍वर के पुत्र उसके सामने उपस्थित हुए, और उनके बीच शैतान भी आया। यहोवा ने शैतान से पूछा, “तू कहाँ से आता है?” शैतान ने यहोवा को उत्तर दिया, “पृथ्वी पर इधर-उधर घूमते-फिरते और डोलते-डालते आया हूँ।”

परमेश्वर के दैनिक वचन | “स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है IV” | अंश 139

शैतान और यहोवा परमेश्वर के मध्य वार्तालाप
(अय्यूब 1:6-11) एक दिन यहोवा परमेश्‍वर के पुत्र उसके सामने उपस्थित हुए, और उनके बीच शैतान भी आया। यहोवा ने शैतान से पूछा, “तू कहाँ से आता है?” शैतान ने यहोवा को उत्तर दिया, “पृथ्वी पर इधर-उधर घूमते-फिरते और डोलते-डालते आया हूँ।” यहोवा ने शैतान से पूछा, “क्या तू ने मेरे दास अय्यूब पर ध्यान दिया है? क्योंकि उसके तुल्य खरा और सीधा और मेरा भय माननेवाला और बुराई से दूर रहनेवाला मनुष्य और कोई नहीं है।” शैतान ने यहोवा को उत्तर दिया, “क्या अय्यूब परमेश्‍वर का भय बिना लाभ के मानता है? क्या तू ने उसकी, और उसके घर की, और जो कुछ उसका है उसके चारों ओर बाड़ा नहीं बाँधा? तू ने तो उसके काम पर आशीष दी है, और उसकी सम्पत्ति देश भर में फैल गई है। परन्तु अब अपना हाथ बढ़ाकर जो कुछ उसका है, उसे छू; तब वह तेरे मुँह पर तेरी निन्दा करेगा।”

(अय्यूब 2:1-5) फिर एक और दिन यहोवा परमेश्‍वर के पुत्र उसके सामने उपस्थित हुए, और उनके बीच शैतान भी उसके सामने उपस्थित हुआ। यहोवा ने शैतान से पूछा, “तू कहाँ से आता है?” शैतान ने यहोवा को उत्तर दिया, “इधर-उधर घूमते-फिरते और डोलते-डालते आया हूँ।” यहोवा ने शैतान से पूछा, “क्या तू ने मेरे दास अय्यूब पर ध्यान दिया है कि पृथ्वी पर उसके तुल्य खरा और सीधा और मेरा भय माननेवाला और बुराई से दूर रहनेवाला मनुष्य और कोई नहीं है? यद्यपि तू ने मुझे बिना कारण उसका सत्यानाश करने को उभारा, तौभी वह अब तक अपनी खराई पर बना है।” शैतान ने यहोवा को उत्तर दिया, “खाल के बदले खाल; परन्तु प्राण के बदले मनुष्य अपना सब कुछ दे देता है। इसलिये केवल अपना हाथ बढ़ाकर उसकी हड्डियाँ और मांस छू, तब वह तेरे मुँह पर तेरी निन्दा करेगा।”

ये दो अंश परमेश्वर एवं शैतान के मध्य एक वार्तालाप हैं, ये इस बात को दर्ज करते हैं कि परमेश्वर ने क्या कहा और शैतान ने क्या कहा। क्या परमेश्वर ने बहुत अधिक कहा (नहीं।) उसने बहुत अधिक नहीं कहा, और उसने बड़ी सरलता से कहा। क्या हम परमेश्वर के सरल वचनों में उसकी पवित्रता को देख सकते हैं? कुछ लोग कहेंगे “यह आसान नहीं है।” अतः क्या हम शैतान के प्रत्युत्तरों में उसकी भयंकरता को देख सकते हैं? (हाँ।) अतः आओ हम पहले देखें कि यहोवा परमेश्वर ने शैतान से किस प्रकार के प्रश्न पूछे। (तू कहाँ से आता है?) क्या यह एक सीधा प्रश्न है? (हाँ।) क्या इसमें कोई छिपा हुआ अर्थ है? (नहीं।) यह केवल एक प्रश्न है, जो शुद्ध है, इसमें कोई अन्य उद्देश्य नहीं है। यदि मुझे तुम सब से पूछना होता: “तू कहाँ से आता है?” तब तुम लोग किस प्रकार उत्तर दोगे? क्या यह उत्तर देने के लिए एक कठिन प्रश्न है? क्या तुम लोग कहोगे: “इधर-उधर घूमते-फिरते और डोलते-डालते आया हूँ”? (नहीं।) तुम सब इस प्रकार उत्तर नहीं दोगे, अतः तब तुम लोगों को कैसा लगता है जब तुम लोग शैतान को इस रीति से उत्तर देते हुए देखते हो? (हम महसूस करते हैं कि शैतान बेढंगा और धूर्त है।) तुम लोगों को ऐसा लगता है? क्या तू बता सकता है कि मैं क्या महसूस कर रहा हूँ? हर बार जब मैं इन शब्दों को देखता हूँ तो मुझे घृणा महसूस होती है। क्या तुम सब को भी घृणा महसूस होती है? (हाँ।) क्यों घृणा महसूस होती है? क्योंकि वह बिना कुछ कहे बात करता है! क्या उसने परमेश्वर के प्रश्न का उत्तर दिया? (नहीं।) क्यों? क्योंकि उसके शब्द कोई उत्तर नहीं थे, उनका कोई परिणाम नहीं था, सही है? वे ऐसे उत्तर नहीं थे जिन्हें परमेश्वर के प्रश्नों की ओर निर्देशित किया गया था। “पृथ्वी पर इधर-उधर घूमते-फिरते और डोलते-डालते आया हूँ।” मुझे बताओ, क्या तू इन शब्दों को समझता है? क्या तू समझता है? अतः शैतान पृथ्वी पर कहाँ से आया है? क्या तुम लोगों को कोई उत्तर मिला कि वह कहाँ से आया है? (नहीं।) यह शैतान की धूर्तता की “प्रतिभा” है, किसी को भी यह पता लगने न देना कि वह वास्तव में क्या कह रहा है। इन शब्दों को सुनने के बाद तू अभी भी यह परख नहीं सकता है कि उसने क्या कहा है, तथापि उसने उत्तर देना समाप्त कर लिया है। कदाचित् वह मानता है कि उसने उचित रूप से उत्तर दिया है। तो तू कैसा महसूस करता है? घृणा? (हाँ।) घृणा, सही है? अब तूने इन शब्दों से घृणा महसूस करना शुरू कर दिया है। शैतान सीधे तौर पर बात नहीं करता है, और तुझे अपने सर खुजलाने के लिए छोड़कर अपने शब्दों के स्रोत को समझने में असमर्थ कर देता है। वह सोच समझकर, एवं धूर्तता से बोलता है, और वह स्वयं अपने सार, एवं अपने स्वयं के स्वभाव के द्वारा शासन करता है। शैतान इन शब्दों पर बहुत लम्बे समय के लिए विचार नहीं करता है; वह उन्हें स्वभाविक रूप में अभिव्यक्त करता है। जैसे ही तू उससे पूछता है कि वह कहाँ से आया है, तो वह तुझे उत्तर देने के लिए इन शब्दों का उपयोग करता है। “वह पृथ्वी पर कहाँ से आया है?” तू बिलकुल उलझन में पड़ जाता है, कभी नहीं जान पाता कि वह कहाँ से है। क्या तुम लोगों के बीच में भी ऐसा कोई है जो इस प्रकार से बोलता है? (हाँ।) यह बोलने का कैसा तरीका है! (यह अस्पष्ट है और निश्चित उत्तर नहीं देता है।) बोलने के इस तरीके का वर्णन करने के लिए हमें किस प्रकार के शब्दों का उपयोग करना चाहिए? यह ध्यान भटकानेवाला और गुमराह करनेवाला है, है कि नहीं? कुछ लोग इस रीति से बोलते हैं। तू किसी से पूछता है: “मैंने तुझे कल देखा था। तू कहाँ जा रहा था?” वे तुझे यह बताने के लिए सीधा उत्तर नहीं देते हैं कि वे कल कहाँ गए थे। वे कहते हैं “कल कितना बढ़िया दिन था। बहुत थक गया!” क्या उसने तुम्हारे प्रश्न का उत्तर दिया? यह वह उत्तर नहीं है जो तू चाहता था, है ना? यह मनुष्य की चालाकी की “प्रतिभा” है। तू कभी खोज नहीं सकता है कि वे क्या कहना चाहते हैं या तू उनके शब्दों के पीछे के स्रोत एवं इरादे को कभी नहीं समझ सकता है। तू उनके हृदय को नहीं समझ सकता है क्योंकि उनके हृदय में उनकी स्वयं की कहानी है—यह विश्वासघात है। क्या तुम लोग भी अकसर इस तरह से बोलते हो? (हाँ।) तो तुम लोगों का उद्देश्य क्या है? क्या यह कई बार तुम लोगों की स्वयं की रुचियों की सुरक्षा के लिए होता है, क्या यह कई बार तुम लोगों के स्वयं के पद, एवं तुम लोगों की स्वयं की छवि को बनाए रखने के लिए है, तुम लोगों के निजी जीवन के रहस्यों को गुप्त रखने के लिए, और तुम लोगों की स्वयं की प्रतिष्ठा को बचाने के लिए होता है? उद्देश्य चाहे कुछ भी हो, यह तुम लोगों की रुचियों से अलग नही है, यह तुम लोगों की रुचियों से जुड़ा हुआ है, है कि नहीं? क्या यह मनुष्य का स्वभाव है? (हाँ।) अतः क्या हर एक व्यक्ति जिसके पास इस प्रकार का स्वभाव है वह शैतान का सगा सम्बन्धी नहीं है? हम ऐसा कह सकते हैं, क्या हम नहीं कह सकते हैं? साधारण रूप से कहें, तो यह प्रकटीकरण घृणित एवं वीभत्स है। अब तुम लोग भी घृणा़ महसूस करते हो, क्या तुम लोग नहीं करते हो? (हाँ।) यह शैतान की धूर्तता एवं बुराई को दर्शाता है।

प्रथम अंश को फिर से देखते हैं। शैतान फिर से यहोवा को प्रत्युत्तर देता है, यह कहते हुए: “क्या अय्यूब परमेश्‍वर का भय बिना लाभ के मानता है?” वह अय्यूब के विषय में यहोवा के आंकलन पर आक्रमण करना प्रारम्भ करता है, और इस आक्रमण को शत्रुता के द्वारा रंगा गया है। “क्या तू ने उसकी, और उसके घर की, और जो कुछ उसका है उसके चारों ओर बाड़ा नहीं बाँधा?” यह अय्यूब पर किए गए यहोवा के कार्य के विषय में शैतान की पहचान एवं उसका आंकलन है। शैतान इस तरह आंकलन करता है, यह कहते हुए: “तू ने तो उसके काम पर आशीष दी है, और उसकी सम्पत्ति देश भर में फैल गई है। परन्तु अब अपना हाथ बढ़ाकर जो कुछ उसका है, उसे छू; तब वह तेरे मुँह पर तेरी निन्दा करेगा।” शैतान सदा अस्पष्टता से बात करता है, किन्तु यहाँ वह निश्चय के साथ बात करता है। निश्चय के साथ कहे गए ये शब्द एक आक्रमण हैं, ईश निंदा हैं और यहोवा परमेश्वर, और स्वयं परमेश्वर से एक मुकाबला है। तुम लोगों को कैसा लगता है जब तुम लोग इसे सुनते हैं? क्या तुम लोगों को घृणा महसूस होती है? (हाँ।) क्या तुम सब उसके इरादों को समझ सकते हो? सर्वप्रथम, वह अय्यूब के विषय में यहोवा के आंकलन को अस्वीकार करता है—ऐसा पुरुष जो परमेश्वर का भय मानता और बुराई से दूर रहता है। तब वह हर उस चीज़ को नकारता है जिसे अय्यूब यहोवा के भय में कहता एवं करता है। क्या यह आरोप लगाना है? वह सब जिसे यहोवा करता एवं कहता है शैतान उस पर आरोप लगाता, नकारता एवं सन्देह करता है। वह विश्वास नहीं करता है, यह कहते हुए कि “यदि तू कहता है कि परिस्थितियां ऐसी हैं, तो ऐसा कैसे हो सकता है कि मैं ने इसे नहीं देखा है? तूने उसे बहुत सारी आशीषें दी हैं, तो वह कैसे तेरा भय नहीं मान सकता है?” वह सब जिसे परमेश्वर करता है क्या यह उन सब का परित्याग नहीं है? दोषारोपण, परित्याग, ईश निन्दा—क्या उसके शब्द आक्रामक नहीं हैं? जो कुछ शैतान अपने हृदय में सोचता है क्या वे उसकी एक सच्ची अभिव्यक्ति है? (हाँ।) ये वचन निश्चित तौर पर वैसे नहीं हैं जैसा हमने बस अभी अभी पढ़ा था। “पृथ्वी पर इधर-उधर घूमते-फिरते और डोलते-डालते आया हूँ।” वे पूरी तरह से उन से अलग हैं। इन शब्दों के माध्यम से, शैतान परमेश्वर के प्रति उस मनोवृत्ति और परमेश्वर के प्रति अय्यूब के भय के विषय में उस घृणा का पूरी तरह से पर्दाफाश करता है जिसे वह अपने हृदय में रखता है। जब यह घटित होता है, तो उसकी दुर्भावना और बुरे स्वभाव का पूरी तरह से खुलासा हो जाता है। वह उनसे घृणा करता है जो यहोवा का भय मानते हैं, वह उनसे घृणा करता है जो बुराई से दूर रहते हैं, और उससे भी बढ़कर वह मनुष्यों को आशीषें प्रदान करने के लिए यहोवा से घृणा करता है। वह अय्यूब को नष्ट करने के लिए इस अवसर का उपयोग करना चाहता है जिसे परमेश्वर ने अपने हाथों से ऊपर उठाया है, उसे बर्बाद करने के लिए, वह कहता है: “तू कहता है कि अय्यूब तेरा भय मानता है और बुराई से दूर रहता है। मैं इसे अलग तरह से देखता हूँ।” वह यहोवा को क्रोधित करने एवं उसकी परीक्षा लेने के लिए विभिन्न तरीकों का उपयोग करता है, और अलग अलग तरीकों का उपयोग करता है ताकि यहोवा परमेश्वर अय्यूब को शैतान को सौंप दे कि उसे मनमौजी ढंग से कुशलतापूर्वक इस्तेमाल किया जाए, उसे नुकसान पहुंचाया जाए और उससे निपटा जाए। वह इस मनुष्य का विनाश करने के लिए इस अवसर का लाभ उठाना चाहता है जो परमेश्वर की आँखों में धर्मी एवं सिद्ध है। क्या उसके पास इस प्रकार का हृदय होना एक क्षणिक आवेग है? नहीं, यह नहीं है। इसे बनने में लम्बा समय लगा है। परमेश्वर किसी व्यक्ति के लिए कार्य करता है और उसकी देखभाल करता है, किसी व्यक्ति पर नज़र रखता है, और शैतान उसके हर एक कदम का करीब से पीछा करता है। परमेश्वर किसी पर भी अनुग्रह करता है, तो शैतान भी पीछे पीछे चलते हुए नज़र रखता है। यदि परमेश्वर को यह व्यक्ति चाहिए, तो शैतान परमेश्वर को रोकने के लिए अपने सामर्थ्य में सब कुछ करेगा, वह विभिन्न बुरे तरीकों का इस्तेमाल करता है ताकि वह कार्य जिसे परमेश्वर ने किया है उसे भरमाए, परेशान और तबाह करे जिससे वह अपने छिपे हुए उद्देश्य को हासिल कर सके। उसका उद्देश्य क्या है? वह नहीं चाहता है कि परमेश्वर के पास कोई हो; उसे वे सभी लोग चाहिए जिन्हें परमेश्वर चाहता है, ताकि वह उन पर कब्जा करे, उनका नियन्त्रण करे, उनका आदेश ले जिससे वे उसकी आराधना करें, जिससे वे उसके साथ रहते हुए बुरे कार्य करें। क्या यह शैतान का भयानक इरादा नहीं है? सामान्यतः, तुम लोग अकसर कहते हो कि शैतान कितना बुरा, एवं कितना खराब है, परन्तु क्या तुम लोगों ने उसे देखा है? तुम लोग सिर्फ यह देख सकते हो कि मनुष्य कितना बुरा है और मनुष्य ने असल में नहीं देखा है कि शैतान वास्तव में कितना बुरा है। किन्तु क्या तुम लोगों ने इसे अय्यूब से सम्बन्धित विषय में देखा है? (हाँ।) इस विषय ने शैतान के भयंकर चेहरे और उसके सार को बिलकुल स्पष्ट किया है। शैतान परमेश्वर के साथ युद्ध में है, उसके पीछे पीछे चलता रहता है। उसका उद्देश्य परमेश्वर के समस्त कार्य को नष्ट करना है जिसे परमेश्वर करना चाहता है, उन लोगों पर कब्जा एवं नियन्त्रण करना है जिन्हें परमेश्वर चाहता है, उन लोगों को पूरी तरह से मिटा देना है जिन्हें परमेश्वर चाहता है। यदि उन्हें मिटाया नहीं जाता है, तो वे शैतान के द्वारा उपयोग होने के लिए उसके कब्जे में आ जाते हैं—यह उसका उद्देश्य है। और परमेश्वर क्या करता है? परमेश्वर इस अंश में केवल एक ही सरल वाक्य कहता है; जो कुछ परमेश्वर करता है उससे अधिक यहाँ पर किसी भी चीज़ का कोई लेखा नहीं है, परन्तु जो कुछ शैतान करता एवं कहता है उसके विषय में हम यहाँ पर अनेक लेख देखते हैं। नीचे दिए गए पवित्र शास्त्र में, यहोवा ने शैतान से पूछा, “तू कहाँ से आता है?” शैतान का उत्तर क्या था? (यह अभी भी ऐसा ही है “इधर-उधर घूमते-फिरते और डोलते-डालते आया हूँ।”) यह अभी भी वही वाक्य है। मुझे बताओ, यह कैसे शैतान का आदर्श-वाक्य, एवं शैतान की श्रेष्ठ कृति कैसे बन गया है। क्या शैतान घृणास्पद नहीं है? इस घिनौने वाक्य को एक बार कहना ही काफी है। शैतान हमेशा इस वाक्य पर क्यों लौट आता है। यह एक बात को सिद्ध करता है: शैतान का स्वभाव बदलने वाला नहीं है। उसका भयंकर चेहरा कुछ ऐसा नहीं है कि उसे लम्बे समय तक छिपाकर रखा जा सकता है। परमेश्वर उससे एक प्रश्न पूछता है और वह इस तरह से प्रत्युतर देता है, चिंता मत करो कि वह लोगों से कैसा व्यवहार करता है। वह परमेश्वर से नहीं डरता है, वह परमेश्वर का भय नहीं मानता है, और वह परमेश्वर की आज्ञा नहीं मानता है। अतः वह निर्लज्जता से परमेश्वर के सम्मुख ढीठ होने की हिम्मत करता है, परमेश्वर के प्रश्न की लीपापोती करने के लिए इन्हीं वचनों का उपयोग करने की हिम्मत करता है, परमेश्वर के प्रश्न का उत्तर देने के लिए इसी उत्तर का उपयोग करने की हिम्मत करता है, परमेश्वर को उलझाने के लिए इस उत्तर का उपयोग करने की कोशिश करने की हिम्मत करता है—यह शैतान का कुरूप चेहरा है। वह परमेश्वर की सर्वशक्तिमत्ता पर विश्वास नहीं करता है, वह परमेश्वर के अधिकार पर विश्वास नहीं करता है, और वह निश्चित रूप से परमेश्वर के प्रभुत्व में आज्ञा मानने के लिए तैयार नहीं है। शैतान सदा परमेश्वर के विरोध में रहता है, वह सब कुछ जो परमेश्वर करता है उस पर आक्रमण करता है, वह सब कुछ जो परमेश्वर करता है उसको तबाह करने की कोशिश करता है—यह उसका बुरा उद्देश्य है।

स्रोत: यीशु मसीह का अनुसरण करते हुए

आदम और हव्वा की कहानी पढ़िए और उन्हें जानिए। इस तथ्य से कि परमेश्वर आदम और हव्वा के लिए चमड़े का वस्त्र बनाते है, हम देख सकते हैं कि परमेश्वर का प्रेम वास्तविक और व्यावहारिक है, और परमेश्वर हर समय हमारे पक्ष में है।

मसीहियों को मुश्किलों का सामना कैसे करना चाहिए?

जीवन निर्बाध नौकायन नहीं है, और यह हमारे लिए कुछ कठिनाइयों और अप्रिय चीजों, जैसे कि कर्ज का तनाव, जीवन का दबाव, शादी में अस्वस्थता, बेरोजगारी का दर्द, और बीमारी की पीड़ा के साथ आने के लिए अपरिहार्य है। कुछ लोग भ्रमित हैं: परमेश्वर प्रेम है और वह सर्वशक्तिमान है, इसलिए वह हमें कष्ट क्यों देता है?

जीवन निर्बाध नौकायन नहीं है, और यह हमारे लिए कुछ कठिनाइयों और अप्रिय चीजों, जैसे कि कर्ज का तनाव, जीवन का दबाव, शादी में अस्वस्थता, बेरोजगारी का दर्द, और बीमारी की पीड़ा के साथ आने के लिए अपरिहार्य है। कुछ लोग भ्रमित हैं: परमेश्वर प्रेम है और वह सर्वशक्तिमान है, इसलिए वह हमें कष्ट क्यों देता है? “मसीहियों को मुश्किलों का सामना कैसे करना चाहिए?”पढ़ना जारी रखें

Hindi Gospel Movie अंश 3 : “मेरे काम में दखल मत दीजिए” – क्या हम प्रभु यीशु द्वारा उद्धार प्राप्ति के बाद स्वर्ग के राज्य में ले जाये जा सकेंगे

सलीब पर प्रभु यीशु के “यह समाप्त हो गया” वचनों के आधार पर, धार्मिक मण्डलियों के पादरी और एल्‍डर्स आदतन यह निष्‍कर्ष निकालते हैं कि इस प्रकार से मानवजाति के उद्धार का परमेश्‍वर का कार्य समाप्त हो गया था। प्रभु की वापसी पर, लोगों के शुद्धिकरण और उन्‍हें बचाने की किसी भी आवश्‍यकता के बिना, विश्‍वासियों को स्‍वर्ग के राज्‍य में स्‍वीकार किया जाएगा।

Hindi Gospel Movie अंश 3 : “मेरे काम में दखल मत दीजिए” – क्या हम प्रभु यीशु द्वारा उद्धार प्राप्ति के बाद स्वर्ग के राज्य में ले जाये जा सकेंगे

सलीब पर प्रभु यीशु के “यह समाप्त हो गया” वचनों के आधार पर, धार्मिक मण्डलियों के पादरी और एल्‍डर्स आदतन यह निष्‍कर्ष निकालते हैं कि इस प्रकार से मानवजाति के उद्धार का परमेश्‍वर का कार्य समाप्त हो गया था। प्रभु की वापसी पर, लोगों के शुद्धिकरण और उन्‍हें बचाने की किसी भी आवश्‍यकता के बिना, विश्‍वासियों को स्‍वर्ग के राज्‍य में स्‍वीकार किया जाएगा। क्‍या पादरियों और एल्‍डर्स का यह दृष्टिकोण परमेश्‍वर के वचनों के अनुरूप है? जब सलीब पर प्रभु यीशु ने “यह समाप्त हो गया” कहा तो अंततः वह किस बात को संदर्भित कर रहा था? अंत के दिनों में परमेश्‍वर लोगों का न्‍याय करने और उन्हें शुद्ध करने का कार्य करते हुए क्‍यों सत्‍य को व्‍यक्‍त करना चाहेगा? स्वर्ग के राज्य में किस प्रकार के लोग वास्तव में प्रवेश कर सकते हैं?

ईसाई स्वर्गारोहण के रहस्य को समझने और प्रभु यीशु की वापसी का स्वागत करने के लिये यह लेख पढ़ें।

अंश 3 : “प्रतीक्षारत” – केवल वे ही लोग स्वर्ग के साम्राज्य में प्रवेश करने योग्य हैं जो परमेश्वर की इच्छा का पालन करेंगे।

परमेश्वर के दैनिक वचन | “परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III” | अंश 70

तुम क्या सोचते हो? यदि किसी मनुष्य की सौ भेड़ें हों, और उनमें से एक भटक जाए, तो क्या वह निन्यानबे को छोड़कर, और पहाड़ों पर जाकर, उस भटकी हुई को न ढूँढ़ेगा? और यदि ऐसा हो कि उसे पाए, तो मैं तुम से सच कहता हूँ कि वह उन निन्यानबे भेड़ों के लिये जो भटकी नहीं थीं, इतना आनन्द नहीं करेगा जितना कि इस भेड़ के लिये करेगा। ऐसा ही तुम्हारे पिता की जो स्वर्ग में है यह इच्छा नहीं कि इन छोटों में से एक भी नष्‍ट हो।

खोई हुई भेड़ का दृष्टान्त

(मत्ती 18:12-14) तुम क्या सोचते हो? यदि किसी मनुष्य की सौ भेड़ें हों, और उनमें से एक भटक जाए, तो क्या वह निन्यानबे को छोड़कर, और पहाड़ों पर जाकर, उस भटकी हुई को न ढूँढ़ेगा? और यदि ऐसा हो कि उसे पाए, तो मैं तुम से सच कहता हूँ कि वह उन निन्यानबे भेड़ों के लिये जो भटकी नहीं थीं, इतना आनन्द नहीं करेगा जितना कि इस भेड़ के लिये करेगा। ऐसा ही तुम्हारे पिता की जो स्वर्ग में है यह इच्छा नहीं कि इन छोटों में से एक भी नष्‍ट हो। “परमेश्वर के दैनिक वचन | “परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III” | अंश 70″पढ़ना जारी रखें

Hindi Christian Worship Song | सिर्फ़ ईमानदार लोगों में होती है इंसानी समानता | The Word of God Makes Me Reborn

लाभ के लिए आचरण के सभी मानकों को त्याग दिया मैंने,
जीवन व्यतीत करने के लिए बेशर्मी से कपट का इस्तेमाल किया मैंने।
विवेक या नैतिकता की परवाह की नहीं मैंने,
सच्चाई या गरिमा की परवाह की नहीं मैंने।

Hindi Christian Worship Song | सिर्फ़ ईमानदार लोगों में होती है इंसानी समानता | The Word of God Makes Me Reborn

लाभ के लिए आचरण के सभी मानकों को त्याग दिया मैंने,
जीवन व्यतीत करने के लिए बेशर्मी से कपट का इस्तेमाल किया मैंने।
विवेक या नैतिकता की परवाह की नहीं मैंने,
सच्चाई या गरिमा की परवाह की नहीं मैंने। “Hindi Christian Worship Song | सिर्फ़ ईमानदार लोगों में होती है इंसानी समानता | The Word of God Makes Me Reborn”पढ़ना जारी रखें

हर युग में नया कार्य करता है परमेश्वर | Hindi Christian Song With Lyrics

बदलती नहीं कभी बुद्धि परमेश्वर की,बदलता नहीं कभी चमत्कार परमेश्वर का,बदलती नहीं कभी धार्मिकता परमेश्वर की,बदलता नहीं कभी प्रताप परमेश्वर का।

हर युग में नया कार्य करता है परमेश्वर | Hindi Christian Song With Lyrics

बदलती नहीं कभी बुद्धि परमेश्वर की,
बदलता नहीं कभी चमत्कार परमेश्वर का,
बदलती नहीं कभी धार्मिकता परमेश्वर की,
बदलता नहीं कभी प्रताप परमेश्वर का।
बदलता नहीं कभी सार-तत्व परमेश्वर का,
बदलता नहीं कभी स्वरुप परमेश्वर का,
और कार्य उसका आगे बढ़ रहा है, गहरा हो रहा है;
कभी पुराना नहीं होता, सदा नया रहता है परमेश्वर।
नया नाम, नया काम, नई इच्छा, नया स्वभाव होता है हर युग में।
नया नाम, नया काम, नई इच्छा, नया स्वभाव होता है हर युग में।

लोग अगर न देख पाए इस स्वभाव को,
तो चढ़ा देंगे सूली पर, सीमांकित कर देंगे परमेश्वर को!
कार्य परमेश्वर का नया होता है सदा, कभी पुराना नहीं होता,
मगर स्वरूप परमेश्वर का कभी परिवर्तित नहीं होता।
परिभाषित कर नहीं सकते तुम गतिहीन भाषा में,
6,000 साल परमेश्वर के काम के।
जितना समझते हो तुम उतना सरल नहीं है परमेश्वर,
युगयुगांतर तक चलता है काम उसका।
यहोवा से यीशु बदल गया नाम उसका।
युगयुगान्तर में देखो बदल गया काम उसका!
नया नाम, नया काम, नई इच्छा, नया स्वभाव होता है हर युग में।

अग्रसर हो रहा है इतिहास, और आगे बढ़ रहा है।
6,000 साल की योजना का अंत करने,
काम परमेश्वर का सदा आगे बढ़ रहा है।
मगर अभी भी हर दिन, हर वर्ष, करने के लिये है नया काम।
नए मार्ग, नया काल, नई चीज़ें और ज़्यादा बड़े काम।
अटका नहीं है परमेश्वर पुराने तरीकों पर,
सदा अविरल चल रहा है नया काम।
नया नाम, नया काम, नई इच्छा, नया स्वभाव होता है हर युग में।
नया नाम, नया काम, नई इच्छा, नया स्वभाव होता है हर युग में।

“मेमने का अनुसरण करना और नए गीत गाना” से

Jesus songs in Hindi – A variety of beautiful songs convey God’s selfless love and His concern for us. Listen to them and sense God’s everlasting salvation.

Morning Prayer in Hindi | परमेश्वर के करीब हो जाओ | परमेश्वर की इच्छा को समझें

 

Hindi Gospel Movie अंश 2 : “भक्ति का भेद” – जब प्रभु लौटेंगे तो क्या वे मनुष्यों को प्रकटन देंगे?

कई धार्मिक पादरियों और एल्डर्स ने, क्योंकि उन्होंने कई वर्षों से परमेश्वर पर विश्वास किया है, हमेशा परमेश्वर के लिए कड़ी मेहनत से कार्य किया है और प्रभु की वापसी की प्रतीक्षा करते हुए काफी सतर्क रहे हैं, उनका मानना है कि जब प्रभु आएंगे तो वे निश्चित रूप से उन्हें प्रकटन देंगे।

मसीह के वचन-मसीह का सारतत्व है परमेश्वर

देहधारी परमेश्वर को मसीह कहा जाता है, और इसलिए वह मसीह, जो लोगों को सत्य दे सकता है परमेश्वर कहलाता है। इसमें कुछ भी अतिशयोक्ति नहीं है, क्योंकि वह परमेश्वर के सार को धारण किए है, और अपने कार्य में परमेश्वर के स्वभाव और बुद्धि को धारण करता है, और ये चीजें मनुष्य के लिये अप्राप्य हैं।

KOA077S-B-主在災前隱秘降臨-我們如何認出他就是
मसीह के वचन-मसीह का सारतत्व है परमेश्वर
 
परमेश्वर कहते हैं, “देहधारी परमेश्वर को मसीह कहा जाता है, और इसलिए वह मसीह, जो लोगों को सत्य दे सकता है परमेश्वर कहलाता है। इसमें कुछ भी अतिशयोक्ति नहीं है, क्योंकि वह परमेश्वर के सार को धारण किए है, और अपने कार्य में परमेश्वर के स्वभाव और बुद्धि को धारण करता है, और ये चीजें मनुष्य के लिये अप्राप्य हैं। जो अपने आप को मसीह कहते हैं, फिर भी परमेश्वर का कार्य नहीं कर सकते, वे सभी धोखेबाज़ हैं। मसीह पृथ्वी पर परमेश्वर की अभिव्यक्ति मात्र नहीं है, बल्कि वह विशेष देह भी है जिसे धारण करके परमेश्वर लोगों के बीच रहकर अपना कार्य पूरा करता है। यह वह देह नहीं है जो किसी भी मनुष्य के द्वारा प्रतिस्थापित किया जा सकता है, बल्कि वह देह है, जो परमेश्वर के कार्य को पृथ्वी पर अच्छी तरह से वहन कर सकता है और परमेश्वर के स्वभाव को अभिव्यक्त करता है, और अच्छी प्रकार से परमेश्वर का प्रतिनिधित्व कर सकता है, और मनुष्य को जीवन प्रदान कर सकता है। देर-सवेर, मसीह का भेष धारण करने वालों का पतन होगा, क्योंकि वे भले ही मसीह होने का दावा करते हैं, किंतु उनमें किंचितमात्र भी मसीह का सार नहीं होता। इसलिए मैं कहता हूँ कि मसीह की प्रामाणिकता मनुष्य के द्वारा परिभाषित नहीं की जा सकती है, परन्तु स्वयं परमेश्वर के द्वारा इसका उत्तर दिया और निर्णय लिया जा सकता है” (“केवल अंतिम दिनों का मसीह ही मनुष्य को अनंत जीवन का मार्ग दे सकता है”)।
स्रोत: यीशु मसीह का अनुसरण करते हुए
 
यीशु मसीह के गीत, ये खूबसूरत गीत परमेश्वर के निस्वार्थ प्रेम और हमारे लिए उसकी चिंता को व्यक्त करते हैं। इन गीतों को सुनें और परमेश्वर के अनन्त उद्धार को समझें।

आसान बाइबल की ऐप- भक्तों के लिए एक सुविधाजनक और त्वरित सहायक

बाइबल पढ़ना एक ऐसा ऐप है जिसके द्वारा आप आसानी से शास्त्र की खोज कर सकते हैं। शास्त्र को पढ़ने के आधार पर, कुछ भाग हैं, जिनमें बाइबिल का पता लगाना, विषय शास्त्र, प्रश्नोत्तर, विश्वास के बारे में, सुसमाचार वीडियो, गवाही लेख, और इसी तरह शामिल हैं। इसे पंजीकृत करने के बाद, आप एक ही खाते में लॉग इन कर सकते हैं यहां तक ​​कि आप दो अलग-अलग मोबाइल फोन का उपयोग करते हैं, और आप किसी भी समय या स्थान पर अपने डेटा को सिंक्रनाइज़ कर सकते हैं। यह बहुत सुविधाजनक है। चूंकि यह ऐप जारी किया गया था, इसने कई अच्छी टिप्पणियां जीती हैं। फिर इस ऐप में क्या विशेषताएं हैं?

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